Twisha Sharma Case: समय बड़ा बलवान है, जो कभी न्याय की कुर्सी पर बैठकर दूसरों को जेल की सजा सुनाते थे, आज कानून के लंबे हाथों ने उन्हें खुद सलाखों के पीछे पहुंचा दिया. एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके वकील बेटे समर्थ सिंह की गिरफ्तारी के बाद आम जनता के बीच यही चर्चाएं तेज हैं.
इस हाई प्रोफाइल मामले में शुक्रवार को भोपाल की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ को 5-5 दिन की सीबीआई रिमांड पर भेज दिया है. दोनों आरोपी अब 2 जून तक केंद्रीय जांच एजेंसी की कस्टडी में रहेंगे. कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दलील दी कि आरोपी समर्थ पूछताछ में सहयोग नहीं कर रहा है, इसलिए दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करना और साक्ष्यों का मिलान करना बेहद जरूरी है.
सैनिक परिवार के संघर्ष की कहानी
यह मामला सिर्फ एक हाई प्रोफइल गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि एक पीडि़त सैनिक परिवार के उस लंबे और पथरीले संघर्ष की कहानी है, जिसने व्यवस्था के सबसे रसूखदार चेहरे के खिलाफ घुटने नहीं टेके.
रसूख के खिलाफ लड़ाई
मृतका ट्विशा शर्मा का परिवार सेना से जुड़ा हुआ है. जब एक रसूखदार पूर्व जज और उनके वकील बेटे पर आरोप लगे तो शुरुआती जांच को प्रभावित करने की पूरी कोशिश की गई.
पूर्व सैनिकों का मिला साथ
पीडि़त परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए देश की सेवा कर चुके कई रिटायर्ड सैनिक भी मैदान में उतर आए. रैलियां, प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई के लिए पूर्व सैनिकों ने एकजुट होकर एक दीवार की तरह परिवार का साथ दिया, जिसके आगे प्रशासन को झुकना पड़ा.
अंतिम संस्कार को लेकर हुआ था कड़ा संघर्ष
घटना के बाद न्याय की मांग को लेकर परिजनों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया था. निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर शव को रखकर लंबा प्रदर्शन चला था. कई दिनों के भारी तनाव, प्रशासनिक खींचतान और निष्पक्ष जांच के ठोस आश्वासन के बाद ही गमगीन माहौल में ट्विशा का 13 दिन बाद अंतिम संस्कार हो सका था. परिवार का यही संघर्ष था जिसने आखिरकार मामले की जांच को सीबीआई के हाथों में सौंपने पर मजबूर किया. एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से ही उनके ससुराल पक्ष (पूर्व जज गिरिबाला और पति समर्थ) पर प्रताडऩा और हत्या के गंभीर आरोप लगे थे.
जेवरात की बरामदगी
सीबीआई ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच लगातार जारी है. हालांकि ट्विशा की शादी के जेवरात और कीमती सामान बरामद किए जा चुके हैं, लेकिन मौत से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों की बरामदगी और गवाहों का सत्यापन होना अभी बाकी है.
गवाहों को धमकाने की आशंका
सीबीआई ने अदालत में अंदेशा जताया कि रसूखदार होने के कारण आरोपी साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं, इसलिए इन्हें कस्टडी में रखना जरूरी है.
इस केस के दो अहम कानूनी पेच
चूंकि आरोपी गिरिबाला सिंह खुद एक पूर्व जिला जज हैं, इसलिए उनकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया बेहद जटिल थी. सीबीआई ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद इसकी सूचना प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को दी. नियमों के तहत हाई कोर्ट से भी संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क न हो पाने के कारण सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय की गई विशेष गाइडलाइंस के तहत सभी औपचारिकताएं पूरी कीं.
किस कोर्ट में चलेगा केस, अभी तय नहीं
भोपाल जिला कोर्ट में सीबीआई के मामलों के लिए अलग से कोई नोटिफाइड नियमित अदालत नहीं है. यहां जो विशेष सीबीआई कोर्ट है, वह मुख्य रूप से आर्थिक अपराधों (जैसे भ्रष्टाचार या बैंक धोखाधड़ी) की सुनवाई करती है. ऐसे में ट्विशा मौत मामले की नियमित सुनवाई किस कोर्ट में की जाएगी, इसे लेकर कानूनी स्तर पर मंथन जारी है और जल्द ही इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी होगा. फिलहाल पीडि़त परिवार के वकील अंकुर पांडे ने बताया कि आरोपी पक्ष के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया है. अब देखना यह होगा कि 2 जून तक चलने वाली इस सीबीआई पूछताछ में पूर्व जज और उनके बेटे के बयानों से मौत का क्या राज बाहर आता है.
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