Monsoon Session : संसद के मानसून सत्र में हंगामा जारी है. हंगामे की वजह से लगातार तीसरे सप्ताह संसद के दोनों सदनों में मामूली कामकाज हुआ. शुक्रवार को भी कमोबेश यही स्थिति दिखी. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA में शामिल हुए नए सहयोगी सांसदों को नाश्ते पर बुलाकर बड़ा राजनीतिक और संसदीय संदेश दिया. पीएम ने साफ कहा कि लोकतंत्र में संसद का बार-बार बाधित होना उचित नहीं है.
गतिरोध को खत्म करने की कोशिश कर रही है सरकार
सरकार विपक्ष को मनाने की लगातार कोशिश करती रही रही. बुधवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से मुलाकात कर संसद चलाने की गुजारिश की और गुरुवार को भी सरकार की तरफ से प्रतिपक्ष नेता से बातचीत कर, गतिरोध खत्म करने की कोशिश की गई. वहीं, सरकार इसके लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार बता रही है.
पीएम मोदी ने नए सांसदों से की चर्चा
दूसरी तरफ संसद के बाहर प्रधानमंत्री मोदी का ‘ब्रेकफास्ट डिप्लोमेसी’ कार्यक्रम चर्चा का विषय बन गया. प्रधानमंत्री ने NCPI और उद्धव ठाकरे गुट से अलग होकर एनडीए में आए सांसदों से मुलाकात की. इनमें पश्चिम बंगाल से आए टीएमसी के बागी सांसद भी शामिल रहे. बैठक का माहौल अनौपचारिक रहा, लेकिन संदेश बेहद स्पष्ट था. प्रधानमंत्री ने सांसदों से कहा कि लोकतंत्र में संसद का लगातार बाधित होना ठीक नहीं है. उन्होंने चिंता जताई कि हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है और जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है.
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प्रधानमंत्री ने दी व्यक्तिगत सलाह
प्रधानमंत्री ने बैठक में सांसदों को व्यक्तिगत सलाह भी दी. उन्होंने कहा कि दिनचर्या सुधारें, नियमित योग करें और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें. इसकी वजह से स्वस्थ जनप्रतिनिधि ही बेहतर तरीके से जनता की सेवा कर सकते हैं. नए सहयोगी सांसदों से प्रधानमंत्री ने उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की भी जानकारी ली. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ जनता तक पहुंचे. यदि किसी विकास परियोजना में कोई अड़चन आए तो सांसद सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क करें.
बैठक के बाद एनसीपीआई सांसदों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया. सांसदों ने बताया कि पीएम ने संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलने की इच्छा जताई है और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया है.
एजेंडे को आगे बढ़ाने का दिया संदेश
संसद में जारी गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री का यह नाश्ता केवल औपचारिक मुलाकात नहीं माना जा रहा. एक तरफ नए सहयोगियों के साथ राजनीतिक तालमेल मजबूत करने की कोशिश दिखी, तो दूसरी तरफ विपक्ष के हंगामे के बीच संसद चलाने और विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संदेश भी दिया गया. अब देखना होगा कि इस अपील का असर संसद की कार्यवाही पर कितना पड़ता है.
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