Home Latest News & Updates कांग्रेस के ‘भारत रत्न’ दांव पर मायावती का पलटवार: जो बाबा साहेब अंबेडकर के नहीं हुए, वो कांशीराम के क्या होंगे?

कांग्रेस के ‘भारत रत्न’ दांव पर मायावती का पलटवार: जो बाबा साहेब अंबेडकर के नहीं हुए, वो कांशीराम के क्या होंगे?

by Sanjay Kumar Srivastava
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कांग्रेस के 'भारत रत्न' दांव पर मायावती का पलटवार: जो बाबा साहेब अंबेडकर के नहीं हुए, वो कांशीराम के क्या होंगे?

Congress vs Mayawati on Kanshi Ram Bharat Ratna: बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को सतर्क किया कि वे कांग्रेस के बहकावे में न आएं.

BSP Supremo: बसपा सुप्रीमो मायावती ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है. उन्होंने कार्यकर्ताओं को सतर्क किया कि वे कांग्रेस के बहकावे में न आएं. मायावती ने कांग्रेस से सवाल किया कि जब उन्होंने बाबा साहेब अंबेडकर को सम्मान नहीं दिया तो वे कांशीराम को कैसे दे सकते है. मालूम हो कि शुक्रवार को बहुजन समाज को लुभाने के लिए लखनऊ में कांग्रेस ने कहा था कि यदि पार्टी केंद्र में सत्ता में आई तो कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करेगी. केंद्र में सत्ता में आने पर बसपा संस्थापक कांशीराम को भारत रत्न से सम्मानित करने के प्रस्ताव पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने शनिवार को कांग्रेस से सवाल किया. मायावती ने देश भर के पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे बसपा को कमजोर करने के लिए अन्य राजनीतिक दलों, विशेषकर कांग्रेस द्वारा किए जा रहे प्रयासों के खिलाफ सतर्क रहें. उन्होंने कहा कि केंद्र में कई वर्षों तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने कभी भी बीआर अंबेडकर को उचित सम्मान नहीं दिया.

बाबा साहेब का भी नहीं किया था सम्मान

मायावती ने पूछा कि कांग्रेस अब कांशीराम का सम्मान करने का प्रस्ताव कैसे कर सकती है, जिनकी जयंती रविवार (15 मार्च) को मनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि दलितों के मसीहा और संविधान के प्रमुख वास्तुकार बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को कांग्रेस ने कभी उचित सम्मान नहीं दिया और न ही कभी उन्हें भारत रत्न की उपाधि दी. वही पार्टी अब कांशीराम का सम्मान कैसे कर सकती है. उनकी टिप्पणी लखनऊ में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘संविधान सम्मेलन’ में एक प्रस्ताव पारित होने के बाद आई, जिसमें कहा गया था कि अगर पार्टी सत्ता में आई तो कांशी राम को भारत रत्न से सम्मानित करेगी. उन्होंने कहा कि केंद्र में सत्ता में रहते हुए इसी कांग्रेस पार्टी ने कांशी राम के निधन पर एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा भी नहीं की. इसी तरह उत्तर प्रदेश में तत्कालीन सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार ने भी राजकीय शोक की घोषणा नहीं की.

कांग्रेस पर बसपा को कमजोर करने का आरोप

उन्होंने कहा कि दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले कई संगठन और राजनीतिक दल अक्सर ऐसा करते हैं. बड़े राजनीतिक द बसपा को कमजोर करने की कोशिश करते हुए लगातार राजनीतिक लाभ के लिए कांशीराम के नाम का उपयोग करने में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि वर्तमान में, ये सभी दल बसपा को कमजोर करने के लिए विभिन्न हथकंडे अपना रहे हैं. इसलिए उनके (कांशीराम) अनुयायियों और समर्थकों को सतर्क रहना चाहिए, खासकर कांग्रेस के खिलाफ, जिसकी दलित विरोधी विचारधारा और मानसिकता के कारण बसपा का गठन करना जरूरी हो गया था. 15 मार्च को कांशीराम की जयंती मनाई जाएगी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि अगर जवाहरलाल नेहरू जीवित होते तो कांशीराम को कांग्रेस से मुख्यमंत्री बनाया गया होता. भारत के पहले प्रधान मंत्री नेहरू की 1964 में मृत्यु हो गई, जबकि कांशीराम 1978 में पिछड़ों के समर्थक बामसेफ के गठन के साथ राजनीतिक परिदृश्य में उभरे और बाद में 1984 में बसपा के गठन के साथ अपनी स्थिति मजबूत की.

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News Source: PTI

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