Home Religious आज से शुरू हुआ अधिक मास, इस महीने भूलकर भी न करें ये गलतियां, जान लें जरूरी नियम और महत्व

आज से शुरू हुआ अधिक मास, इस महीने भूलकर भी न करें ये गलतियां, जान लें जरूरी नियम और महत्व

by Neha Singh
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Adhik Maas Niyam

Adhik Maas Niyam: आज यानी 17 मई से अधिक मास शुरु हो चुका है. इस महीने कुछ नियमों का पालन करना चाहिए. आइए जानते हैं कि अधिक मास क्यों आता है, इसका महत्व और नियम क्या हैं, इस महीने में क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए.

17 May, 2026

साल 2026 बहुत ही खास है. इस साल ज्येष्ठ माह एक नहीं बल्कि दो महीनों तक चलेगा. इस साल अधिक मास ज्येष्ठ महीने के दौरान पड़ रहा है और इसकी शुरुआत आज से यानी 17 मई से हो चुकी है. अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, जो तीन साल में एक बार आता है. ऐसा माना जाता है कि इस पूरे महीने पूजा-पाठ, दान-पुण्य और भगवान की भक्ति करने से कई गुना पुण्य मिलता है. यह एक ऐसा समय है जब कई कामों को करना वर्जित माना जाता है. आइए जानते हैं कि अधिक मास क्यों आता है, इसका महत्व और नियम क्या हैं, इस महीने में क्या करना चाहिए, किन चीजों से बचना चाहिए.

कब से कब तक है अधिक मास

अधिक मास रविवार को शुक्ल पक्ष के पहले दिन यानी 17 मई को शुरू हो चुका है और यह सोमवार, 15 जून को अमावस्या के दिन खत्म हो जाएगा. अधिक मास शुक्ल पक्ष में शुरू होता है और कृष्ण पक्ष में खत्म होता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास कहते हैं. इस दौरान पूजा-पाठ और दान-पुण्य का फल ज्यादा मिलता है. इस महीने भगवान विष्णु की पूजा करने का बहुत महत्व है, इससे मन को शांति मिलती है.

क्यों आता है अधिक मास

हिंदू कैलेंडर में अधिक मास एक अतिरिक्त महीना होता है. जैसे इंग्लिश कैलेंडर में लीप ईयर होता है, वैसे ही हिंदू कैलेंडर में अधिक मास होता है. असल में, हमारा हिंदू कैलेंडर चांद के चक्र पर आधारित है. चांद का साल लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सूर्य की चाल के अनुसार साल 365 दिनों का होता है, यानी दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है. यह अंतर धीरे-धीरे बढ़ता रहता है. इसे बैलेंस करने के लिए हर 32 महीने 15 दिनों बाद एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है. इसे अधिक मास कहते हैं. अगर ऐसा नहीं किया जाता है, तो होली, सावन या दिवाली जैसे त्योहार मौसम की वजह से खराब हो जाएंगे.

अधिक मास में क्या करें

  • इस पूरे महीने रोजाना भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा करें.
  • ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें.
  • भगवद गीता, रामायण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है.
  • गरीबों और जरूरतमंदों को खाना, कपड़े और पैसे दान करें.
  • इस दौरान केवल सात्विक खाना खाएं.
  • संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना भी फायदेमंद माना जाता है.

अधिक मास में शुभ कामों से बचें

  • अधिक मास के दौरान शादी, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ काम करना वर्जित माना जाता है.
  • इस महीने अपना मन शांत रखें और किसी भी झगड़े या विवाद से बचें.
  • नकारात्मक विचारों से बचें क्योंकि यह महीना आध्यात्मिक तरक्की का समय है.
  • मांस, शराब और दूसरे तामसिक खाने से बचें.

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