Home Latest News & Updates ‘विकसित भारत’ को मिलेगी अंतरिक्ष की नई उड़ान! अहमदाबाद में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दिखी की स्पेस ताकत

‘विकसित भारत’ को मिलेगी अंतरिक्ष की नई उड़ान! अहमदाबाद में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर दिखी की स्पेस ताकत

by Nikul Patel 23 August 2026, 3:34 PM IST (Updated 23 August 2026, 3:35 PM IST)
23 August 2026, 3:34 PM IST (Updated 23 August 2026, 3:35 PM IST)
India space showcased Ahmedabad National Space Day

Gujarat News : अहमदाबाद के द फोरम कन्वेंशन सेंटर में तृतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस का भव्य आयोजन किया गया. ‘Towards Viksit Bharat: Innovating, Collaborating and Aspiring to Global Space Leadership’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के अंतरिक्ष उपयोग केंद्र SAC द्वारा किया गया. कार्यक्रम और अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित प्रदर्शनी का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत तथा गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने किया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि नवाचार, सहयोग और वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व केवल राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की विषय-वस्तु नहीं है, बल्कि विकसित भारत के निर्माण के लिए भारत की तीन महत्वपूर्ण आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है.

भारतीय सोच का प्रतिनिधित्व करता

नवाचार नए भारत की शक्ति का आधार है, सहयोग भारतीय सोच का प्रतिनिधित्व करता है और वैश्विक नेतृत्व भारत की महत्वाकांक्षा है. इन तीनों के केंद्र में देश की युवा शक्ति है. उन्होंने कहा कि दुनिया आज अंतरिक्ष तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, उन्नत सामग्री और उच्च प्रदर्शन वाली कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है. भविष्य में ये तकनीकें अलग-अलग नहीं रहेंगी, बल्कि इनके आपसी तालमेल से मानव जीवन, वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रभाव पड़ेगा. जो देश इन तकनीकों के एकीकरण की क्षमता विकसित करेगा, वही 21वीं सदी में तकनीकी और आर्थिक नेतृत्व करने में सक्षम होगा.

अंतरिक्ष तकनीक को केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं माना

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा संसाधनों की प्रचुरता से नहीं, बल्कि संकल्प, वैज्ञानिक आत्मविश्वास और दूरदर्शी सोच के साथ शुरू हुई थी. डॉ. विक्रम साराभाई जैसे महान वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष तकनीक को केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं माना, बल्कि इसे आम नागरिक के जीवन में बदलाव लाने का माध्यम बनाया. उन्होंने कहा कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की सफलता का मूल्यांकन केवल उपग्रहों और अभियानों की संख्या से नहीं किया जाना चाहिए. किसानों, मछुआरों, आपदा प्रबंधन, मौसम पूर्वानुमान, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुशासन के क्षेत्र में अंतरिक्ष तकनीक से आए बदलाव भी इसकी सफलता का महत्वपूर्ण पैमाना हैं.

अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार ऐतिहासिक बदलाव साबित हुए

शेखावत ने कहा कि वर्ष 2020 में किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधार भारत के लिए ऐतिहासिक बदलाव साबित हुए हैं. निजी क्षेत्र, स्टार्टअप और उद्योगों के लिए अंतरिक्ष क्षेत्र खोले जाने से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की भूमिका कम नहीं हुई, बल्कि उसकी क्षमताओं को और व्यापक बनाने का अवसर मिला है. उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण सेवाओं, उपकरणों, जमीन पर आधारित सहायता, अंतरिक्ष उपयोग और आंकड़ों के विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है. केंद्रीय मंत्री के अनुसार, भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था वर्तमान में लगभग 8 अरब डॉलर की है और आने वाले दशक में इसे 44 अरब डॉलर तक पहुंचाने की बड़ी संभावना है. हालांकि केवल आर्थिक आकार बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है. देश में अत्याधुनिक तकनीक का निर्माण, उच्च कौशल वाले रोजगार का सृजन, बौद्धिक संपदा का व्यावसायीकरण और भारतीय समस्याओं के तकनीक आधारित समाधान विकसित करना भी जरूरी है. उन्होंने अंतरिक्ष मलबे, साइबर सुरक्षा, आंकड़ों की सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि कक्षा पूरी दुनिया के लिए साझा और सीमित संसाधन है. बढ़ते उपग्रहों के कारण पैदा हो रहे अंतरिक्ष मलबे को भविष्य में बड़ी चुनौती बनने से रोकने के लिए भारत को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी.

