Rti Rules: समाजसेवी अन्ना हजारे की भूख हड़ताल की धमकी के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र RTI नियम 2026 पर रोक लगा दी है. इन विवादित नियमों में आवेदन शुल्क बढ़ाने, पहचान देने और प्रति आवेदन केवल एक विषय की सीमा तय करने का प्रस्ताव था. गुरुवार को CM फडणवीस ने RTI के मुख्य आयुक्त से नए नोटिफ़ाई किए गए नियमों पर रोक लगाने को कहा. हजारे ने सरकार से महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम, 2026 को वापस लेने की मांग की थी. उनका आरोप था कि ये नियम RTI एक्ट की मूल भावना को कमज़ोर करेंगे और नागरिकों के लिए जानकारी हासिल करना और मुश्किल बना देंगे.
5 जुलाई से करने वाले थे अनशन
उन्होंने धमकी दी थी कि अगर RTI नियमों में किए गए बदलाव वापस नहीं लिए गए, तो वे 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे. CM फडणवीस को भेजे गए एक ज्ञापन में हजारे ने कहा कि नए नियमों से अपील की प्रक्रिया में बाधाएं, ज़्यादा खर्च और जटिलताएं पैदा होंगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही कमज़ोर होगी. हजारे ने आरोप लगाया कि ये नियम जनता से सलाह-मशविरा किए बिना बनाए गए थे. उन्होंने मांग की कि सरकार इसे रद्द करे और RTI एक्सपर्ट्स, सूचना आयुक्तों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों, पत्रकारों और नागरिकों से सलाह-मशविरा करने के बाद नए नियम बनाए. सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी और 12 जून को सरकारी गजट में प्रकाशित नोटिफ़िकेशन के अनुसार, नए नियम प्रकाशन के साथ ही तुरंत लागू हो गए थे.
नए नियमों के तहत 30 रुपये फीस
नए नियमों के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जानकारी मांगने वाले आवेदकों को 30 रुपये की आवेदन फीस देनी होगी. जानकारी के लिए चार्ज इस तरह तय किए गए थे: A4 साइज़ के पेज के लिए 5 रुपये, स्कैन किए गए या डिजिटल पेज के लिए 5 रुपये. रिकॉर्ड देखने (इंस्पेक्शन) के लिए पहले घंटे तक कोई चार्ज नहीं लगेगा, लेकिन उसके बाद हर घंटे के लिए 50 रुपये देने होंगे. गरीबी रेखा से नीचे (BPL) आने वाले लोगों को आवेदन फीस से छूट मिलेगी, हालांकि 50 पेज से ज़्यादा जानकारी होने पर चार्ज लगेगा.
एक ही विषय पर होना चाहिए आवेदन
नियमों में यह भी कहा गया था कि RTI आवेदन आम तौर पर एक ही विषय पर होना चाहिए और उसमें 150 से ज़्यादा शब्द नहीं होने चाहिए. अगर कई विषय शामिल हैं, तो पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (PIO) सिर्फ़ पहले विषय पर कार्रवाई कर सकता है और आवेदक को बाकी मुद्दों के लिए अलग-अलग आवेदन करने की सलाह दे सकता है. एक और अहम बदलाव यह था कि आवेदकों को RTI आवेदन के साथ भारतीय नागरिकता साबित करने वाले फोटो पहचान पत्र की खुद से प्रमाणित (सेल्फ-अटेस्टेड) कॉपी जमा करनी होगी. ऐसे सबूत के बिना आवेदन नियमों को पूरा करने के लिए वापस किए जा सकते हैं.
नियमों में कहा गया है कि अगर मांगी गई जानकारी सरकार या संबंधित पब्लिक अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से मौजूद है, तो PIO आवेदक को कॉपी देने के बजाय उसे ऑनलाइन देखने के लिए कह सकता है. वे यह भी साफ़ करते हैं कि सार्वजनिक गतिविधि या जनहित से जुड़ी न होने वाली निजी जानकारी को आम तौर पर सार्वजनिक नहीं किया जाएगा, जब तक कि कोई बड़ा जनहित साबित न हो जाए.
पहली अपील करने के लिए 50 रुपये फीस
नोटिफिकेशन में यह भी बताया गया था कि अथॉरिटी के सामने पहली अपील करने के लिए 50 रुपये और महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग के सामने दूसरी अपील करने के लिए 100 रुपये की फीस देनी होगी, साथ ही ज़रूरी दस्तावेज़ भी जमा करने होंगे. सुनवाई आमने-सामने या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए हो सकती है. नियमों के तहत सरकारी संस्थाओं के प्रमुखों की यह ज़िम्मेदारी भी है कि वे RTI एक्ट की धारा 4 के तहत जानकारी को खुद से सार्वजनिक करें. साथ ही, चेतावनी भी दी गई थी कि ऐसा न करने पर लागू सर्विस नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है.
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News Source: PTI
