Krishna Devotee Sunita: आज देशभर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. चारों तरफ ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे गूंज रहे हैं, लेकिन आज जन्माष्टमी के इस खास मौके पर हम आपको बताएंगे आस्था, भक्ति और एक अद्भुत चमत्कार की ऐसी सच्ची कहानी, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे. एक ऐसी साध्वी, जिनकी हथेलियों पर पिछले 35 सालों से हर सुबह भगवान श्री कृष्ण का माखन अपने आप प्रकट होता है. आखिर क्या है कान्हा की इस अनन्य गोपी की कहानी, जानने के लिए पढ़ें यह खास खबर.
हथलियों पर प्रकट होता है माखन
तुम मेरी गोपी हो… सपने में मिले कान्हा के इस एक वाक्य ने भोपाल से 50 किमी दूर ग्राम मोलगा की रहने वाली 53 वर्षीया साध्वी सुनीता वर्मा की जिंदगी हमेशा-हमेशा के लिए बदल दी. दावा है कि बीते 35 सालों से हर सुबह 9 बजे जब सुनीता बाई पूजा और श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ करके उठती हैं तो उनकी दोनों हथेलियों पर ताजा, सुगंधित मक्खन अपने आप प्रकट हो जाता है. 15 साल की उम्र में कान्हा ने सपने में दर्शन देकर उनसे कहा था, सभी गोपियां मुझसे माखन छीनकर खाती थीं, इसलिए मैं तुम्हें माखन का वरदान देता हूं. बस, उसी दिन से जब भी वे लड्डू गोपाल का ध्यान लगाती हैं, माखन प्रकट हो जाता है और वे इसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांट देती हैं.
दुखों को हराकर चुनी संन्यास की राह
सुनीता जी के लिए यह भक्ति राह आसान नहीं थी. साल 1990-91 में उनका विवाह भोपाल के नरेला निवासी जवान ओमप्रकाश वर्मा से हुआ था, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद उनके पति जम्मू-कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए. इस गहरे आघात के बाद उन्होंने संसार त्याग दिया, मायके मोलगा लौट आईं और पूर्णत: संन्यास लेकर कान्हा को ही अपना सबकुछ मान लिया. करीब 10 साल पहले उन्होंने अपने निजी खर्च से गांव में एक भव्य राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण करवाया, जहां रहकर वे आज साध्वी जीवन जी रही हैं.
आज रात 12 बजे मचेगी जन्मोत्सव की धूम
आज जन्माष्टमी के पावन अवसर पर ग्राम मोलगा किसी मिनी गोकुल जैसा नजर आ रहा है. सुबह से ही साध्वी सुनीता बाई के हाथों माखन प्रकटीकरण के इस अलौकिक दृश्य को देखने और कान्हा का आशीर्वाद लेने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. आज रात 12 बजे जैसे ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म होगा, मंदिर परिसर में आतिशबाजी और महाआरती के साथ जन्मोत्सव का महाउल्लास मनाया जाएगा. इसे कान्हा की बाल लीला का प्रत्यक्ष चमत्कार कहें या फिर एक भक्त की निश्छल और अटूट भक्ति का फल, सुनीता बाई की यह प्रेम साधना आज हर किसी को भावविभोर कर रही है.
