Home Latest News & Updates 13 साल की बच्ची के साथ 32 हैवानों ने किया दुष्कर्म, रेप के मामलों में टॉप पर है राजस्थान, देश में हर दिन 80 केस

13 साल की बच्ची के साथ 32 हैवानों ने किया दुष्कर्म, रेप के मामलों में टॉप पर है राजस्थान, देश में हर दिन 80 केस

by Neha Singh 6 July 2026, 6:09 PM IST (Updated 6 July 2026, 6:13 PM IST)
6 July 2026, 6:09 PM IST (Updated 6 July 2026, 6:13 PM IST)
Rape Statistics in India

Rape Statistics in India: भारत के समाचार पत्रों और न्यूज चैनलों में हर दिन महिलाओं से जुड़े अपराध की नई खबरें सुनाई देती हैं, हालांकि उनमें केवल नाम और जगह बदलते हैं, लेकिन अपराध वहीं रहता है. महिलाओं के खिलाफ अपराध अब समाज और राजनीति के लिए इतना आम हो गया कि हम न इसके खिलाफ कुछ करने की मांग करते हैं और न ही नेताओं को महिला सुरक्षा एक जरूरी मुद्दा लगता है. ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के बैनरों और विज्ञापनों के पीछे छुप जाती हैं उन बेटियों की चीखें जिन्हें किसी हैवान ने अपनी हवस का शिकार बना लिया.

घर से लेकर स्कूल और ऑफिस तक शायद ही कोई ऐसी जगह होगी, जहां किसी बेटी के साथ दरिंदगी न हुई हो. स्त्रीद्वेषी और रूढ़िवादी लोगों अक्सर महिलाओं के पहनावे और रहन-सहन को अपराध का कारण बताते हैं. लेकिन सच तो यह है कि 6 महीने की बच्ची से लेकर 60 साल की बूढ़ी महिला के साथ दुष्कर्म हुआ है. ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जहां एक पिता और खून रिश्तों ने अपनी ही बच्ची को नहीं बख्शा. ऐसे में सवाल यह है कि एक लड़की कहां सुरक्षित है?

आपको जानकर हैरानी होगी कि देश में हर साल लगभग 30,000 रेप की घटनाएं होती हैं. इस खबर आप आंकडों की मदद से समझेंगे कि कि देश में हर साल रेप के कितने मामले सामने आते हैं और कौन से राज्य इस लिस्ट में टॉप पर रहते हैं.

हर दिन 80 रेप के मामले

भारत में हर दिन लगभग 80 केस दर्ज किए जाते हैं और हर 18 मिनट में एक महिला या बच्ची के साथ दरिंदगी होती है. साल 2024 में देश मे 29,536 रेप की घटनाएं हुई. वहीं रेप दर 4.3 रहा. यह डेटा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों पर आधारित है और NCRB द्वारा इकट्ठा किया गया है.

इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 से 71 और IPC की धारा 376 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 से 71 और IPC की धारा 376 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं. डेटा के मुताबिक, राजस्थान रेप के मामले में टॉप पर रहा. यहां साल में कुल 4871 मामले सामने आए हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश में रेप के 3209 केस रजिस्टर हुए. इसके बाद महाराष्ट्र में 3091, मध्य प्रदेश में 3061, हरियाणा में 1391 मामले दर्ज किए गए. नीचे आपको राज्य-वार आंकड़े दिए गए हैं.

रैंकराज्य / केंद्र शासित प्रदेशरेप के मामले
1राजस्थान4,871
2उत्तर प्रदेश3,209
3महाराष्ट्र3,091
4मध्य प्रदेश3,061
5हरियाणा1,391
6ओडिशा1,268
7छत्तीसगढ़1,171
8बिहार1,165
9तेलंगाना1,148
10पश्चिम बंगाल1,118
11झारखंड1,073
12दिल्ली1,058
13केरल940
14असम927
15कर्नाटक671
16गुजरात661
17पंजाब475
18आंध्र प्रदेश441
19तमिलनाडु419
20हिमाचल प्रदेश324
21उत्तराखंड305
22जम्मू एवं कश्मीर261
23गोवा105
24अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह7
25अरुणाचल प्रदेश76
26त्रिपुरा64
27मेघालय57
28मिजोरम20
29मणिपुर19
30नागालैंड14
31चंडीगढ़96
32दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव11
33पुडुचेरी9
34लक्षद्वीप9
35सिक्किम7
36लद्दाख2