अनुसंधान का केंद्र बनाने का संकल्प

गुजरात के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री अर्जुनभाई मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात के लिए विरासत और विकास दोनों महत्वपूर्ण हैं. अहमदाबाद और महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई के बीच का ऐतिहासिक संबंध गुजरात के लिए गौरव की बात है. डॉ. साराभाई ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव रखी और आज भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन तथा अंतरिक्ष उपयोग केंद्र भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि गुजरात ने विज्ञान और तकनीक को विकास के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल करते हुए अनुसंधान, नवाचार, स्टार्टअप और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है. आज युवा केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले और अपने विचारों को स्टार्टअप में बदलने वाले बन रहे हैं. मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात में अंतरिक्ष तकनीक आधारित कई स्टार्टअप नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

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उन्होंने भारत सरकार और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के सहयोग से गुजरात में स्थापित होने वाली साझा परीक्षण सुविधा का उल्लेख करते हुए देशभर के स्टार्टअप और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को गुजरात में निर्माण इकाइयां स्थापित करने का आमंत्रण दिया. विज्ञान के प्रचार-प्रसार पर मंत्री ने कहा कि गुजरात में विभिन्न विज्ञान दीर्घाओं के साथ 24 जिलों में क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र और जिला विज्ञान केंद्रों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा आम लोगों में विज्ञान के प्रति रुचि विकसित की जा रही है. हर वर्ष लगभग 10 लाख लोग विज्ञान पर्यटन का लाभ उठा रहे हैं. अहमदाबाद को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के आयोजन के लिए चुनने पर भारत सरकार का आभार व्यक्त करते हुए मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात को राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की मेजबानी का अवसर मिलना गौरव की बात है. गुजरात सरकार अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष तकनीक, स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर युवाओं को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ने के लिए मजबूत मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.

विश्व की अग्रणी अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में भारत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डॉ. वी. नारायणन ने कहा कि 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक उतरने के साथ भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की थी. इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जाता है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1962 में शुरू हुई भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की यात्रा आज भारत को विश्व की अग्रणी अंतरिक्ष शक्तियों में शामिल होने की दिशा में ले जा चुकी है. चंद्रयान-1 द्वारा चंद्रमा पर पानी के अणुओं की खोज, चंद्रयान-2 की अत्याधुनिक कैमरा तकनीक और चंद्रयान-3 की सफलता भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है. डॉ. नारायणन ने बताया कि अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए सुधारों के बाद देश में स्टार्टअप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. वर्तमान में लगभग 440 स्टार्टअप अंतरिक्ष क्षेत्र में काम कर रहे हैं.

केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं

उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम नागरिकों तक अंतरिक्ष तकनीक का लाभ पहुंचाना इसका प्रमुख उद्देश्य है. भारत ने गगनयान, चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, मंगल और शुक्र ग्रह के अभियानों तथा वर्ष 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने जैसे महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किए हैं. कार्यक्रम में भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र के अध्यक्ष डॉ. पवनकुमार गोयनका ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की प्रगति, वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और भविष्य में उपलब्ध अवसरों पर मार्गदर्शन दिया. इस दौरान अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की रोबोटिक्स चुनौती, भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन और डॉ. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष प्रश्नोत्तरी के विजेता दलों को पुरस्कार प्रदान किए गए.

रोजगार एवं करियर के अवसर

कार्यक्रम में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार एवं करियर के अवसर, भारत के नए अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार तथा अंतरिक्ष क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने चर्चा की. शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों, निजी अंतरिक्ष कंपनियों, स्टार्टअप और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने इसमें भाग लिया. पूरे कार्यक्रम के दौरान भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों, नवाचार, अनुसंधान, निजी क्षेत्र की भागीदारी और वैश्विक सहयोग की नई संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया. यह आयोजन भारत को वैश्विक अंतरिक्ष नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने के संकल्प को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ. अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ. वी.एन. राव, डॉ. कार्तिकेय साराभाई सहित वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, स्टार्टअप से जुड़े लोग, शिक्षाविद और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे.

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