Home Latest News & Updates कभी जिनपिंग को बताया था खतरा, अब रेड कार्पेट पर उनका स्वागत करेंगे ट्रंप, टैरिफ बिल के बीच US दौरे पर शी

कभी जिनपिंग को बताया था खतरा, अब रेड कार्पेट पर उनका स्वागत करेंगे ट्रंप, टैरिफ बिल के बीच US दौरे पर शी

by Neha Singh 21 September 2026, 4:07 PM IST (Updated 21 September 2026, 4:12 PM IST)
21 September 2026, 4:07 PM IST (Updated 21 September 2026, 4:12 PM IST)
Trump and Xi Meeting

XI-Trump Meeting: चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका के दौरे पर जा रहे हैं. 23 सिंतबर को वे वाशिंगटन पहुंचेंगे और ट्रंप के साथ शिखर वार्ता करेंगे. इस दौरे से पहले, अमेरिका और चीन के बड़े अधिकारियों ने AI समेत आर्थिक और व्यापार के मुद्दों पर “साफ और गहरी” बातचीत की.

दोनों नेता पिछली बार मई में बीजिंग में ट्रंप के दौरे के दौरान मिले थे, जब उन्होंने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संबंधों को बेहतर बनाने के मकसद से बातचीत की थी. आने वाली बातचीत इसलिए और भी अहम हो गई है क्योंकि ट्रंप ने एक नए टैरिफ कानून पर साइन किया है, जो चीन और भारत सहित रूसी तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 परसेंट तक टैरिफ लगाने की इजाजत देता है. हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने पहले बताया था कि ट्रंप, शी को जॉइंट बेस एंड्रयूज के टरमैक पर खुद रिसीव करके एयरपोर्ट पर एक अनोखा स्वागत करने की योजना बना रहे हैं. यह वही ट्रंप हैं, जिन्होंने शी जिनपिंग को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा बताया था. चलिए समझते हैं कि हाल ही सालों में चीन के साथ अमेरिका के रिश्ते किस तरह से बदले हैं. साथ ही ट्रंप के बयानों और रणनीति में कितना अंतर दिखता है.

ट्रंप ने शी को बताया था खतरा

जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहली बार 2016 में चुनाव लड़ा था, तो उन्होंने चीन को US की इकॉनमी के लिए खतरा बताया था और कहा था कि इसने अमेरिका की फैक्ट्रियों को खत्म कर दिया है और मिडिल क्लास को खत्म कर दिया है. उस बयान ने ट्रंप को एक दशक पहले व्हाइट हाउस तक पहुंचने में मदद की थी, लेकिन उसके बाद से उनका लहजा शी जिनपिंग के लिए बदल गया. राष्ट्रपति बनने के बाद से वह शी जिनपिंग के बारे में ज्यादा से ज्यादा तारीफ करते आए हैं और आज वे उन्हें स्टेट डिनर पर उन्हें सम्मानित करेंगे. इस महीने ट्रंप ने शी जिनपिंग के लिए कहा, “वह एक बहुत अच्छे जेंटलमैन हैं, हमारी आपस में बहुत अच्छी बनती है. हमारे बहुत अच्छे ट्रेडिंग रिश्ते हैं और आप जानते हैं, वे एक कॉम्पिटिटर भी हैं, लेकिन प्रेसिडेंट शी के साथ हमारे बहुत अच्छे रिश्ते हैं.”

बदला हुआ रुख

कई मुद्दे पर, रिपब्लिकन राष्ट्रपति ने शी को अनदेखा किया है. ट्रंप ने उन रिपोर्टों को नजरअंदाज कर दिया कि चीन ने ईरान को सैटेलाइट इमेजरी दी थी. ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि उसने ठीक-ठाक बर्ताव किया है.” 2020 में बीजिंग पर US वोटर फाइलों को एक्सेस करने का आरोप लगाने के बाद, ट्रंप ने इशारा किया कि वह जवाबी कार्रवाई करने में हिचकिचा रहे हैं. उन्होंने कहा था “मुझे लगता है कि चीन आज शायद पहले से थोड़ा अलग है.” ट्रंप की यह दरियादिली ऐसे समय में आई है जब चीन और अमेरिका ग्लोबल लीडरशिप के लिए मुकाबला कर रहे हैं और अमेरिका के कुछ पुराने साथी अपनी स्ट्रेटेजी पर फिर से सोच रहे हैं. चीन ने मैन्युफैक्चरिंग में अपना दबदबा बढ़ाया है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक गाड़ियों जैसी नई टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाया है, जो अमेरिका, जर्मनी, इटली, फ्रांस, साउथ कोरिया और जापान जैसी दूसरी देशों की इकॉनमी के लिए रिस्क पैदा करती हैं.

