Anti Doping Act: खेल मंत्रालय ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी अधिनियम में कड़े संशोधन का प्रस्ताव दिया है. इसके तहत एथलीटों के बीच प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी और वितरण को अब अपराध माना जाएगा. जानबूझकर ऐसी दवाएं लिखने वाले डॉक्टरों और आपूर्तिकर्ताओं को 5 साल तक की जेल, 2 लाख तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं. खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि जनता से सुझाव के लिए विधेयक वेबसाइट पर अपलोड है. प्रतिक्रिया देने की अंतिम तिथि 18 जून तय की गई है. इसके बाद आगामी मानसून सत्र में संशोधित विधेयक को संसद में पेश किया जाएगा.
संसद के मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक
खेल मंत्री मंडाविया लंबे समय से इस खतरे से निपटने के लिए जागरूकता अभियान चला रहे हैं. उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित दवाओं की संगठित आपूर्ति को अपराध बनाना जरूरी है. मंडाविया ने कहा कि डोपिंग अब केवल एक खेल उल्लंघन नहीं है बल्कि यह एथलीटों का शोषण करने वाले एक संगठित तंत्र के रूप में विकसित हो गया है. उन्होंने कहा कि हम केवल उन लोगों को दंडित करते हैं जो उपभोग कर रहे हैं, लेकिन डॉक्टरों और आपूर्तिकर्ताओं को भी कानून के दायरे में लाना आवश्यक है. इसलिए चाहे वह कोच हो, मैनेजर हो, साथी एथलीट हो या एथलीट तक सीधी पहुंच रखने वाला कोई भी हो, इन संशोधनों के लागू होने पर दोषी पाए गए लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा. मंडाविया ने इस खतरे से निपटने के लिए दंडात्मक प्रावधान लाने की सरकार की योजना की घोषणा की. खेल मंत्री ने कहा कि संसद के मानसून सत्र में नया डोपिंग रोधी विधेयक पेश होगा.
देश का खराब डोपिंग रिकॉर्ड सुधारने की कवायद
भारत पिछले तीन वर्षों से डोप अपराधियों की वैश्विक सूची में शीर्ष पर है. भारत 2036 में ओलंपिक मेजबान बनने का इच्छुक है और उसने 2030 राष्ट्रमंडल खेलों को पहले ही हासिल कर लिया है, लेकिन देश का खराब डोपिंग रिकॉर्ड उस योजना में एक बड़ी बाधा बन सकता है. नया संशोधन 2018 में प्रस्तावित संशोधन के समान है. उस समय प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति करने का दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए चार साल की जेल की सजा और दो लाख रुपये का जुर्माना था. नए संशोधन में उन लोगों को भी शामिल किया गया है जो प्रतिबंधित दवाएं लिखते हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई चिकित्सक डोपिंग अपराध में भागीदार है तो वह भी उत्तरदायी होगा. यह कानून उन एथलीटों के लिए निर्धारित दवाओं पर छूट देगा जिनके पास प्रमाणित चिकित्सा स्थितियों के लिए चिकित्सीय उपयोग छूट है और उन डॉक्टरों के लिए जो आपातकालीन स्थितियों से निपट रहे हैं. ऐसे में बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी एथलीट पर होगी.
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News Source: PTI