रेप की कोशिश के 2561 मामले

साल 2024 में ही, पूरे देश में रेप की कोशिश के कुल 2561 मामले दर्ज किए गए हैं. पूरे भारत में दर्ज हुए कुल 29,536 रेप केस में से, 28950 में पीड़िता 18 साल या उससे ज्यादा उम्र की थी, जबकि 784 केस में पीड़िता 18 साल से कम उम्र की थी. इसके अलावा भारत में BNS के सेक्शन 74 के तहत ‘महिलाओं की इज्जत खराब करने के इरादे से’ हमला करने के 48,303 केस दर्ज किए गए. इसके अलावा देशभर में सेक्सुअल हैरेसमेंट के 15620 केस दर्ज किए गए, जिसमें सबसे ज्यादा मामले उत्तर प्रदेश 2,659 और महाराष्ट्र 2,637 से रिपोर्ट किए गए. वहीं दिल्ली में सेक्सुअल हैरेसमेंट के 324 केस सामने आए.

भारत में 2024 में दहेज के लिए 5,737 बेटियों की हत्या कर दी गई. पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता के 1,20,027 मामले दर्ज किए गए. महिलाओं को किडनैप करने या शादी के लिए मजबूर करने के कुल 28,949 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 13,192 मामलों में 18 साल से कम उम्र की लड़कियां शामिल थीं. NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में प्रति लाख महिलाओं की आबादी पर दर्ज क्राइम रेट 64.6 था, जबकि 2023 में यह 66.2 था. यानी एक साल में ही 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

85 प्रतिशत मामलों में परिचित होते हैं आरोपी

NCRB के विश्लेषण से पता चलता है कि कुल रजिस्टर्ड मामलों में से लगभग 85% से 90% में आरोपी कोई जान-पहचान वाला, रिश्तेदार, पड़ोसी या ऐसा कोई व्यक्ति होता है, जो पीड़िता को पहले से जानता हो. पिछले कुछ सालों के रेप के मामलों पर नजर डालें तो, 2023 में 29670 मामले, 2022 में कुल 31516 मामले और 2021 में 31677 मामले दर्ज मामले किए गए. यानी पिछले सालों में हमें कुछ खास सुधार देखने को नहीं मिला है.

कितनों को मिला न्याय

वहीं अगर यह 2024 में 29,536 रेप केस में से लगभग 7,200 में सजा हुई यानी कुल 24 प्रतिशत. इनमें से ज्यादातर केस (75% से ज़्यादा) या तो कोर्ट में साबित नहीं हुए, गवाह के मुकरने की वजह से खारिज हो गए, या बरी हो गए. 2024 में पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के 6,23,377 मामलों की जांच की जिसमें पिछले साल के 1,81,717 पेंडिंग मामले शामिल थे. इनमें से 3,36,609 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई और चार्जशीट दाखिल करने की दर 77.2 प्रतिशत रही.

राजस्थान में मासूम के साथ सामूहिक दुष्कर्म

राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक बेहद दर्दनाक मामला आया है, जहां एक 13 साल की बच्ची के साथ 32 लोगों ने 5 दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया. आरोपियों ने पीड़िता को तीन होटलों- खुंगर, जैप इन और सफायर में बंधक बनाकर तीन दिनों तक इस अपराध को अंजाम दिया. मुखबिर से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने 23 जून को होटल खुंगर में छापा मारा और नाबालिग का रेस्क्यू किया. उसे छुड़ाकर पूछताछ करने पर पता चला कि होटल मालिक और मैनेजर उससे रेप के लिए पैसे वसूल रहे थे.