ट्रैप की टैरिफ चाल उलटी पड़ गई

चीनी बर्ताव को बदलने में नाकाम रहने पर, ट्रंप ने मेहमाननवाजी का सहारा लिया है. वह मई में बीजिंग गए थे और दोनों नेता इस साल इंटरनेशनल समिट में दो बार और मिल सकते हैं. ट्रंप ने शी के आने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में एक हेलीपैड तैयार कर लिया है और अफसोस जताया है कि उनका बॉलरूम चीनी नेता की मेजबानी के लिए तैयार नहीं होगा. ट्रंप ने जोर देकर कहा है कि अमेरिका भले ही चीन से आगे है, लेकिन पिछले साल बढ़ते टैरिफ के साथ चीन का सामना करने की उनकी कोशिशें उल्टी पड़ गईं.

इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल होने वाले रेयर अर्थ्स पर चीन की मोनोपॉली है और उसने ट्रंप के साथ ट्रेड वॉर में इसका इस्तेमाल किया. इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एडवाइजर माइकल कोवरिग ने कहा “ट्रंप ने चीन को लेकर अपना नजरिया काफी बदल दिया है क्योंकि बहुत ज़्यादा टैरिफ और एक्सपोर्ट पर रोक लगाने की उनकी शुरुआती कोशिश नाकाम रही. शी और ट्रंप के बीच फ़ायदा उठाने का मुकाबला हुआ और शी जीत गए.” इस बीच, ट्रंप ने उन इकोनॉमिक और नेशनल सिक्योरिटी अलायंस को काफी हद तक कमजोर कर दिया है जो पहले चीन पर दबाव डाल सकते थे.

कोवरिग ने कहा, “वह शी के लिए वेज टैक्टिक्स को लागू कर रहे हैं और इस तरह, शी को चीन को ज़्यादा स्टेबल और ज़िम्मेदार ताकत के तौर पर दिखाने में मदद कर रहे हैं. इससे पश्चिमी नेताओं की एक लहर बीजिंग आ गई है और वे शी के साथ अपने रिश्तों को स्टेबल और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे उन समस्याओं से निपटने पर ज्यादा ध्यान दे सकें जो ट्रंप उन्हें दे रहे हैं.

व्यापार पर कितना असर पड़ा

ट्रंप अब अपने और शी के बीच बेहतर हुए रिश्ते को एक मील का पत्थर बताते हैं. दोनों नेताओं के बीच बातचीत और मीटिंग यह दिखाती है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी इकॉनमी के बीच बातचीत का रास्ता अभी भी खुला है. शी जिनपिंग अपने कार्यकाल के दौरान US के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन से तीन बार मिले, जिसमें इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस भी शामिल हैं. इसकी तुलना में, ट्रंप और शी ने दो बार आपसी स्टेट विजिट की हैं. इन मीटिंग से पता चलता है कि दोनों नेता एक-दूसरे से सीधे संपर्क और बातचीत को महत्व देते हैं.

हालांकि, इन पर्सनल रिश्तों ने दोनों देशों के बीच ट्रेड और इकोनॉमिक पॉलिसी पर कितना असर डाला है, यह अभी साफ नहीं है. US सेंसस ब्यूरो के डेटा के मुताबिक, 2025 में चीन के साथ US गुड्स ट्रेड डेफिसिट पिछले साल इसी समय की तुलना में कम हुआ. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी माना है कि चीन अपना कुछ सामान दूसरे देशों, खासकर वियतनाम जैसे देशों के ज़रिए US मार्केट में ट्रांसपोर्ट कर रहा है. इसलिए, सिर्फ ट्रेड डेफिसिट में कमी को ही चीन के खिलाफ US टैरिफ की पूरी सफलता मानना ​​मुश्किल है.

इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में विस्तार

ट्रंप प्रशासन ने लगातार चीनी सामान पर टैरिफ लगाए हैं. इसके बावजूद, चीन के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इसका उतना असर नहीं हुआ जितना सोचा गया था. इसके जवाब में, चीन ने अपने प्रोडक्ट्स के लिए नए मार्केट ढूंढे और अपनी कॉम्पिटिटिव पोजीशन बनाए रखी है. चीन का ग्लोबल ट्रेड सरप्लस भी काफी बढ़ा है, जो पिछले साल लगभग $1.2 ट्रिलियन तक पहुंच गया था. चीनी कंपनियां दुनिया भर के अलग-अलग मार्केट में कम कीमत वाले प्रोडक्ट बेच रही हैं. चीनी कंपनियों ने इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी तेजी से विस्तार किया है. उनकी सस्ती इलेक्ट्रिक कारों ने जर्मनी, जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों की ऑटो इंडस्ट्री के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ा दिया है.

