Jagannath Rath Yatra: ओडिशा का जगन्नाथ मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. यहां हर साल रथ यात्रा निकाली जाती है, जिसका सभी भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं. जगन्नाथ भगवान की रथ यात्रा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति और श्रद्धा का कुंभ है. हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की रथयात्रा निकाली जाती है. सभी भक्त उन्हें गुड़िचा मंदिर तक ले जाते हैं. इस रथयात्रा में रस्सी खींचने का बहुत ही खास महत्व है. देशभर से भक्त खास रस्सी खींचने के लिए ओडिशा आते हैं. इस साल भी रथयात्रा जल्द ही शुरू होने वाली है. यहां जानें रथयात्रा कब निकाली जाएगी, इसका महत्व क्या है और रस्सी खींचने के नियम क्या है.

कब निकाली जाएगी रथयात्रा
इस साल भगवान जगन्नाथ की पवित्र रथयात्रा 16 जुलाई को निकाली जाएगी और यह 24 जुलाई को बहुदा यात्रा के साथ संपन्न होगी. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ को बहुत सुंदर तरीके से सजाया जाता है. इसके बाद लाखों भक्त सावधानी से रथ खींचते हैं. रथ की रस्सी को खींचना बहुत ही फलदायी माना जाता है.
रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल
16 जुलाई, 2026: रथ यात्रा का शुभारंभ, भगवान गुडिचा मंदिर जाने के लिए प्रस्थान करेंगे.
17 जुलाई, 2026: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्र अपनी गुडिचा मंदिर में आराम करेंगे और भक्तों को दर्शन देंगे.
24 जुलाई 2026: इस दिन महाप्रभु गुडिचा मंदिर से वापस अपने मुख्य मंदिर आने के लिए प्रस्थान करेंगे.
रथ यात्रा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्र अपनी मौसी के घर यानी गुडिचा मंदिर जाते हैं. यहां तीनों नौ दिनों के लिए आराम करते हैं और फिर वापस अपने मुख्य मंदिर में लौटते हैं. माना जाता है कि रथ यात्रा के दौरान भगवान के दर्शन करने और रस्सी खींचने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. भक्तों को भगवान का रथ खींचकर उनकी सेवा करने का सौभाग्य मिलता है, जिसके लिए लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है. कहा जाता है कि रस्सी खींचने से व्यक्ति को जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है.

रस्सी खींचने के नियम
- रथयात्रा के दौरान कुछ नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है.
- जगन्नाथ भगवान के महाप्रसाद को कभी मना नहीं करना चाहिए.
- अगर रस्सी खींचने जा रहे हैं, तो चमड़े से बने बेल्ट, पर्स या जूते को भूलकर भी न पहनें.
- रथयात्रा के 9 दिनों के दौरान सात्विक भोजन करें. मांस-मदिरा से दूर रहें.
- रशयात्रा में रस्सी खींचने के लिए किसी से लड़ाई झगड़ा न करें. अहंकार त्याग दें और किसी से भी गाली-गलौज या कोई भी विवाद न करें.
- रथयात्रा के दौरान रथ पर चढ़ना सख्त मना है. केवल पुजारी ही रथ पर चढ़ सकते हैं.
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