India-Maldives: भारत ने हमेशा ही पड़ोसी होने का फर्ज निभाया है. इस बार भी कुछ ऐसा ही दिखा. दरअसल, मालदीव की इकोनॉमी के डूबते जहाज को सहारा देने के लिए भारत ने अपना खज़ाना खोल दिया है.
24 April, 2026
पड़ोसी पहले की अपनी नीति को निभाते हुए भारत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो मालदीव का सबसे भरोसेमंद दोस्त है. दरअसल, भारत सरकार ने मालदीव की इकोनॉमी को सहारा देने के लिए सार्क (SAARC) करेंसी स्वैप फ्रेमवर्क के तहत 30 अरब रुपये यानी लगभग 3000 करोड़ रुपये की पहली निकासी को मंजूरी दे दी है. ये कदम ऐसे टाइम में लिया गया है जब मालदीव को अपनी फाइनेंशियल सिचुएशन को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा की बहुत ज्यादा जरूरत थी.
मुइज़ू की दिल्ली यात्रा
इंडियन हाई कमिशन की जानकारी के मुताबिक, इस फंड को जारी करने का फैसला अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू की नई दिल्ली यात्रा के दौरान लिया गया था. उस टाइम भारतीय रिजर्व बैंक और मालदीव सरकार के बीच इस करेंसी स्वैप समझौते पर साइन हुए थे. मालदीव ने अक्टूबर 2024 में इसी फ्रेमवर्क के तहत जो 400 मिलियन डॉलर की राशि ली थी, उसकी टाइम लिमिट अब पूरी हो गई थी, जिसे अब नए फंड के जरिए मैनेज किया गया है.
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टाइम पर चुकाया कर्ज
मालदीव के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि 400 मिलियन डॉलर की सुविधा का टाइम पर निपटान करना उनकी सरकार की फाइनेंशियल कमिटमेंट्स को दिखाता है. मालदीव के अखबार ‘सन ऑनलाइन’ के मुताबिक, सरकार अपनी इंटरनेशनल लेन-देन को लेकर काफी सीरियस है. आपको बता दें कि भारत ने साल 2012 में सार्क स्वैप फ्रेमवर्क की शुरुआत की थी और तब से लेकर अब तक आरबीआई ने मालदीव को कुल 1.1 बिलियन डॉलर की स्वैप सहायता दी है.
सबसे पहले याद आता है भारत
भारत हमेशा से मालदीव के लिए ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ रहा है, यानी किसी भी मुसीबत में सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाने वाला देश. पिछले साल भी जब मालदीव ने इमरजेंसी फाइनेंशियल हेल्प की गुहार लगाई थी, तब भारत ने उनके 100 मिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिलों को रोल-ओवर कर दिया था. भारतीय मिशन ने जोर देकर कहा कि मालदीव भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘सागर’ विजन का एक अहम हिस्सा है. वैसे, करेंसी स्वैप की ये फेसिलिटी मालदीव जैसे छोटे देश के लिए फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को स्टेबल रखने और इंटरनेशनल बिजनेस को सही तरीके से चलाने में संजीवनी का काम करती है.
News Source: PTI
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