Vinesh Phogat : दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार (6 जुलाई, 2026) को पहलवान विनेश फोगाट से जुड़े मामले में भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को बड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने WFI से कहा है कि अनुशासनहीनता और एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के आरोपों पर जारी कारण बताओ नोटिस पर दो हफ्ते में फैसला लें. न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता ने फोगाट की याचिका पर सुनवाई करने के बाद इसका निपटारा कर दिया. अदालत ने यह भी कहा कि WFI फैसला लेने से पहले विनेश को अपनी बात रखने का पूरा मौका जरूर दें.
फोगाट को अपनी बात रखने का दिया जाएगा मौका
WFI के वकील ने अदालत को विश्वास दिलाया कि ‘शो-कॉज़ नोटिस’ पर फैसला ले लिया जाएगा और अब याचिका बंद की जा सकती है. याचिका का निपटारा करते हुए जज ने आदेश दिया कि दो हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ता और कोर्ट को जानकारी देते हुए 9 मई के शो-कॉज पर फैसला लें. साथ ही फेडरेशन के वकील ने भी कहा कि नोटिस पर फैसला लेने से पहले फोगाट को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया जाएगा. हालांकि, इसी बीच फोगाट के वकील ने कहा कि याचिका में सेलेक्शन कॉलिसी से जुड़े बड़े मुद्दों को भी उठाया गया है. इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एथलीट को इसके लिए नई याचिका दायर करनी होगी.
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नई रिट याचिका करनी होगी दायर
कोर्ट ने कहा कि इसका निपटारा किया जा सकता है और इसके बाद आप नई रिट याचिका दायर कर सकते हैं. 9 मई को WFI ने फोगाट को शो-कॉज नोटिस जारी किया था और एंटी-डोपिंग नियमों के तहत रिटायरमेंट से लौटने वाले एथलीटों के लिए जरूरी 6 महीने के नोटिस पीरियड का हवाला दिया गया. इसके बाद उन्हें 26 जून, 2026 तक घरेलू इवेंट्स में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य करार दे दिया गया.
सेलेक्शन पॉलिसी को दी थी चुनौती
वहीं, अपनी पिटिशन में विनेश ने WFI की सेलेक्शन पॉलिसी को भी चुनौती दी थी. इस पॉलिसी ने एशियन गेम्स ट्रायल्स में हिस्सा लेने की एलिजिबिलिटी को कुछ खास टूर्नामेंट्स के मेडल जीतने वालों तक ही सीमित कर दिया था. फोगाट ने कहा कि WFI ने दिल अवधि को क्वालिफिकेशन विंडो बनाया. वह उनकी गर्भावस्था और प्रसव के बाद के विश्राम के समय मेल खाती थी. उन्होंने कहा कि यह वजह है कि चयन प्रक्रिया में हिस्सा लेना लगभग असंभव हो गया. उन्होंने इस नियम को भेदभावपूर्ण वाला बताया था.
क्या है पूरा मामला?
WFI ने 9 मई को पहलवान विनेश फोगाट को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था. इस दौरान फेडरेशन ने उन पर अनुशासनहीनता और डोपिंग नियमों से जुड़े प्रावधानों का उल्लंघन के आरोप लगाए थे. इसके बाद ही WFI ने घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित करार दिया गया. भारतीय कुश्ती संघ ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया कि संन्यास लेने के बाद खिलाड़ी जब वापसी करता है तो उसे 6 महीने पहले सूचना देनी होती है और इसी नियम को फॉलो नहीं करने को लेकर उन पर कार्रवाई हुई.
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News Source: PTI