इसलिए, सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुरुवार को ट्रंप और शी के बीच होने वाली मीटिंग से असल में क्या हासिल होगा. आमतौर पर, किसी बड़े ऑफिशियल दौरे से व्यापार, सुरक्षा या विदेश नीति से जुड़े साफ एग्रीमेंट या लक्ष्य सामने आते हैं. हालांकि, इस बार यह साफ नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई खास और मापने लायक एग्रीमेंट हो पाएंगे या नहीं.

क्या होगा मीटिंग का लक्ष्य

जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और ओबामा एडमिनिस्ट्रेशन में चीन से डील करने वाले नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व अधिकारी इवान मेडेइरोस के मुताबिक, इस मीटिंग का सबसे बड़ा नतीजा दोनों नेताओं के बीच रिश्ते बनाए रखना हो सकता है. उनका मानना ​​है कि पर्सनल रिश्तों पर बहुत ज़्यादा फोकस करने से US, चीन के साथ बड़े स्ट्रेटेजिक कॉम्पिटिशन के लिए जरूरी दूसरे कदमों को नजरअंदाज कर सकता है. यह मामला सिर्फ ट्रेड तक ही सीमित नहीं है. US और चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड कंप्यूटर चिप्स को लेकर भी बड़े कॉम्पिटिशन में लगे हुए हैं. US ने चीन की कुछ कटिंग-एज चिप्स तक पहुंच को रोक दिया है. इसके बावजूद, चीन अपनी मिलिट्री और AI कैपेबिलिटीज को डेवलप करना जारी रखे हुए है.

AI के क्षेत्र में कॉम्पिटिशन

अमेरिका AI के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है. ट्रंप प्रशासन ने AI डेवलपमेंट को इकोनॉमिक और स्ट्रेटेजिक प्राथमिकता बना दिया है. ट्रंप ने इस हफ़्ते सोशल मीडिया पर कहा कि जो लोग AI के डेवलपमेंट को धीमा करने की कोशिश कर रहे हैं, वे चीन को फायदा पहुंचा रहे हैं. उनका कहना है कि AI भविष्य में तेल, सोना, हीरे और इंटरनेट से भी ज़्यादा इकोनॉमिक ग्रोथ का इंजन बन सकता है. हालांकि, US को इस एरिया में चीन को लेकर भी चिंता है. चीन पर अपने सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए अमेरिकी AI मॉडल्स का इस्तेमाल करने का आरोप लगा है. अगर AI को भविष्य की आर्थिक और स्ट्रेटेजिक ताकत का एक अहम पिलर माना जाता है, तो यह US के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हो सकता है.

टैरिफ पर चीन का जवाब

दूसरी ओर, रूस से चीन के तेल और गैस खरीदने को लेकर US और चीन के बीच मतभेद बने हुए हैं. US ने रूस से एनर्जी खरीदने पर चीन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का बिल साइन कर दिया है. चीन ने इस कदम का विरोध किया है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि किसी भी तीसरे देश को देशों के बीच सामान्य व्यापार और आर्थिक सहयोग में दखल नहीं देना चाहिए. चीन का कहना है कि वह दूसरे देशों के साथ बराबरी और आपसी फायदे के आधार पर व्यापार करता है और एकतरफा पाबंदियों का विरोध करता है.

इसके बावजूद, दोनों देशों के बीच व्यापार पर बातचीत जारी है. चीन के कॉमर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि US और चीन लगभग $30 बिलियन के प्रोडक्ट्स पर आपसी टैरिफ कटौती के लिए एक फ्रेमवर्क पर चर्चा कर रहे हैं. इसका मकसद दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द टैरिफ कटौती पर एक एग्रीमेंट पर पहुंचना है. समिट से पहले, चीन के विदेश मंत्री वांग यी और US के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी 17 सितंबर को फोन पर बात की. दोनों देशों के बीच हाई-लेवल बातचीत और संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया गया. कुल मिलाकर, ट्रंप और शी के बीच रिश्तों ने बातचीत का रास्ता खोल दिया है, लेकिन ट्रेड, AI, चिप्स, रूस और टैरिफ जैसे मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं.

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News Source: PTI

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