Ram Mandir: राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने रविवार को कहा कि अयोध्या मंदिर के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की ज़िम्मेदारियां और अधिकार मंदिर ट्रस्ट तय करेगा. उन्होंने कहा कि CEO की मुख्य ज़िम्मेदारी ट्रस्ट में श्रद्धालुओं की आस्था बनाए रखना होगी. मिश्रा ने अयोध्या में कहा कि नया CEO वित्तीय व्यवस्थाओं की भी देखरेख करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट या उसके CEO के कामकाज में कोई सरकारी दखल नहीं होगा.
चयन के लिए बना तीन सदस्यों का पैनल
मिश्रा ने आगे कहा कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सभी ज़रूरी सुविधाएं मिले और मंदिर में उनका भरोसा बना रहे, यह नए CEO की शुरुआती ज़िम्मेदारियों में शामिल होगा. मिश्रा ने कहा कि एक तरह से CEO बिना किसी सरकारी दखल के ट्रस्ट के सहायक के तौर पर काम करेगा. उन्होंने बताया कि CEO पद के लिए सही उम्मीदवारों की सिफारिश करने के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यों का एक पैनल बनाया है. मिश्रा ने कहा कि आखिर में यह ट्रस्ट पर निर्भर करता है कि वह CEO को कितने अधिकार देता है. CEO अपने स्टाफ़ की व्यवस्था खुद करेगा, लेकिन सब कुछ ट्रस्ट की देखरेख में ही होगा.
कहा- काफी संख्या में आ रहे श्रद्धालु
6 जुलाई को ट्रस्ट ने CEO पद के लिए उम्मीदवारों को चुनने के लिए तीन सदस्यों की एक समिति की घोषणा की थी. इस समिति में जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और NIT रायपुर के पूर्व चेयरमैन सुरेश हवारे शामिल हैं. जब मिश्रा से पूछा गया कि क्या वह CEO पद के लिए नामों की सिफारिश करने वाली समिति की बैठकों में शामिल होंगे, तो उन्होंने साफ़ तौर पर इससे इनकार कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या में राम मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है और वे अपने अनुभव को लेकर सकारात्मक महसूस करते हैं. काफी संख्या में श्रद्धालु भी आ रहे हैं.
22 जुलाई की बैठक का नहीं पता एजेंडा
राम मंदिर ट्रस्ट में किसी भी संभावित बदलाव के बारे में मिश्रा ने कहा कि मेरी मौजूदगी में कोई फैसला नहीं लिया गया. उन्होंने यह भी साफ किया कि वे 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की बैठक में शामिल नहीं हुए थे. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे 22 जुलाई को होने वाली बैठक में शामिल होंगे, तो मिश्रा ने कहा कि बैठक 22 जुलाई को है, लेकिन मुझे एजेंडा नहीं पता. अगर मामला निर्माण कार्य से जुड़ा हुआ तो मुझे वहां मौजूद रहना होगा. हम बिना वोटिंग अधिकार वाले पदेन निदेशक हैं. हम संबंधित विषयों पर अपनी राय देते हैं. एजेंडा पता चलने के बाद ही मैं तय करूंगा कि बैठक में शामिल होना है या नहीं.
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News Source: PTI
