Health Tips: मानव शरीर की संरचना बेहद रहस्यमयी और वैज्ञानिक है. मस्तिष्क के बिल्कुल बीचो-बीच मटर के दाने के आकार की एक छोटी सी ग्रंथि होती है. जिसे पीनियल ग्रंथि (Pineal Gland) कहा जाता है. योग और अध्यात्म में इसे ‘तीसरी आंख’ या ‘आज्ञा चक्र’ का मुख्य जैविक केंद्र माना गया है. आधुनिक विज्ञान और योग दोनों ही मानते हैं कि यह छोटी सी ग्रंथि हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संचालित करने में अहम भूमिका निभाती है. आध्यत्मिक दृष्टिकोण की बात करें तो भगवान शिव के मस्तिष्क (ललाट) पर विद्यमान तीसरी आंख की महिमा का बखान हमें दिखाई पड़ता है.
शरीर और स्वास्थ्य पर पीनियल ग्रंथि का प्रभाव
पीनियल ग्रंथि का मुख्य कार्य मेलाटोनिन (Melatonin) नामक हार्मोन का उत्पादन करना है. जो हमारे शरीर की ‘जैविक घड़ी’ (Circadian Rhythm) को नियंत्रित करता है.
बेहतर नींद और मूड संतुलन: यह ग्रंथि रात के अंधेरे में मेलाटोनिन रिलीज करती है. जिससे गहरी नींद आती है. इसकी कार्यप्रणाली सही रहने से डिप्रेशन, एंग्जायटी और तनाव कम होता है.
हार्मोनल संतुलन: महिलाओं के प्रजनन तंत्र और मासिक धर्म चक्र को नियमित रखने में इसकी बड़ी भूमिका होती है.
कोशिकीय सुरक्षा (Antioxidant properties): मेलाटोनिन एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में कार्य कर कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाता है.
मानसिक स्पष्टता और अंतर्ज्ञान: इस ग्रंथि के पूर्ण रूप से सक्रिय होने पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति अभूतपूर्व रूप से बढ़ती है.

पीनियल ग्रंथि को कैसे करें एक्टिव व जाग्रत? (प्रमुख योगाभ्यास)
मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) और योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और षट्कर्म क्रियाओं के माध्यम से पीनियल ग्रंथि को उत्तेजित और संतुलित किया जा सकता है.
शुद्धि क्रियाएं (जलनेति व सूत्रनेति): नाक के मार्ग को साफ करने वाली ये क्रियाएं तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करती हैं और कपाल (मस्तिष्क) क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाती हैं.
ध्यान एवं दृष्टि अभ्यास (त्राटक): दीये या मोमबत्ती की लौ पर बिना पलक झपकाए ध्यान केंद्रित करने से आज्ञा चक्र सक्रिय होता है और पीनियल ग्रंथि की कार्यक्षमता बढ़ती है.
प्राणायाम (भ्रामरी व कपालभाति): भ्रामरी प्राणायाम के दौरान उत्पन्न होने वाली ‘ओम’ की ध्वनि तरंगें और कंपन सीधे पीनियल ग्रंथि को स्पंदित करते हैं. वहीं कपालभाति मस्तिष्क को प्रचुर मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचाती है.
इनवर्जन आसन (शीर्षासन व पादहस्तासन): सिर को नीचे झुकाकर किए जाने वाले आसनों से सिर की ओर रक्त का प्रवाह तेजी से बढ़ता है.जिससे ग्रंथि को पोषण मिलता है.
ऊर्जा संतुलन आसन (सूर्य नमस्कार व शशकासन): ये आसन पूरे शरीर की चक्र प्रणाली को संतुलित करते हैं और मानसिक शांति प्रदान करते हैं.
सावधानी और जीवनशैली में बदलाव
आज की आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक स्क्रीन (ब्लू लाइट) देखना, कैफीन का अत्यधिक सेवन और फ्लोराइड युक्त पानी/टूथपेस्ट इस ग्रंथि को अक्रिय (Calcify) कर देते हैं. पीनियल ग्रंथि को स्वस्थ रखने के लिए रात को अंधेरे में सोएं, सुबह की प्राकृतिक धूप लें और इन योगाभ्यासों को किसी कुशल योग गुरु के मार्गदर्शन में अपनी दिनचर्या में शामिल करें.
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