CWG 2026: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 11 दिनों के शानदार कड़ी प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम के बाद रविवार को राष्ट्रमंडल खेलों का समापन हो गया. एक भव्य समारोह के साथ यादगार समापन में अगले आयोजन के लिए भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स की कमान मिली हैं.
जी हां, ओवीओ हाइड्रो में रविवार को हुए समापन समारोह का भावनात्मक केंद्रबिंदु वह क्षण था जब ग्लासगो ने औपचारिक रूप से राष्ट्रमंडल खेलों की कमान भारत को सौंपी, जिसके बाद संगीत, नृत्य और कहानी कहने के शानदार प्रदर्शन ने भारत की पहचान को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत किया जहां परंपरा और आधुनिकता सह-अस्तित्व में हैं. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का सफर भी शानदार रहा. देश के खाते में कुल 39 मेडल आएं हैं.
39 मेडल के साथ अंक तालिका में चौथे स्थान पर भारत
कुल 39 मेडल के साथ भारत ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की अंक तालिका में चौथे स्थान पर रहा है. इन 39 मेडलों में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. कुल 170 मेडल के साथ ऑस्ट्रेलिया पहले स्थान पर रहा. इसके खाते में 70 गोल्ड, 45 सिल्वर और 55 कांस्य पदक आए.
दूसरे स्थान पर इंग्लैंड रहा. इसके खाते में 29 गोल्ड, 45 सिल्वर और 36 ब्रॉन्ज समेत कुल 110 मेडल आए. तीसरे स्थान पर कनाडा रहा. इसके खिलाड़ियों ने अपने देश के लिए 19 गोल्ड, 20 सिल्वर और 23 ब्रॉन्ज मेडल जीते. पांचवें स्थान पर मेजबान स्कॉटलैंड रहा. इसके खाते में 13 गोल्ड, 9 सिल्वर और 17 ब्रॉन्ज समेत कुल 39 मेडल आए.
भारत को मिली 2030 की कमान
न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्कॉटलैंड और भारत के झंडे लिए ध्वजवाहकों के नेतृत्व में जुलूस ने मुड़े हुए खेलों के ध्वज को नीचे उतारा. ग्लासगो की लॉर्ड प्रोवोस्ट जैकलीन मैकलारेन ने इसे कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड की उपाध्यक्ष सुसान जैक्सन, स्कॉटिश नेटबॉल खिलाड़ी एमिली निकोल, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट्स के अध्यक्ष डॉ. डोनाल्ड रुकारे, दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा, भारतीय ओलंपिक संघ की अध्यक्ष पीटी उषा और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी को सौंप दिया. इसके साथ ही मेजबानी की जिम्मेदारी आधिकारिक तौर पर स्कॉटलैंड से भारत को हस्तांतरित हो गई.
भारत 2030 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा. इसका आयोजन गुजरात के शहर अहमदाबाद में होगा. बता दें कि इससे पहले भारत ने राजधानी दिल्ली में साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी.
समापन समारोह में भारत-स्कॉटिश संस्कृतियों की ‘जुगलबंदी’
बता दें कि 11 दिनों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद, ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों का समापन रविवार को एक भव्य समारोह में हुआ, जिसमें शताब्दी संस्करण के मेजबान भारत को ध्वज और कमान सौंपी गई. इस समापन समारोह की शुरुआत स्कॉटलैंड की सांस्कृतिक बारीकियों को प्रदर्शित करने के साथ हुई, लेकिन जल्द ही यह भारत की सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपरा के जीवंत प्रदर्शन में परिवर्तित हो गया.
इस शो में भारत-स्कॉटिश संस्कृतियों की ‘जुगलबंदी’ भी देखने को मिली, जिसमें संगीतकारों और नर्तकों ने अपने कौशल का एक आकर्षक प्रदर्शन किया. समारोह में भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का भी स्मरणोत्सव मनाया गया, जिसमें अभिनेत्री मानुषी छिल्लर के नेतृत्व में एक भव्य नृत्य प्रस्तुति दी गई.
वहीं, शंकर महादेवन अपने बेटों सिद्धार्थ और शिवम महादेवन के साथ एक संगीत कार्यक्रम के लिए मंच पर लौटे, जिसमें भारत के कुछ सबसे ज्यादा पहचाने जाने वाले गाने शामिल थे, जिनमें “सुनो गौर से दुनिया वालों, भाग मिल्खा, ऐ वतन वतन और लहरा दो” शामिल थे.
News Source: PTI
