Home Top News आकाश आनंद के ससुर ने मानी मायावती की शर्त, दामाद के लिए राजनीति से लिया संन्यास

आकाश आनंद के ससुर ने मानी मायावती की शर्त, दामाद के लिए राजनीति से लिया संन्यास

by Neha Singh 10 September 2026, 8:55 AM IST (Updated 10 September 2026, 8:57 AM IST)
10 September 2026, 8:55 AM IST (Updated 10 September 2026, 8:57 AM IST)
Ashok Siddharth Retirement

Ashok Siddharth Retirement: मायावती के भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है. मायावती ने आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी एक बड़ी शर्त रख दी थी. बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को कहा कि उनके भतीजे आकाश आनंद पार्टी में तभी सक्रिय भूमिका में लौट सकते हैं, जब उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर रिटायर हो जाएं. मायावती ने सिद्धार्थ पर आरोप लगाया कि वह बार-बार BSP के मिशन से ज़्यादा अपने “निजी और पारिवारिक हितों और महत्वाकांक्षाओं” को अहमियत देते हैं. मायावती की बात को मानते हुए अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया है.

एक्स पर दी जानकारी

अशोक सिद्धार्थ ने एक्स पर लिखा “आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो , गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं. आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी. उन्होंने यह भी लिखा कि “आकाश आनंद जी मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं. उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होंने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा.

अशोक सिद्धार्थ पर मायावती के आरोप

बता दें, UP की पूर्व मुख्यमंत्री की 3 सितंबर को लखनऊ में पार्टी पदाधिकारियों की एक नेशनल लेवल की मीटिंग में आकाश आनंद को BSP के नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया था. इसके कुछ दिनों बाद ही बुधवार को एक्स पर अपने विचार व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि BSP लीडरशिप उन लोगों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई कर रही है जो पार्टी की कोशिशों में रुकावट डालना चाहते हैं और अशोक सिद्धार्थ को ऐसी कार्रवाई का “बहुत चर्चित उदाहरण” बताया. उन्होंने कहा, “एक बार नहीं, बल्कि कई बार पार्टी ने उन्हें सुधरने का मौका दिया. लेकिन उन्होंने BSP के मिशन से ज़्यादा अपने निजी और पारिवारिक हितों और महत्वाकांक्षाओं को अहमियत दी, जिसका नतीजा उन्हें और उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ा.”

पार्टी से पहले ही निकाला गया

अशोक सिद्धार्थ को 2 अगस्त को बार-बार अनुशासनहीनता, पार्टी विरोधी रुख और अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से न निभाने के आरोपों के चलते पार्टी से निकाल दिया गया था. बुधवार की पोस्ट में, मायावती ने “बहुजन समाज” से भी अपील की कि वे अपने या पारिवारिक फायदों के लिए ऐसा कोई काम न करें जिससे BSP के राजनीतिक कैंपेन में रुकावट आए. बसपा में आंतरिक मदभेदों का असर चुनावों में देखने को मिल सकता है. अब देखना होगा कि आकाश आनंद फिर से मायावती का मना पाते हैं या नहीं.

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News Source: PTI

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