Russia Election: रूस में 18 सितंबर से शुरू हुआ तीन दिवसीय संसदीय चुनाव रविवार को खत्म हो गया. यह 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद रूस में हुआ पहला संसदीय चुनाव है. चुनाव में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की पार्टी यूनाइटेड रशिया का दबदबा बरकरार रहने की उम्मीद जताई जा रही है. चुनाव में पुतिन की नीतियों के खिलाफ वास्तविक राजनीतिक चुनौती काफी सीमित रही और क्रेमलिन समर्थक दलों का प्रभाव स्पष्ट नजर आया. चुनाव का आखिरी दिन ऐसे समय में आया, जब यूक्रेन ने रूस पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए. रूसी अधिकारियों के अनुसार, रातभर में 1000 से अधिक ड्रोन को मार गिराया गया, जिनमें बड़ी संख्या मॉस्को और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर भेजे गए थे. वहीं, रूस में मतदान शुक्रवार से शुरू हुआ था और 11.1 करोड़ योग्य मतदाताओं के बीच मतदान बढ़ाने के लिए ऑनलाइन वोटिंग को भी बढ़ावा दिया गया. इस चुनाव में पहली बार यूक्रेन के उन चार क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भी मतदान कराया गया, जिन्हें रूस ने 2022 में अपने कब्जे में लेकर विलय का दावा किया था. हालांकि, इन क्षेत्रों पर रूस का पूर्ण नियंत्रण नहीं है. इसके अलावा क्रीमिया में भी मतदान कराया गया. रूस ने 2014 में क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था, लेकिन यूक्रेन और अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे यूक्रेन का हिस्सा मानते हैं. यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने कब्जे वाले क्षेत्रों में कराए जा रहे रूसी चुनाव को अवैध बताया है.

EU ने बताया- अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन
वहीं, कीव के अधिकारियों ने रूस के कब्जे वाले इलाकों में हो रही वोटिंग को गैर-कानूनी बताया और विदेशी सरकारों से नतीजों को मान्यता न देने की अपील की. दूसरी ओर शुक्रवार को यूरोपीय संघ ने इस कदम को ‘अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन’ करार दिया. क्रेमलिन चाहता है कि 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमले के बाद रूस में ये पहला संसदीय चुनाव है, जिसका अधिक से अधिक लोगों को समर्थन करना चाहिए. उसने किसी भी तरह के विरोध को दबाकर राजनीतिक जोखिमों से बचने की कोशिश की है. सरकारी मीडिया का जबरदस्त अभियान और असली विपक्ष की गैर-मौजूदगी में चुनाव पर कड़ा नियंत्रण यह लगभग पक्का कर देता है कि क्रेमलिन रूसी राजनीति पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखेगा. भले ही आर्थिक लागत बढ़ रही हो और देश के अंदरूनी इलाकों में यूक्रेनी ड्रोन हमले बढ़ रहे हों. वोटर दो अलग-अलग वोट डालते हैं. वे बैलेट पर दी गई राजनीतिक पार्टियों को चुनकर ड्यूमा की 450 में से आधी सीटें भरते हैं. बाकी सीटों के लिए सिंगल-सीट वाले निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होता है, जहां वोटर अलग-अलग उम्मीदवारों को चुनते हैं. देश के पश्चिमी हिस्से में वोटिंग खत्म होने के कुछ ही घंटों के भीतर शुरुआती नतीजे आने की उम्मीद है.
छोटी पार्टियां भी दे सकती हैं क्रेमलिन को समर्थन
क्रेमलिन की मुख्य पार्टी ‘यूनाइटेड रशिया’ के निचले सदन ‘स्टेट ड्यूमा’ पर अपना भारी दबदबा बनाए रखने की पूरी उम्मीद है. विपक्ष की कई छोटी पार्टियां, जो सभी अहम मुद्दों पर पुतिन की राय के साथ मिलकर वोट करती हैं उनका भी समर्थन करने की उम्मीद है. वहीं, युद्ध की खुलकर आलोचना करने वाली एकमात्र रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टी ‘लिबरल याब्लोको पार्टी’ को सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने ही बैलेट से हटा दिया था. अब सिंगल-कॉन्स्टिट्यूएंसी के चुनावों में उसके बस कुछ ही उम्मीदवार बचे हैं. इसके अलावा युद्ध-विरोधी कुछ नेताओं को कैंपेन शुरू होने से पहले ही जेल में डाल दिया गया या देश छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया गया. याब्लोको और कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकारी खुली आलोचना तो की है लेकिन वह राष्ट्रपति पुतिन की खुली आलोचना से हमेशा बचते रहे हैं. इसी बीच दोनों पार्टियों का कहना है कि उनके कई ऑब्जर्वर्स को पोलिंग स्टेशनों से वापस भेज दिया गया. रूस ने ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (OSCE) के ऑब्जर्वर्स को नहीं बुलाया. रूसी विदेश मंत्रालय ने इस संस्था पर रूस की आलोचना करने के लिए दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. OSCE की पार्लियामेंट्री असेंबली के प्रेसिडेंट पेरे जोन पोंस ने कहा कि यह फैसला ऑर्गनाइजेशन के सदस्य देश के तौर पर रूस की प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन है.

