Marathi Exam: महाराष्ट्र में 1 मई से राज्य के सभी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होगा.
Marathi Exam: महाराष्ट्र में 1 मई से राज्य के सभी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होगा. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि इस नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए महाराष्ट्र के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. जो ड्राइवर मराठी नहीं बोल पाएंगे, उन्हें वाहन चलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी. फैसले से नाराज ऑटोरिक्शा चालकों का प्रतिनिधित्व करने वाले ट्रेड यूनियनों ने 4 मई से राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने की धमकी दी है.
सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
उधर, शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार से ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए अनिवार्य मराठी भाषा परीक्षा आयोजित करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को लिखे एक पत्र में निरुपम ने सुझाव दिया कि जो चालक टूटी-फूटी या कामकाजी मराठी बोल सकते हैं, उन्हें इस कड़े नियम से छूट दी जानी चाहिए. सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा होने के नाते निरुपम ने इस मुद्दे को मानवीय आधार पर देखने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि मराठी भाषा के प्रति सम्मान और गर्व हर नागरिक के दिल में है, लेकिन भाषा प्रेम को एक कठोर ढांचे या परीक्षा के रूप में थोपना हजारों मेहनती ड्राइवरों की आजीविका के लिए हानिकारक साबित हो सकता है.
RTO को कड़ाई बरतने के निर्देश
निरुपम के अनुसार, प्यार से सिखाई गई भाषा दिल में उतरती है, जबकि थोपी गई भाषा केवल डर पैदा करती है. गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने घोषणा की थी कि 1 मई से राज्य के सभी ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना अनिवार्य होगा. इस नियम को कड़ाई से लागू करने के लिए महाराष्ट्र के सभी 59 क्षेत्रीय परिवहन कार्यालयों (RTO) को विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं. निरुपम ने तर्क दिया कि कई ड्राइवर ऐसे हैं जिनकी मातृभाषा मराठी नहीं है. ऐसे में अनिवार्य परीक्षा और भाषा की शुद्धता की शर्त उनके काम को प्रभावित कर सकती है. उन्होंने मांग की कि सरकार को भाषा के संरक्षण और ड्राइवरों के रोजगार के बीच संतुलन बनाना चाहिए.
रोजगार पर छाया संकट
अब देखना यह होगा कि क्या राज्य सरकार इस अपील को स्वीकार कर 1 मई से लागू होने वाले नियमों में कोई ढील देती है या नहीं. निरुपम ने कहा कि इस फैसले ने मेहनती ड्राइवरों के बीच भय और असुरक्षा की भावना पैदा की है. मुंबई जैसे बहुसांस्कृतिक महानगर में 70 प्रतिशत से अधिक ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं. शिवसेना नेता ने कहा कि उन्होंने कड़ी मेहनत के जरिए शहर में अपनी जगह बनाई है, ईमानदारी से अपने परिवारों की आजीविका का समर्थन किया है और मुंबई की तेज रफ्तार जीवनशैली को बढ़ावा दिया है. ऐसे समय में यह निर्णय उनके रोजगार पर लटकती तलवार की तरह है. निरुपम ने कहा कि ऑटोरिक्शा और टैक्सी चालकों के दिलों में डर और असंतोष बढ़ रहा है और मुंबई की दैनिक परिवहन प्रणाली में व्यवधान का खतरा पैदा हो गया है.
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News Source: PTI
