Padmini Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का खास महत्व है. हर महीने में 2 एकादशी आती हैं यानी साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं. हर एकादशी का अपना धार्मिक महत्व होता है, लेकिन पद्मिनी एकादशी सबसे खास है, क्योंकि यह हर तीन साल में एक बार आती है. पद्मिनी एकादशी अधिकमास (मलमास) के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पुण्यदायी एकादशी है. माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख- शांति आती है. मान्यता है कि इस दिन पूजा-पाठ और व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर फल मिलता है. जानें पद्मिनी एकादशी का महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.

पद्मिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि बुधवार, 26 मई, 2026 को सुबह 7:40 बजे शुरू होगी और गुरुवार, 27 मई, 2026 को सुबह 7:50 बजे खत्म होगी. उदया तिथि के अनुसार, एकादशी का व्रत 27 मई, 2026 को रखा जाएगा. इस दिन शुभ मुहूर्त में पूजा-पाठ करना फलदायी होता है. यहां जानें पद्मिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त.
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:04 बजे से सुबह 04:44 बजे तक
प्रात:काल पूजा मुहूर्त: सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:50 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से दोपहर 12:46 बजे तक
संध्या पूजा मुहूर्त: शाम 07:12 बजे से रात 08:30 बजे तक
पद्मिनी एकादशी का महत्व
पद्मिनी एकादशी सभी एकादशियों में खास जगह रखती है. माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने खुद अर्जुन को इस व्रत का महत्व समझाया था. यह व्रत करने से अध्वमेध यज्ञ और तीर्थों में स्नान करने जितना फल मिलता है. रात में भगवान के सामने भजन-कीर्तन करने का खास महत्व है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को सही तरीके से करने से इंसान की सभी सांसारिक इच्छाएं पूरी होती हैं, जिससे सुख, समृद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक तरक्की मिलती है. कहा जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से यह व्रत रखता है, उसे आखिर में भगवान विष्णु का धाम मिलता है.

पद्मिनी एकादशी व्रत रखने की विधि
एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और पूजा करने का संकल्प लेना चाहिए. साफ कपड़े पहनकर चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं. उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. भगवान की मूर्ति का गंगाजल, पंचामृत या कच्चे दूध से अभिषेक करें. भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, बिना टूटे चावल और खासकर तुलसी के पत्ते चढ़ाएं. पीले फल, मिठाई या सात्विक खीर चढ़ाएं. ध्यान रखें कि भगवान को चढ़ाए जाने वाले हर भोग में तुलसी के पत्ते जरूर होने चाहिए. इस दिन विष्णु सहस्रनाम या गीता के 11वें अध्याय का पाठ करना सुख-समृद्धि के लिए फलदायी माना जाता है. शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें.
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