Chicken Neck: देश की मोदी सरकार भारत की सुरक्षा के लिए हर एंगल से अहम बॉर्डर इलाकों को लेकर काफी जागरूक और सतर्क है. देश की शांति और सुरक्षा में कोई सेंध ना लगे, इसके लिए सरकार कई सारे कदम उठा रही है. ताजा मामला बांग्लादेश सहित तीन देशों की सीमाओं से घिरे उस कॉरिडोर का है, जो पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है. इस कॉरिडोर या गलियारे को सिलीगुड़ी कॉरिडोर कहा जाता है.
इसका एक खास नाम भी है और वह है- चिकन नेक. सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसका आकार मुर्गी की गर्दन जैसा पतला है. 20 से 22 किलोमीटर चौड़ा और करीब 60 किमी लंबा चिकन नेक सीधे तौर पर तो चीन से नहीं जुड़ा है लेकिन चीन की सीमा (तिब्बत की चुम्बी घाटी) से मात्र 130 किलोमीटर दूर स्थित है. चीन के इतने करीब होने की वजह से भारत सरकार इस संकरे गलियारे को और भी सुरक्षित करने की तैयारी में है.
हाल ही में पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है. बीते कई वर्षों में बंगाल के जरिए देश में बांग्लादेश समेत अन्य देशों से घुसपैठिओं की शिकायत आती रही है. किसी भी देश में घुसपैठ, उस देश और उसके नागरिकों की सुरक्षा व शांति के लिए किसी खतरे से कम नहीं है. अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बन जाने के बाद चिकन नेक को लेकर एक बहुत ही बड़ा फैसला किया गया है. बता दें कि चिकन नेक, जिसे सिलीगुड़ी कॉरिडोर भी कहा जाता है. यह पश्चिम बंगाल में स्थित है. इसकी लंबाई करीब 60 किमी और चौड़ाई 22 किमी तक है.
चिकन नेक गलियारे की चौहद्दी की बात करें तो इसके पूर्व में भारत के पूर्वोत्तर राज्य (असम समेत अन्य राज्य), पश्चिम में नेपाल, उत्तर में भूटान और दक्षिण में बांग्लादेश है. उत्तर दिशा में ही करीब 130 किमी दूर चीन की भी सीमा (तिब्बत की चुंबी घाटी) लगती है. बंगाल में अपनी सरकार (बीजेपी) बनने के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार चिकन नेक गलियारे को लेकर बड़ा कदम उठा रही है. चीन से काफी नजदीक और बांग्लादेश समेत तीनों देशों से घिरे होने की वजह से भारत की सुरक्षा को देखते हुए चिकन नेक काफी अहम कॉरिडोर है. आइए जानते हैं कि हाल ही में बंगाल की बीजेपी सरकार ने इस गलियारे को लेकर क्या कुछ फैसला किया है और इसके साथ ही जानेंगे कि केंद्र की मोदी सरकार इसको लेकर क्या कुछ रही है और फिर अंत में जानेंगे कि यह भारत की सुरक्षा के लिए कितना अहम है. तो चलिए शुरू करते हैं.

120 एकड़ जमीन का हस्तांतरण
पश्चिम बंगाल में हाल ही में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की बड़ी हार हुई और विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बहुमत से काफी अधिक सीटें लाकर इतिहास रच दिया. भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में 293 सीटों में से 207 सीटों पर जीत हासिल कर पहली बार अपनी सरकार बनाई है. प्रदेश में अभी नई नवेली भाजपा की सरकार है और बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदू अधिकारी हैं. सरकार बनने के बाद अधिकारी सरकार कई बड़े फैसले कर रही है. इनमें से एक है सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी कि चिकन नेक गलियारे के लिए 120 एकड़ जमीन का केंद्र सरकार को देना. बंगाल की शुभेंदू सरकार ने देश की सुरक्षा और संप्रभुता की अहमियत को देखते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर में 120 एकड़ जमीन का केंद्र सरकार को रणनीतिक रूप से हस्तांतरण करने का फैसला किया है.
बताया जा रहा है कि बंगाल सरकार के इस फैसले से केंद्र को सिलीगुड़ी कॉरिडोर में देश की सुरक्षा के लिए और भी अधिक मजबूती मिलेगी. केंद्र की मोदी सरकार इस क्षेत्र में मिलिट्री सामानों, इंफ्रास्ट्रक्चर, बॉर्डर सुरक्षा और पूर्वोत्तर में भारत की जीवनरेखा को और भी अधिक मजबूत करेगी. सिलीगुड़ी कॉरिडोर एक संकरा रास्ता रहा है, जहां हमेशा से देश पर किसी के द्वारा हमला, सीक्रेट ऑपरेशन समेत अन्य खतरा रहा है. घुसपैठ की भी काफी अधिक आशंका रही है. अब सरकार इस कॉरिडोर को भारत की सुरक्षा के नजरिये से काफी मजबूत बनाने जा रही है. सिलीगुड़ी कॉरिडोर को देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है. बंगाल सरकार की ओर से इस क्षेत्र में 120 एकड़ जमीन केंद्र को देने के बाद अब इसे बीएसएफ और रक्षा मंत्रालय को सौंप देने की बात कही गई है.