Rajasthan Rape

पीड़िता ने 18 जून अपने घर से बाहर निकली घर से बाहर खेलने निकली थी. रास्ते में एक रिक्शा चालक ने बच्ची के सीधेपन का फायदा उठाया. उसने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा लिया और उसे शहर के एक होटल मालिक को बेच दिया. होटल के मैनेजर ने बच्ची की तस्वीर व्हॉट्सऐप पर दूसरे होटलों को शेयर की. इसके बाद तीन होटलों में उसके साथ दुष्कर्म हुआ. पुलिस जांच में पता चला कि तीनों होटलों में अलग-अलग दिनों में कुल 32 लोगों ने नाबालिग का साथ दुष्कर्म किया. कभी तीन से चार लोग, तो कभी उससे भी ज्यादा.

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार हो रही प्रताड़ना से जब उसे दर्द होता था, तो वे हैवान उसे शराब पीने के लिए मजबूर करते थे. इसका खुलासा तब हुआ जब पीड़ित लड़की की तस्वीरें किसी तरह पुलिस तक पहुंच गईं. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम ने तुरंत रेड की और मासूम लड़की को अपराधियों के चंगुल से सुरक्षित छुड़ा लिया. पुलिस जांच में पता चला कि तीनों होटल नियमों को तोड़कर बनाए गए थे. पुलिस ने दो दिन पहले होटल चलाने वालों को नोटिस जारी किया था और जब कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्हें गिरा दिया गया. जिला पुलिस अधीक्षक हरिश्चंद्र ने कहा कि मामले की जांच जारी है.

कोलकातार रेप-मर्डर केस

साल 2024 में अगस्त में कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में एक 31 साल की पोस्टग्रेजुएट ट्रेनी डॉक्टर के साथ बेरहमी से गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या कर दी गई. वह 36 घंटे की ड्यूटी के बाद वहां आराम कर रही थी. इस भयानक घटना से पूरे देश में, खासकर मेडिकल कम्युनिटी में बहुत गुस्सा फैल गया. डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और खराब सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश भर में हड़तालें और बड़े पैमाने पर नागरिक विरोध प्रदर्शन हुए. मामले की जांच कोलकाता पुलिस से सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को ट्रांसफर कर दी गई, जिसने कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का खुद संज्ञान लिया और दोषी संजय को फांसी की सजा सुनाई. हालांकि पीड़िता की मां रत्ना देबनाथ का आरोप है कि इस अपराध में और भी लोग शामिल थे.

Kolkata rape murder

निर्भया रेप और हत्या

निर्भया रेप और हत्याकांड के बारे में शायद की कोई भारतीय नहीं जानता होगा. यह मामला रूह कंपा देने वाला था. 16 दिसंबर 2012 की रात को दिल्ली में पैरामेडिकल स्टूडेंट निर्भया के साथ चलती बस में छह लोगों ने बेरहमी से गैंगरेप किया था. इस भयानक हमले के दौरान, उसे और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा गया. उन्होंने पीड़िता के शरीर के अंदर बाहरी सामान डाला, जिससे उसे आंतरिक चोटें आईं. 29 दिसंबर, 2012 को सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया और देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए. नतीजतन भारत सरकार ने बलात्कार विरोधी कानूनों को कड़ा करने के लिए जस्टिस वर्मा कमेटी का गठन किया, जिसके कारण आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2013 पारित हुआ और फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना हुई. मामले के छह आरोपियों में से एक ने जेल में आत्महत्या कर ली, एक नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया गया और चार मुख्य दोषियों को मार्च 2020 में फांसी दे दी गई.

यह मामला आज भी महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था में सुधार का प्रतीक माना जाता है. हालांकि आंकड़े कुछ और ही तस्वीर बयां करते हैं. हर दिन महिलाएं इस हैवानियत का शिकार होती है. ये तो कुछ वो मामले थे जो हम तक पहुंच पाए, लेकिन हर दिन करीब 80 महिलाओं के बारे में हम जान नहीं पाते. आज भी पीड़िताएं न्याय मिलने का इंतजार रही हैं और पुरुष उन्हें वस्तु समझकर शोषण.

हर 92 मिनट में एक बेटी की मौत, दहेज हत्या की लिस्ट में ये राज्य हैं सबसे आगे, आधे से ज्यादा मामलों में नहीं होती सजा

News Source: NCRB

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