Asian Games Winners: आज एशियन गेम्स 2026 का पहला दिन है और भारत की बेटियों ने पहले ही दिन देश का नाम रौशन कर दिया. जापान के नागोया में आयोजित एशियन गेम्स में भारत की महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मेडल के साथ अपने शूटिंग कैंपेन की शुरुआत की. महिलाओं के 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट में एलावेनिल वलारिवन, सोनम उत्तम मस्कर और विदर्शा विनोद की तिगड़ी ने मिलकर भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता. इसके बाद एलावेनिल ने इंडिविजुअल इवेंट में एक और सिल्वर मेडल जीता, जिससे भारत की झोली में पहले ही दिन दो सिल्वर मेडल आ गए. वहीं दूसरी तरफ 36 साल की सुचिका तारियाल ने महिलाओं की ट्रेडिशनल मिक्स मार्शल आरट्स (MMA) 60kg कैटेगरी के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक और मेडल पक्का कर दिया.
तिगड़ी ने किया कमाल
भारत का शूटिंग कैंपेन महिलाओं के 10m एयर राइफल टीम इवेंट से शुरू हुआ. एलावेनिल वलारिवन, सोनम उत्तम मस्कर और विदर्शा विनोद ने बेहतरीन सामंजस्य के साथ शूटिंग की, जिससे भारत को सिल्वर मेडल मिला. भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन में कुल 1898.0 पॉइंट्स बनाए और दूसरे स्थान पर रही. चीन ने 1904.2 पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता. वहीं जापान 1897.1 पॉइंट्स के साथ तीसरे स्थान पर रहा. भारत के लिए सोनम उत्तम मस्कर ने 634.1 पॉइंट्स के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया. एलावेनिल ने 633.5 पॉइंट्स बनाए, जबकि विदर्शा विनोद ने 630.4 पॉइंट्स बनाए.
टीम इवेंट में, तीनों एथलीट्स के स्कोर को मिलाया जाता है. इसलिए हर एथलीट का हर शॉट टीम के लिए बहुत जरूरी माना जाता है. यह पल विदर्शा के लिए और भी खास था, क्योंकि यह उनका पहला एशियन गेम्स था. हालांकि वह इंडिविजुअल फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाईं, लेकिन टीम के सिल्वर मेडल में उनका योगदान बहुत जरूरी था. उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी उपलब्धि थी और टीम के लिए सिल्वर मेडल की शुरुआत ने भविष्य के कॉम्पिटिशन के लिए उनका कॉन्फिडेंस और बढ़ा दिया है.
एलावेनिल वलारिवन ने जीते डबल सिल्वर
टीम इवेंट में सिल्वर जीतने के बाद, एलावेनिल वलारिवन ने इंडिविजुअल इवेंट में भी भारत के लिए एक और सिल्वर जीता. इंडिविजुअल 10 मीटर एयर राइफल फाइनल में एलावेनिल काफी समय तक गोल्ड की रेस में सबसे आगे रहीं. 17वें शॉट के बाद, उन्होंने साउथ कोरिया की बान ह्यो-जिन पर 1.4 पॉइंट की बढ़त बना ली थी. 21वें शॉट के बाद भी, वह जापान की हिनाता ताइची से 0.2 पॉइंट आगे थीं. लेकिन आखिरी कुछ शॉट बहुत रोमांचक हो गए और अंतर लगातार कम होता गया. आखिरकार एलावेनिल ने 252.4 पॉइंट के साथ सिल्वर जीता. जापान की हिनाता ताइची ने 253.0 पॉइंट के साथ गोल्ड जीता. बान ह्यो-जिन ने 230.4 पॉइंट के साथ ब्रॉन्ज जीता.

