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25 ठिकानों पर ED की छापेमारी, अवैध रेत और पत्थर खनन सिंडिकेट का भंडाफोड़, 2.63 करोड़ नकद जब्त

by Sanjay Kumar Srivastava
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ओडिशा: 25 ठिकानों पर ED की छापेमारी, अवैध रेत और पत्थर खनन सिंडिकेट का भंडाफोड़, 2.63 करोड़ नकद जब्त

ED Raid: ओडिशा के गंजाम जिले में अवैध रेत और काले पत्थर खनन की सूचना पर ED ने छापा मारा. इस दौरान 2.63 करोड़ रुपये नकद और कई वाहन जब्त किए गए.

ED Raid: ओडिशा के गंजाम जिले में अवैध रेत और काले पत्थर खनन की सूचना पर ED ने छापा मारा. इस दौरान 2.63 करोड़ रुपये नकद और कई वाहन जब्त किए गए. प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ओडिशा के गंजाम जिले में 25 से अधिक स्थानों पर छापेमारी की. ED ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत 16 जनवरी को उसके भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय ने छापेमारी कर अवैध खनन में शामिल एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. साथ ही देसी शराब के कारोबार से जुड़े ठेकेदारों और मालिकों को भी गिरफ्तार किया. ईडी ने बताया कि इस अभियान में छह राज्यों के 175 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया. छापेमारी में उन गिरोह के सदस्यों के ठिकानों को शामिल किया गया, जिन पर जबरन बल प्रयोग करके और स्थानीय लोगों को डरा-धमकाकर छोटे खनिजों का अवैध खनन करने का आरोप है. इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कई रेत गिरोहों के खिलाफ दर्ज कई FIR के आधार पर प्रवर्तन मामला दर्ज करके जांच शुरू की थी.

अवैध खनन से सरकारी खजाने को भारी नुकसान

ये गिरोह गंजाम जिले में खनिजों का अवैध खनन और परिवहन करते थे. प्रवर्तन निदेशालय की छापेमारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्टों पर भी आधारित थी, जिसमें गंजाम जिले में रुशिकुल्या, बहुदा और बड़ा नदियों के किनारों पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन का खुलासा किया गया था. बयान में कहा गया है कि इन अवैध गतिविधियों से सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है. ईडी ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, गिरोह के कई सदस्यों के खिलाफ हत्या, अपहरण, शारीरिक हमला, जालसाजी, धोखाधड़ी और जबरन वसूली सहित गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. आपराधिक पृष्ठभूमि और सीएजी द्वारा रिपोर्ट किए गए अवैध वित्तीय लेनदेन के आधार पर ईडी ने गंजाम जिले में खनिजों के अवैध और अनधिकृत खनन और अन्य जिलों व राज्यों में उनकी तस्करी के मामलों में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की.

कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद

ईडी ने ऐसी अवैध गतिविधियों के तौर-तरीकों के बारे में बताया कि असली पट्टेदारों के नाम पर जारी खनन पट्टों पर गिरोह के सदस्यों ने गैरकानूनी और जबरन कब्जा कर लिया था. आरोप है कि यह सब तय दरों पर कमीशन देने के बहाने किया गया था. हालांकि, एजेंसी ने कहा कि कानून के तहत खनन लाइसेंस हस्तांतरणीय नहीं हैं, और उनके अनधिकृत उपयोग ने सिंडिकेट सदस्यों को अनुमति से कहीं अधिक रेत और काला पत्थर निकालने की अनुमति दी. एजेंसी ने कहा कि अवैध रूप से खनन किए गए खनिजों का एक बड़ा हिस्सा नकदी लेनदेन के माध्यम से ग्रे मार्केट में बेचा गया, जिसमें अक्सर जाली वाई फॉर्म (पारगमन अनुमति) का उपयोग किया गया. बयान में कहा गया है कि तलाशी के बाद 2.63 करोड़ रुपये नकद के साथ-साथ कई आपत्तिजनक दस्तावेज, महत्वपूर्ण संपत्ति रिकॉर्ड और समझौते बरामद किए गए, जिनमें बिजली समझौते और खनन पट्टे शामिल हैं. तलाशी अभियान में कई उच्च श्रेणी के बेनामी वाहन बरामद किए गए, जो अपराध की आय से प्राप्त किए गए थे. ईडी ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच जारी है.

ये भी पढ़ेंः हादसे ने छीनी पढ़ाई, अदालत ने दिया सहारा: आर्यन को मिलेंगे 1.62 करोड़ रुपये, जानें क्या है पूरा मामला?

News Source: Press Trust of India (PTI)

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