UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों का बीजेपी ने जमीनी आगाज तेज कर दिया है. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन आज से पश्चिमी यूपी के दो दिन के दौरे पर हैं. मेरठ में नितिन नबीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं से संवाद किया. इसके बाद शक्ति केंद्र संयोजकों, मंडल अध्यक्षों, सांसदोंऔर विधायकों के साथ चुनावी तैयारियों पर चर्चा हुई. कल नबीन सहारनपुर में संगठन की नब्ज टटोलेंगे.
कार्यकर्ताओं के साथ किया सीधा संवाद
नितिन नबीन ने मेरठ में युवाओं के बीच हुंकार भरी तो संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ भी सीधा संवाद किया. सुभारती विश्वविद्यालय में करीब 2 हजार युवाओं के साथ संवाद हुआ. इसके बाद पश्चिमी यूपी के करीब 4 हजार 800 शक्ति केंद्र संयोजक और मंडल अध्यक्ष जुटे. सांसदों और विधायकों के साथ भी चुनावी तैयारियों पर चर्चा हुई. इस दौरान कमजोर बूथों को मजबूत करने, युवाओं तक पहुंच बढ़ाने और 2027 के लिए संगठन को पूरी तरह तैयार करने पर फोकस रहा. पश्चिमी यूपी में 71 विधानसभा सीटें हैं. 2017 में बीजेपी ने इनमें से 54 सीटें जीती थीं, जो 2022 में घटकर 41 रह गईं. 2027 से पहले ही इस इलाके में बीजेपी के सामने अपने पुराने प्रदर्शन को मजबूत करने की चुनौती है.
संगठन को चुनावी मोड में ला रहे
सीएम योगी के इस हमले के बीच बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन भी पश्चिमी यूपी से संगठन को चुनावी मोड में ला रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव ने पार्टी को बड़ा अलर्ट दिया. यूपी में बीजेपी 2019 की 62 लोकसभा सीटों से घटकर 2024 में 33 पर रह गई. वहीं, समाजवादी पार्टी 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी और कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं. पश्चिमी यूपी में भी कई सीटों पर बीजेपी को नुकसान हुआ. सहारनपुर में कांग्रेस के इमरान मसूद ने बीजेपी के राघव लखनपाल को हराया. कैराना में एसपी की इकरा हसन जीतीं और मुजफ्फरनगर में एसपी के हरेंद्र मलिक ने बीजेपी के संजीव बालियान को हराया.
जीत का अंतर करीब 10 हजार वोट रहा
2024 के नतीजों के बाद बीजेपी अब उन कमजोर कड़ियों को बूथ स्तर पर तलाश रही है. पार्टी ने करीब 18 हजार 900 ऐसे बूथ चिन्हित किए हैं, जहां 2022 विधानसभा में बीजेपी आगे थी, लेकिन 2024 लोकसभा में पीछे चली गई. इनमें करीब 80 फीसदी बूथ ग्रामीण इलाकों में बताए गए हैं. जहां वोट का समीकरण बदला, वहां संगठन पहुंचकर स्थानीय कारणों की समीक्षा कर रहा है. सवाल है कि बीजेपी के वोट में सेंध कहां लगी?
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2024 के आंकड़े बताते हैं कि बीजेपी के पारंपरिक सामाजिक गठजोड़ में कुछ वर्गों के समर्थन में बदलाव हुआ. ऊंची जातियों में NDA को करीब 79 फीसदी समर्थन मिला. लेकिन गैर-जाटव दलितों में NDA का समर्थन 29 फीसदी रहा, जबकि INDIA गठबंधन को 56 फीसदी समर्थन मिला. अन्य OBC में NDA को 59 फीसदी और कुर्मी-कोइरी में 61 फीसदी समर्थन मिला. वहीं, यादव वोट का 82 फीसदी INDIA गठबंधन के साथ गया और मुस्लिम वोट में INDIA गठबंधन को 92 फीसदी समर्थन मिला. चुनौती सिर्फ सीटों की संख्या बढ़ाने की नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों में समर्थन को मजबूत करने की है.
कांग्रे-SP बन सकती है राज्य में चुनौती
विपक्ष की तरफ से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामने भी 2024 के प्रदर्शन को विधानसभा में दोहराने की चुनौती है. 2024 में एसपी-कांग्रेस गठबंधन ने बीजेपी के खिलाफ वोटों के बिखराव को कम किया. लेकिन ओवैसी की एंट्री अब एसपी और कांग्रेस के लिए एक नई राजनीतिक चुनौती बन सकती है. हालांकि, ओवैसी ने खुले तौर पर अखिलेश यादव से गठबंधन की अपील की है. अखिलेश यादव का PDA सामाजिक समीकरण बीजेपी के सामने चुनौती बना. लेकिन 2027 में विपक्ष के सामने सीट बंटवारे से लेकर बूथ स्तर के संगठन और 2024 के वोट ट्रांसफर को दोहराने की चुनौती होगी.
वहीं, एसपी ने 27 विधानसभा सीटों पर खास फोकस की रणनीति का ऐलान किया है, जहां पार्टी हर सीट पर अपने वोट में 27 हजार की बढ़ोतरी का लक्ष्य रख रही है. बीजेपी के सामने सिर्फ विपक्ष की चुनौती नहीं है. 2027 में पार्टी लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए चुनाव मैदान में होगी. दस साल की सरकार के बाद एंटी-इनकंबेंसी का सवाल भी सामने रहेगा. स्थानीय विधायक से नाराजगी, किसान और गन्ने से जुड़े सवाल, रोजगार और भर्ती, युवा वर्ग की अपेक्षाएं और अलग-अलग सामाजिक समूहों की राजनीतिक हिस्सेदारी. ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें बीजेपी को चुनाव से पहले साधना होगा.