एशियन गेम्स में यह एलावेनिल का पहला इंडिविजुअल मेडल है. इससे पहले उन्होंने 2018 जकार्ता और 2022 हांग्जो एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, लेकिन इंडिविजुअल पोडियम तक नहीं पहुंच पाई थीं. एलावेनिल ने माना कि कमांडिंग पोजीशन में होने की वजह से शायद उनका कॉन्संट्रेशन थोड़ा कम हुआ होगा. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मुझे पता था कि मैं कहीं न कहीं टॉप तीन में थी और हालांकि मैं अपने प्रोसेस और अपनी टेक्निक पर वापस फोकस कर रही थी, लेकिन मैं थोड़ी रिलैक्स हो गई थी. मुझे सच में अपने फाइनल्स पर और काम करने की जरूरत है. मुझे लगा कि मैंने अपना बेस्ट दिया और मुझे खुशी है कि मैंने सिल्वर जीता.” एलावेनिल पिछले एक साल से शानदार प्रदर्शन कर रही हैं. उन्होंने 2025 एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर जीता और नई दिल्ली में 2026 एडिशन में भी यही कमाल दोहराया.
विदर्शा विनोद के यादगार बना मुकाबला
केरल की 27 साल की विदर्शा विनोद के लिए ये एशियन गेम्स कई तरह से खास हैं. यह उनका पहला एशियन गेम्स है और वह एशियन गेम्स में शूटिंग में मेडल जीतने वाली महिला भी बन गई हैं. उन्होंने 10m एयर राइफल टीम इवेंट में भारत के लिए सिल्वर मेडल जीता. विदरसा ने 2018 में अपनी NCC ट्रेनिंग के दौरान शूटिंग शुरू की थी. अगले साल, उन्होंने इसे एक प्रोफेशन के तौर पर अपनाने का फैसला किया. उनकी ज्यादातर ट्रेनिंग दिल्ली में हुई है. उन्होंने बताया कि शादी के बाद भी, उन्होंने ट्रेनिंग जारी रखी और रेगुलर इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया.

उनका मानना है कि अपने माता-पिता, पति, परिवार और कोच के सपोर्ट के बिना यह कामयाबी हासिल करना आसान नहीं होता. उन्होंने कहा कि उनके परिवार और कोच के सपोर्ट ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की. विदर्शा अब अपने अगले कॉम्पिटिशन पर फोकस करेंगी. भविष्य में वह महिलाओं के 50m राइफल 3 पोजीशन इवेंट में भी हिस्सा लेंगी.
12 साल की उम्र में शुरु हुआ सुचिका का सफर
शूटिंग में भारत की बेटियों के शानदार प्रदर्शन के बीच, MMA से एक और बड़ी खबर आई. 36 साल की सुचिका तारियाल ने महिलाओं के पारंपरिक MMA 60kg इवेंट के सेमी-फाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक और मेडल पक्का कर दिया. लेकिन सुचिका ने यह सफर सिर्फ कुछ सालों पहले नहीं शुरु हुआ था, बल्कि वह इसे 12 साली की उम्र से जी रही हैं. जब वे 12 साल की थी, तब उनके साथ छेड़खानी हुई थी. उस घटना के बाद, उन्होंने ठान लिया कि उन्हें लड़ना सीखना है. इसी सोच के साथ उन्होंने जूडो खेलना शुरू किया.
रोहतक के एक साधारण और पुराने ख्यालों वाले परिवार से होने के कारण, प्रतिस्पर्था वाले खेल में आना आसान नहीं था. कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेना और लगातार घर से दूर रहना उनके परिवार के लिए चिंता की बात थी. लेकिन सुचिका ने हार नहीं मानी. उन्होंने पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में और बाद में पालम के दादा देव मंदिर सेंटर में ट्रेनिंग ली. इसके बाद उन्होंने SAI भोपाल में अपनी स्किल्स को और बेहतर किया.

जूडो से जिउ-जित्सु और फिर MMA
जूडो ने सुचिका के करियर की नींव रखी. उन्होंने भारत के लिए 20 से ज्यादा इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में हिस्सा लिया और आठ बार नेशनल चैंपियन बनीं. 2019 में उन्होंने कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप और साउथ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीते. उससे पहले, उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता था. उन्होंने कई एशियन जूडो चैंपियनशिप में भारत को रिप्रेजेंट किया. 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में, उन्होंने महिलाओं की 57kg कैटेगरी में हिस्सा लिया और पोडियम से बहुत कम अंतर से चूक गईं. सुचिका के लिए, जूडो सिर्फ एक खेल नहीं था. इसने उन्हें दूसरे कॉम्बैट स्पोर्ट्स तक पहुंचाया.
