Home Latest News & Updates महाराष्ट्र में फिर शुरू होगा सहकारी शिक्षा कोष, कुशल कामगारों की नई पीढ़ी तैयार करने पर जोर

महाराष्ट्र में फिर शुरू होगा सहकारी शिक्षा कोष, कुशल कामगारों की नई पीढ़ी तैयार करने पर जोर

by Sanjay Kumar Srivastava 4 July 2026, 2:47 PM IST
4 July 2026, 2:47 PM IST
महाराष्ट्र में फिर शुरू होगा सहकारी शिक्षा कोष, कुशल कामगारों की नई पीढ़ी तैयार करने पर जोर

Cooperative Education: सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए महाराष्ट्र में एक महीने के भीतर सहकारी शिक्षा कोष फिर से शुरू होगा. शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मानव संसाधन में निवेश को महत्वपूर्ण बताया. कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य कुशल कामगारों की नई पीढ़ी तैयार करना है. उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र 2 लाख से अधिक समितियों के साथ देश का सबसे मजबूत सहकारी राज्य है.मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही शिक्षा कोष को फिर से शुरू करेगी, जिसे पहले बंद कर दिया गया था, ताकि सहकारी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित कामगार तैयार किए जा सकें.

बनेंगी दो लाख नई समितियां

उन्होंने बताया कि केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कई सुधार किए हैं, जिनमें एक नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति भी शामिल है. इस नीति का मकसद अगले दो दशकों में भारत की GDP में सहकारी क्षेत्र के योगदान को तीन गुना करना है. फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने लगभग 63,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को डिजिटल किया है, पांच साल में दो लाख नई समितियां बनाने का फैसला किया है और उन्हें 17 तरह के अलग-अलग कारोबार करने की सुविधा देकर उनके कामकाज का दायरा बढ़ाया है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण सहकारी समितियों को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के ज़रिए आर्थिक मदद भी दी गई है.

सूबे में खुद से पुनर्निर्माण नीति लागू

उन्होंने आगे बताया कि कृषि निर्यात को बढ़ाने, जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध कराने के लिए नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएं बनाई गई हैं, जैसे कि नेशनल कोऑपरेटिव एक्सपोर्ट्स लिमिटेड, नेशनल कोऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड और भारतीय बीज सहकारी समिति. उन्होंने सहकारी बैंकों के लिए एक अंब्रेला संस्था बनाने और कुशल जनशक्ति तैयार करने के लिए एक राष्ट्रीय सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना का भी ज़िक्र किया. आवास क्षेत्र का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य ने सहकारी आवास सोसायटियों के लिए एक अलग कानूनी ढांचा बनाया है और एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर खुद से पुनर्निर्माण नीति लागू की है.

जिला को-ऑपरेटिव बैंक से छोटे किसानों को फायदा

उन्होंने कहा कि इस योजना से हज़ारों आवास सोसायटियों को निजी डेवलपर्स पर निर्भर हुए बिना अपनी इमारतों का पुनर्निर्माण करने में मदद मिली है, जिससे कई निवासी छोटे अपार्टमेंट से बड़े घरों में जा पाए हैं. मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशंस (UDCPR) की वजह से आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए बदलाव किए जाएंगे, खासकर पुणे में, और सेल्फ-रीडेवलपमेंट के फायदे पूरे राज्य में पहुंचाए जाएंगे. फड़नवीस ने बताया कि ज़िला को-ऑपरेटिव बैंक छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज़्यादा क्रेडिट देते हैं क्योंकि वे लोकतांत्रिक चुनावों के ज़रिए सीधे सदस्यों के प्रति जवाबदेह होते हैं.

उन्होंने कई कमर्शियल और नेशनलाइज़्ड बैंकों की आलोचना की जो सिर्फ़ बड़े उधारकर्ताओं को लोन देकर अपने लेंडिंग टारगेट पूरे करते हैं. फड़नवीस ने ज़ोर दिया कि को-ऑपरेटिव्स को अनुशासित, पारदर्शी और जवाबदेह बने रहना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि जो संस्थाएं फाइनेंशियल अनुशासन को नज़रअंदाज़ करती हैं, वे खुद को और जमाकर्ताओं को नुकसान पहुंचाती हैं. उन्होंने घोषणा की कि इस सेक्टर की लंबित मांगों पर चर्चा के लिए विधानसभा का मौजूदा सत्र खत्म होने के तुरंत बाद एक बैठक बुलाई जाएगी.

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News Source: PTI

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