Municipal Elections: झारखंड में नगर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही राज्य भर में 48 शहरी स्थानीय निकायों के आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं.
Municipal Elections: झारखंड में नगर निकाय चुनाव का बिगुल फूंक गया है. नगर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही राज्य भर में 48 शहरी स्थानीय निकायों के आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं. नगर निगम चुनाव 23 फरवरी को होंगे और मतगणना 27 फरवरी को होगी. झारखंड में शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव पार्टी चिह्नों पर नहीं लड़े जाते हैं, बल्कि उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों का समर्थन प्राप्त होता है. JMM, कांग्रेस और भाजपा सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दल नगर निगम चुनावों में किन उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे, इस पर निर्णय लेने और महापौर व अध्यक्ष जैसे नगर निकायों के शीर्ष पदों के लिए गठबंधन बनाने पर विचार कर रहे हैं. भाजपा फिलहाल सभी सीटों के लिए तैयारी कर रही है. यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि हर सीट पर एनडीए से केवल एक ही उम्मीदवार चुनाव लड़े. अगर ऐसा नहीं हो पाता है, तो भाजपा अकेले चुनाव लड़ेगी. पार्टी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने पीटीआई को बताया कि सभी 48 शहरी स्थानीय निकायों में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. सत्तारूढ़ JMM के नेतृत्व वाले गठबंधन के घटक दल भी अपने समर्थन के लिए उम्मीदवारों का चयन कर रहे हैं.
सहयोगी दलों से चर्चा का स्वागतः JMM
झारखंड कांग्रेस की प्रवक्ता सोनल शांति ने कहा कि नगर निकाय चुनावों के लिए हमारे सहयोगियों के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है. हर वार्ड में सत्तारूढ़ गठबंधन से एक उम्मीदवार उतारना अव्यावहारिक है. हम शीर्ष पदों के लिए गठबंधन पर चर्चा कर सकते हैं. हमारे अध्यक्ष केशव महतो कमलेश दिल्ली में हैं. उनके आने पर इस पर चर्चा हो सकती है. जेएमएम के प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि अगर हमारे सहयोगी दलों द्वारा कोई चर्चा प्रस्तावित की जाती है, तो हम उसका स्वागत करेंगे. फिलहाल, पार्टी अपनी पसंद के उम्मीदवारों का समर्थन करने के लिए अलग से तैयारी कर रही है. जिला स्तर पर उम्मीदवारों का चयन जारी है. आरजेडी ने भी नगर निकाय चुनावों के संदर्भ में कांग्रेस और जेएमएम की आवाज़ को दोहराया.
EVM नहीं, Ballot Paper में कैद होगा भाग्य
जेएमएम के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन की घटक कांग्रेस और मुख्य विपक्षी भाजपा ने सरकार से नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर कराने की मांग की थी. 2018 में नगर निगमों के महापौर और उप महापौर तथा नगर परिषदों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए चुनाव दलीय आधार पर हुए थे. 2019 में सत्ता में आने के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने नियमों में बदलाव किया और शहरी स्थानीय निकाय (यूएलबी) चुनाव गैर-दलीय आधार पर कराने का निर्णय लिया. भाजपा ने ईवीएम के माध्यम से मतदान कराने की भी मांग की थी. भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन ने ईवीएम हटा दी हैं और मतपत्रों के माध्यम से चुनाव करा रहे हैं. यह शर्मनाक है. नौ नगर निगमों, 20 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों के 1,087 वार्डों के चुनावों में 21.26 लाख महिलाओं सहित 43.33 लाख से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.
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News Source: Press Trust of India (PTI)
