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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: दिल्ली HC तीन महीने में पूरा करे सेंगर की अपील पर फैसला, 17 फरवरी तक टली सुनवाई

by Sanjay Kumar Srivastava
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सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: दिल्ली हाई कोर्ट 3 महीने में पूरा करे सेंगर की अपील पर फैसला, 17 फरवरी तक टली सुनवाई

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों की अपीलों पर सुनवाई 17 फरवरी तक टाल दी है.

Unnao Rape Case: उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य दोषियों की अपीलों पर सुनवाई 17 फरवरी तक टाल दी है. न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय के उस हालिया निर्देश का संज्ञान लिया, जिसमें उच्च न्यायालय को इन अपीलों पर तीन महीने के भीतर फैसला करने के लिए कहा गया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि अब यह एक “समयबद्ध मामला” है. बुधवार को सुनवाई स्थगित करने का मुख्य कारण यह रहा कि पीड़िता द्वारा दोषियों की 10 साल की सजा बढ़ाने के लिए दायर याचिका वर्तमान में एक खंडपीठ के समक्ष लंबित है, जिसकी सुनवाई मार्च में होनी है. सेंगर के वकील ने सुझाव दिया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए पीड़िता को उस याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए आवेदन करना चाहिए ताकि सभी अपीलों पर एक साथ विचार हो सके.

भाई की अंतरिम जमानत बढ़ी

इस बीच अदालत ने कुलदीप सेंगर के भाई जयदीप (अतुल सिंह) सेंगर की अंतरिम जमानत 17 फरवरी तक बढ़ा दी है, जो मुख के कैंसर के इलाज के आधार पर बाहर हैं. जयदीप सेंगर ने मुंह के कैंसर से पीड़ित होने के कारण अपनी अंतरिम जमानत तीन महीने बढ़ाने का अनुरोध किया था. उच्च न्यायालय ने जयदीप सेंगर को 3 जुलाई, 2024 को अंतरिम जमानत दी थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया था. कुलदीप सेंगर को नाबालिग पीड़िता के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया था और 20 दिसंबर 2019 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी. आरोप है कि पीड़िता को 2017 में सेंगर ने तब अगवा कर दुष्कर्म किया था जब वह नाबालिग थी. 13 मार्च 2020 को कुलदीप सेंगर और उसके भाई जयदीप सेंगर उर्फ ​​अतुल सिंह को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में निचली अदालत ने 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया.

पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत का मामला

पीड़िता के पिता को आरोपियों के इशारे पर शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था और पुलिस की बर्बरता के कारण 9 अप्रैल 2018 को हिरासत में उसकी मृत्यु हो गई थी. निचली अदालत ने कहा कि परिवार के इकलौते कमाने वाले की हत्या के लिए किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती. 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट से उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में कुलदीप सेंगर की सजा को चुनौती देने वाली याचिका पर बारी से पहले सुनवाई करने का अनुरोध किया और कहा कि इस पर तीन महीने के भीतर फैसला सुनाया जाए. हाई कोर्ट के 19 जनवरी के उस आदेश को चुनौती देने वाली सेंगर की याचिका को खारिज करते हुए, जिसमें उनकी 10 साल की जेल की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पीड़िता के परिवार ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ कोई अपील दायर की है, तो उस पर भी हाई कोर्ट द्वारा भाजपा नेता की याचिका के साथ सुनवाई की जानी चाहिए.

ये भी पढ़ेंः 30 साल पुराने केस में पप्पू यादव को मिली जमानत, फिलहाल जेल में ही रहेंगे सांसद, जानें पूरा मामला

News Source: Press Trust of India (PTI)

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