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IRCTC घोटाला: CBI ने दिल्ली HC में कहा- मंजूरी के अभाव में मुकदमे से नहीं बच सकते लालू और परिवार

by Sanjay Kumar Srivastava
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IRCTC घोटाला: CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा- मंजूरी के अभाव में मुकदमे से नहीं बच सकते लालू और परिवार

IRCTC Scam Case: दिल्ली उच्च न्यायालय में भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) घोटाले की सुनवाई के दौरान CBI ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव केवल तकनीकी आधार पर मुकदमे से बच नहीं सकते.

IRCTC Scam Case: दिल्ली उच्च न्यायालय में बुधवार को भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) घोटाले की सुनवाई के दौरान CBI ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव केवल तकनीकी आधार पर मुकदमे से बच नहीं सकते. केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि संज्ञान के समय अभियोजन मंजूरी का न होना मुकदमे को रोकने का आधार नहीं है. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) डीपी सिंह ने न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा के समक्ष तर्क दिया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 के तहत इन याचिकाकर्ताओं पर मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी लेना अनिवार्य नहीं था. उन्होंने पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की 2020 की राय का हवाला देते हुए कहा कि मामले में देरी से बचने के लिए कानून के दायरे में रहते हुए बाद में मंजूरी ली गई थी. CBI का मुख्य तर्क यह था कि कोई पूर्वाग्रह नहीं है. मंजूरी उस समय ली गई जब धारा 207 के तहत प्रक्रिया चल रही थी, जिससे आरोपियों के अधिकारों का कोई हनन नहीं हुआ.

CBI ने कोर्ट में रखा अपना पक्ष

सीबीआई ने कहा कि मंजूरी बाद में भी ली जा सकती है और इससे पूरी कानूनी कार्यवाही शून्य नहीं हो जाती. सीबीआई ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि संज्ञान के वक्त मंजूरी फाइल पर नहीं थी, यादव परिवार को मुकदमे से छूट नहीं दी जा सकती. यह दलीलें यादव परिवार द्वारा निचली अदालत के ‘आरोप तय करने’ के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं के विरोध में दी गईं. अब अदालत को तय करना है कि क्या मंजूरी के समय को आधार बनाकर कार्यवाही को रद्द किया जा सकता है या ट्रायल जारी रहेगा. 13 अक्टूबर, 2025 को एक निचली अदालत ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 11 अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के अपराधों के लिए आरोप तय किए. लालू, राबड़ी देवी और तेजस्वी ने कहा है कि निचली अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19 या सीआरपीसी की धारा 197 के तहत मंजूरी के अभाव में संज्ञान लिया.

धोखाधड़ी के लिए अधिकतम सजा सात वर्ष

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 197 के तहत संज्ञान का मुद्दा विचाराधीन है. निचली अदालत ने प्रदीप कुमार गोयल, राकेश सक्सेना, भूपेंद्र कुमार अग्रवाल, राकेश कुमार गोगिया और विनोद कुमार अस्थाना के खिलाफ भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) के साथ धारा 13(1)(घ)(ii) और (iii) के तहत आरोप तय किए थे. धारा 13(2) लोक सेवक द्वारा आपराधिक दुराचार के लिए दंड से संबंधित है. लोक सेवक द्वारा पद का दुरुपयोग करके लाभ प्राप्त करने के आरोप में धारा 13(1)(घ)(ii) और (iii) के तहत मामला दर्ज किया गया है. न्यायालय ने लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, तेजस्वी, मेसर्स लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी, विजय कोचर, विनय कोचर, सरला गुप्ता और प्रेम चंद गुप्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय करने का भी निर्देश दिया था. भ्रष्टाचार विरोधी कानून के तहत अधिकतम सजा 10 वर्ष है, जबकि धोखाधड़ी के लिए अधिकतम सजा सात वर्ष है.

ये भी पढ़ेंः सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: दिल्ली HC तीन महीने में पूरा करे सेंगर की अपील पर फैसला, 17 फरवरी तक टली…

News Source: Press Trust of India (PTI)

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