जूडो के बाद, सुचिका ने जिउ-जित्सु में कदम रखा और वहां भी अपना नाम बनाया. उन्होंने 2024 JJIF जू-जित्सु वर्ल्ड चैंपियनशिप में एडल्ट्स जू-जित्सु कॉन्टैक्ट फीमेल 63kg कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता. MMA में उनका सफर भी नया नहीं है. उन्होंने 2017 में MMA में डेब्यू किया और अपना पहला बाउट जीता. इसके बाद, उन्होंने लगभग सात साल तक MMA से ब्रेक लिया और जूडो और जिउ-जित्सु में अपना करियर जारी रखा. 2024 में, वह प्रोफेशनल MMA में लौटीं. उन्होंने BRAVE कॉम्बैट फेडरेशन के साथ एक मल्टी-फाइट कॉन्ट्रैक्ट साइन किया और दिसंबर 2024 में बहरीन में BRAVE CF 92 में जीत के साथ अपनी वापसी की. इसके बाद, उन्होंने पहली और दूसरी MMA-SFI नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने जनवरी और मई 2026 में हुई तीसरी और चौथी एशियन मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता.
छह हफ्ते की तैयारी और कोच का सपोर्ट
एशियन गेम्स की तैयारी के लिए, सुचिका ने मुंबई में छह हफ्ते का ट्रेनिंग कैंप अटेंड किया. इस दौरान उनके कोच, निखिल और सुशोभन ने उनकी टेक्निक और गेम प्लान पर काम किया. सुचिका ने बताया कि मुंबई में ट्रैवल और ट्रैफिक की मुश्किलों के बावजूद, उनके कोच ने उनके आने का इंतजार किया और पक्का किया कि वह अपनी ट्रेनिंग पूरी करें. उन्होंने यह भी कहा कि उनके कोच और टीममेट्स ने पूरी ट्रेनिंग के दौरान उनका सपोर्ट किया. उन्होंने तैयारी में कोई कमी नहीं आने दी.
12 साल की सुचिका का जूडो का सफर, जो सेल्फ-डिफेंस के तौर पर शुरू हुआ था अब 24 साल बाद एशियन गेम्स के पोडियम तक पहुंच गया है. जूडो, जिउ-जित्सु और MMA के लंबे सफर के बाद, सुचिका के पास अब अपने करियर में एक और बड़ा मुकाम हासिल करने का मौका है.
ब्रॉन्ज को गोल्ड में बदलने का मौका
सुचिका ने मंगोलिया की अल्तानखिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर आइची-नागोया एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में जगह बनाई. पारंपरिक MMA में स्ट्राइकिंग, टेकडाउन, ग्रैपलिंग और ग्राउंड फाइटिंग जैसी टेक्नीक का इस्तेमाल होता है. 60kg कैटेगरी में 60kg से कम वजन वाले फाइटर शामिल होते हैं. सुचिका ने वही स्ट्रैटेजी अपनाई जो उन्होंने अपने पूरे कॉम्बैट स्पोर्ट्स करियर में प्रैक्टिस की है. उनके गेम प्लान में टेकडाउन, ग्राउंड एंड पाउंड और अगर ज़रूरी हो तो सबमिशन या लॉक के साथ बाउट खत्म करना शामिल था. अपनी जीत के बाद, उन्होंने कहा कि देश के लिए मेडल पक्का करना उनके लिए एक शानदार पल था, लेकिन अब उनकी नजर गोल्ड पर है. सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ, सुचिका का ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया है. अब उनके पास इसे गोल्ड में बदलने का मौका है. एशियन गेम्स के पहले दिन जिस तरह से भारत की बेटियों ने शूटिंग में दो सिल्वर मेडल और MMA में पक्का मेडल हासिल किया, उसने भारतीय स्पोर्ट्स कैंपेन की शुरुआत को खास बना दिया है.
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News Source:PTI
