Nishu Azad: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन में शामिल नाबालिग निशु आजाद के साथ छेड़छाड़ के आरोपों को गंभीरता से लिया. कोर्ट ने कहा कि किसी को भी पीड़ित या उसके परिवार को क्रिमिनल केस चलाने के लिए धमकाने की इजाजत नहीं दी जा सकती. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से लड़की की FIR पर कार्रवाई पक्की करने को कहा और इस मुद्दे पर दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकारों से रिपोर्ट मांगी.
नाबालिग के साथ हिंसा बर्दाश्त नहीं
कोर्ट ने कहा “ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. अगर किसी बच्चे के खिलाफ हिंसा हुई है तो किसी को भी बचाया नहीं जाना चाहिए… अगर ऐसे कामों के आरोपी आजाद घूम रहे हैं और बच्चे या उसके परिवार को धमकाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे क्रिमिनल केस न चलाएं, तो यह एक गंभीर मामला होगा. इस बारे में कोई दूसरी राय नहीं हो सकती”. ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता. किसी को भी बचाया नहीं जाना चाहिए. 14 साल की लड़की की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट को बताया कि उसे परेशान किया गया और उसके घर में तोड़फोड़ की गई. यह तब हुआ जब उसने अपने पिता पर हमला करने वाले स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.
नाबालिग पर केस दर्ज हुआ
वकील ने बताया कि स्वतंत्र भारद्वाज ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि उसने CJP के विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता पर हमला किया था. आरोपी के साथ आए लोगों और कथित तौर पर कैमरे में कैद हुए लोगों पर केस करने के बजाय, बच्चे के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. वकील ने कहा कि यह सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश के भी खिलाफ है, जिसमें किसी भी प्रदर्शनकारी छात्र पर कार्रवाई न करने को कहा गया था.
CJP ने किया प्रदर्शन
इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने 5 सितंबर को हिंदुत्व इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ FIR में SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट और आपराधिक धमकी के प्रावधान जोड़े थे. यह FIR CJP के नेतृत्व वाले प्रोटेस्ट के दौरान नाबालिग एक्टिविस्ट के पिता पर कथित हमले को लेकर हुई थी. भारद्वाज को बुलंदशहर में तब हिरासत में लिया गया जब CJP ने कथित हमले को लेकर उनकी गिरफ्तारी की मांग करते हुए संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया. बता दें मामले तब तूल पकड़ा जब स्वतंत्र भारद्वाज का एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें भारद्वाज ने दावा किया था कि उसने 20 जुलाई के आंदोलन के दौरान नाबालिग के पिता का “सिर फोड़ दिया” था और अपने राजनीतिक कनेक्शन की वजह से गिरफ्तारी से बच गया था.
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News Source: PTI