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एक ऑब्जर्वर हो गया था बेहोश
याब्लोको ने बताया कि शनिवार को सेंट पीटर्सबर्ग के एक पोलिंग स्टेशन पर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के दौरान उनका एक ऑब्जर्वर बेहोश हो गया था. अधिकारियों ने उस पर ‘चुनाव में बाधा डालने’ की कोशिश का आरोप लगाया था और पुलिस को बुलाया था. इसी बीच पार्टियों ने नियमों के उल्लंघन की शिकायतें कीं थी, जिनमें मुख्य रूप से सील किए गए बैलेट बॉक्स का खोला जाना, रात भर पोलिंग स्टेशनों के दरवाजों का सुरक्षित न होना और पेपर बैलेट जारी करने से इनकार करना शामिल है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. रूस के कब्जे वाले हिस्से डोनेट्स्क इलाके में एक पोलिंग स्टेशन पर वोटर्स ने एक बॉक्स में अपने बैलेट डाले, जबकि पास ही हथियारों से लैस एक रूसी सैनिक खड़ा होकर उन्हें देख रहा था. रूस के सेंट्रल इलेक्शन कमीशन की प्रमुख एला पमफिलोवा ने रविवार को कहा कि मास्को में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम को साइबर हमलों का निशाना बनाया गया.

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एक स्वतंत्र रूसी समाचार आउटलेट ‘सोटाविजन’ ने रविवार को बताया कि मास्को भर के पोलिंग स्टेशनों पर वोटर इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्री सिस्टम में गड़बड़ी की शिकायत कर रहे थे. आउटलेट ने टेलीग्राम पर बताया कि लोगों को पेपर बैलेट नहीं दिए गए और इसके बजाय उन्हें इलेक्ट्रॉनिक टर्मिनल के जरिए वोट करने के लिए कहा गया. दिवंगत रूसी विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी के करीबी सहयोगी लियोनिद वोल्कोव ने कहा कि मास्को में पेपर बैलेट जारी करने वाले सिस्टम में कथित खराबी जानबूझकर की गई हो सकती है, लेकिन वोटरों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की ओर धकेला जा सके.
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पुतिन के विरोधियों ने वोट डालने की अपील की
लियोनिद वोल्कोव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि पेपर बैलेट की मांग करें! समर्थकों से पार्टी-लिस्ट बैलेट को खराब करने का आग्रह करने के बाद याब्लोको पार्टी के नेता निकोलाई रिबाकोव ने रविवार को सेंट पीटर्सबर्ग में वोट डाला. उनके बैलेट पर चमकीले हरे रंग से ‘आजादी के लिए, शांति के लिए और याब्लोको’ लिखा हुआ था. एलेक्सी नवलनी की पत्नी यूलिया नवलनाया ने रविवार को दोपहर के समय युद्ध-विरोधी रूसियों से वोट डालने की अपील की. इस दौरान आर्मेनिया में रहने वाले हज़ारों रूसियों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. रविवार को राजधानी येरेवन में रूसी दूतावास के बाहर रूसी नागरिक शांतिपूर्ण रूस के लिए दोपहर नाम के युद्ध-विरोधी प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कतार में खड़े हुए. कुछ लोगों के हाथों में युद्ध-विरोधी और पुतिन-विरोधी पोस्टर थे. जर्मनी में वोटरों ने बर्लिन स्थित रूसी दूतावास में अपने वोट डाले. रूसी असंतुष्ट और ‘ओपन रशिया’ ग्रुप के पूर्व प्रमुख आंद्रे पिवोवारोव ने इमारत के बाहर जमा हुए प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया.

लाखों घरों तक युद्ध पहुंचा दिया
दूसरी ओर चुनाव के आखिरी दिन यूक्रेन ने बड़ा हमला कर दिया. रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि उसकी सेना ने रूस कब्जे वाले क्रीमिया और काला सागर के ऊपर कुल 1110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए. वहीं, स्थानीय गवर्नर आंद्रे वोरोब्योव ने बताया कि मास्को के आस-पास के इलाके में दो लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हो गए. यह चुनाव यूक्रेन द्वारा तेल रिफाइनरियों पर लंबी दूरी के ड्रोन हमलों के बाद हो रहा है, जिनकी वजह से बड़े पैमाने पर ईंधन का संकट पैदा हो गया था. ऑनलाइन रिटेलर वाइल्डबेरीज़ (Wildberries) और ओजोन (Ozon) के गोदामों पर भी हमले हुए थे. इन हमलों ने आर्थिक समस्याओं को और बढ़ा दिया है और लाखों लोगों के लिए युद्ध को उनके घर तक पहुंचा दिया है.
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