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चिकन नेक में क्या कर रही है केंद्र सरकार?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर जिसे चिकन नेक भी कहा जाता है, पश्चिम बंगाल में स्थित करीब 22 किमी चौड़ा और 60 किमी लंबा यह संकरा गलियारा भारत के साथ-साथ इसके 8 पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रणनीतिक रूप से काफी अहम है. इन आठ राज्यों में अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम शामिल हैं. बंगाल सरकार के द्वारा इस क्षेत्र में 120 एकड़ जमीन हस्तांतरण किए जाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार इसमें कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करने जा रही है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार चिकन नेक क्षेत्र में जमीन के नीचे सुरंग बनाकर उसमें रेल पटरियां बिछाने के काम की तैयारी कर रही है. इतना ही नहीं सरकार असम के ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे भी एक लंबी सुरंग बनाने की योजना में है.
देश और दुनिया की भू-राजनीतिक नजरिये से चिकन नेक कॉरिडोर बहुत ही खास है. इस रास्ते से आम लोगों के अलावा जवानों की भी आवाजाही होती रही है. अब अतिरिक्त जमीन मिल जाने के बाद से सरकार इस क्षेत्र में आठ राज्यों के अलावा देश की सुरक्षा के लिए भी कई बड़े कदम उठा सकती है. सीमा के पास सैनिक वाहनों, सामानों आदि ले जाने के लिए भी यह कॉरिडोर खास माना जा रहा है. इस सीमाई क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति(जैसे युद्ध, अधिक मात्रा में घुसपैठ आदि) से निपटने के लिए भी सरकार को चिकन नेक बहुत ही काम आने वाला है.

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जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार की प्लानिंग है कि चिकन नेक कॉरिडोर में जमीन के अंदर ट्रेन की पटरियां बिछाई जाएंगी. इसे सामरिक रूप से भी बहुत ही अहम माना जा रहा है. इसके अलावा भारतीय सेना, जो बांग्लादेश के पास तीन क्षेत्रों में सैन्य बेस बना रही है, उनके नजदीक से भी इस रेल लाइन के गुजरने की भी बात कही जा रही है. जानकार बताते हैं कि चिकन नेक बांग्लादेश, भूटान और नेपाल जैसे तीन देशों के अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगता है, इसको देखते हुए इसमें बिछने वाली रेल पटरियां और बनने वाले सुरंग किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए काफी सहायक होंगे.
जानकारी के अनुसार, केंद्र की मोदी सरकार को करीब 7 नेशनल हाईवे से जुड़े प्रोजेक्ट्स का नियंत्रण सौंपा गया है. ये सभी पूर्व में बंगाल की ममता सरकार के दौरान अटकी हुई थीं, लेकिन अब बीजेपी सरकार आने से इनपर तेजी के साथ काम होने की उम्मीद जताई जा रही है. चिकन नेक के जरिए देश की सुरक्षा व्यवस्था में भी सुधार की जाएगी. इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना, भारतीय सेना का आवागमन आसान करना समेत अन्य चीजें शामिल हैं.
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भारत की सुरक्षा के लिए कितना अहम चिकन नेक?
चीन से करीब 130 किमी दूर और तीन देशों के बॉर्डरों से घिरा चिकन नेक देश की सुरक्षा को लेकर बहुत ही संवेदनशील कॉरिडोर व रास्ता है. जानकार बताते हैं कि यह भूटान, बांग्लादेश और नेपाल की सीमा से घिरा हुआ है. इसके पूर्व में पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश और असम सहित कुल 8 राज्य हैं. अगर कोई दुश्मन इस कॉरिडोर को बाधित करता है तो इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों का संपर्क टूटने का खतरा होता है. सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इन पूर्वोत्तर राज्यों के साथ-साथ देश की सुरक्षा के लिए खास यह कॉरिडोर बंगाल सरकार के द्वारा 120 एकड़ जमीन दिए जाने के बाद पहले से काफी मजबूत हो जाएगा. भारत सरकार इस क्षेत्र में रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी के साथ मजबूत करेगी.
सैन्य जानकार बताते हैं कि इस रास्ते पर काफी पहले से चीन समेत अन्य विरोधी देशों की नजरें टिकी हुई हैं. अगर इसे बाधित किया जाता है तो भारत का पूर्वोत्तर राज्यों से संपर्क टूट जाएगा. इस संवेदनशीलता को देखते हुए अब भारत सरकार इस क्षेत्र में काफी कुछ करने जा रही है. चिकन नेक को भारत से पूर्वोत्तर को जोड़ने, आर्थिक और सैन्य साज सम्मान को बॉर्डर तक पहुंचाने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर देश की सुरक्षा के लिए हर एक जरूरत को पूरा करने के लिए खास माना जाता है. भारत की सुरक्षा को देखते हुए चिकन नेक कॉरिडोर देश की सेना के लिए हथियार, सामान, खाने-पीने का राशन, बॉर्डर पर अतिरिक्त फोर्स पहुंचाने के लिए काफी अहम है. सबसे बड़ी बात यह है कि चिकन नेक के आसपास चीन अपनी सैन्य क्षमता को पहले से अधिक मजबूत करता हुआ दिख रहा है. इसको देखते हुए भारत को भी अपनी सुरक्षा के लिए इस क्षेत्र में कई बड़े काम करने हैं. इनमें से खास काम हैं कि इस क्षेत्र में सैन्य क्षमता और इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत व शानदार किया जाए.

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बता दें कि साल 2017 में डोकलाम विवाद इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ था. उस समय चीन और भारतीय सेना में झड़प की खबर सामने आई थी. उसके बाद यह गलियारा और भी महत्वपूर्ण हो गया है. चीन समेत अन्य देशों से पास होने की वजह और भारत की सुरक्षा को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार इस क्षेत्र में अपनी पैनी नजर बनाए हुए है. सरकार की कोशिश रहेगी कि जितना जल्दी हो सके, उतनी जल्दी इस क्षेत्र को सैन्य इंफ्रा की मजबूती के साथ-साथ हर तरीके से मजबूत कर दिया जाए, ताकि आने वाले समय में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति से समय रहते हुए निपटा जा सके.
