Uttarkashi News: उत्तरकाशी जनपद मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर दूर स्थित स्यूणा गांव के लोगों की जिंदगी हर दिन जोखिम में रहती है. ग्रामीण जब अपने घरों से निकलते हैं तो उन्हें अपनी जान भगवान के भरोसे छोड़नी पड़ती है. वजह यह है कि गांव तक आने-जाने के लिए न तो सड़क की सुविधा है और न ही पैदल रास्ता. जनपद मुख्यालय तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों के पास लोहे की एक जंग लगी ट्रॉली ही एकमात्र साधन है. जर्जर हो चुकी इस ट्रॉली के सहारे ग्रामीण रोजाना आवाजाही करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है.
बीमार लोग भी इसी ट्रॉली से जाते हैं
स्कूल जाने वाले बच्चे हो या फिर गर्भवती महिला और बीमार लोग जान जोखिम में डालकर इसी ट्रॉली से पार जाना होता है. नीचे उफनती भागीरथी नदी का शोर अंदर तक डराता है. लेकिन मजबूरी है तो पार जाना ही है जान भले खतरे में हो तो क्या करें. दो साल पहले पुल की स्वीकृति भी मिली टेंडर प्रक्रिया भी शुरू हुई थी लेकिन आज दो साल बीत जाने के बाद भी काम के नाम पर कुछ नहीं हुआ. जिम्मेदार जवाब देने से बचते हैं. भारी बारिश के समय बच्चे कई दिनों तक स्कूल नहीं जाते हैं और एक महिला ने आपबीती बताई कि कुछ समय पहले वह बीमार हो गई थी और बड़ी मुश्किल से इसी ट्राली के सहारे ग्रामीणों ने उसे अस्पताल तक पहुंचाया.
बुजुर्ग, छात्र, गर्भवती महिलाओं के सामने रहती है चुनौती
स्यूणा गांव के लोग आज भी नदी के एक तरफ से सड़क को देख पाते हैं क्योंकि उन्हें यही नसीब है. सड़क तक आने के लिए जान की बाजी लगानी पड़ती है. सालों पहले लगी ट्राली अब जर्जर हो चुकी है. इस ट्राली को एक तरफ से खींचना पड़ता है तब नदी पार होती है. कई लोग इस वजह से घायल भी होते रहते हैं. जब भी चुनाव होता है नेता साफ कपड़े पहनकर इनसे वोट मांगने तो आ जाते हैं लेकिन बाद में कोई इस गांव की सुध नहीं लेता है.
सरकार बदलती रही, बस नहीं बदली दशा
गांव के रहने वाले लोग एक दो बार नहीं बल्कि न जाने कितनी बार अपनी फ़रियाद लेकर जिला प्रशासन और स्थानीय नेताओं जन प्रतिनिधियों से मिल चुके हैं. हर बार आश्वासन केवल आश्वासन लेकिन पुल नहीं. उम्मीद की जा रही थी कि टेंडर होने के बाद पुल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी लेकिन इस साल भी लोगों को निराशा ही हाथ लगी. गांव के रहने वाले सोबन सिंह कहते हैं अब तो ये समझ नहीं आता कि किस से मिले जो उनकी दिक्कत को अपना समझकर काम करा सके. सरकार चाहे भाजपा की हो या फिर पूर्व में रही कांग्रेस की दोनों के विधायक को जनता ने मौका दिया.
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