Home Top News केरल में पुलिस कार्रवाई पर सियासी टकराव, पी विजयन बोले- ‘सरकार फासीवादी नीतियां अपना रही’

केरल में पुलिस कार्रवाई पर सियासी टकराव, पी विजयन बोले- ‘सरकार फासीवादी नीतियां अपना रही’

by Sachin Kumar 13 October 2026, 3:30 PM IST
13 October 2026, 3:30 PM IST
Political clash protests police action Kerala

Keralam Politics: केरलम विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने मंगलवार को UDF सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार संघ परिवार की फासीवादी नीतियों पर आगे बढ़ रही है. विजयन ने पलक्कड़ में हुए प्रदर्शन के दौरान स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ताओं के साथ कथित पुलिस बर्बरता पर भी सवाल उठाए. इसके अलावा, उन्होंने पिछले महीने केरल विश्वविद्यालय के हॉस्टल में CPM की छात्र इकाई की महिला सदस्यों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि पुलिस की ज्यादतियां लगातार बढ़ रही हैं और वह लोगों की आवाज दबाने का काम कर रही है.

पुलिस ने जिम्मेदारियों को सही से नहीं निभाया

पूर्व मुख्यमंत्री विजयन ने दावा किया कि इन घटनाओं से पता चला है कि पुलिस पूरी तरह नाकाम रही है. वह लोगों के साथ मारपीट कर रही है और अपनी जिम्मेदारियों का सही से पालन नहीं कर रही है. इस दौरान पिनाराई विजय ने चेतावनी दी कि गृह विभाग ने पुलिस की तानाशाही पर लगाम नहीं लगाई तो फिर राज्य में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन देखने को मिलेगा. इसी बीच पिनाराई विजयन ने दावा किया कि पलक्कड़ में पर नशे में धुत पुलिस अधिकारी ने SFI कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई. बता दें कि SFI के कार्यकर्ता वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ का विरोध कर रहे थे. आरोप है कि इस दौरान राज्य सरकार की पुलिस ने उनके विरोध को दबाने की कोशिश की.

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कार्यकर्ताओं ने दिखाई घटना की फुटेज

वहीं. पलक्कड़ की घटना का जिक्र करते हुए सीपीएम नेता ने कहा कि छात्रों ने तुरंत अधिकारियों का ध्यान इस घटना की ओर दिलाया. साथ ही कार्यकर्ताओं ने इस घटना का फुटेज भी दिखाया. इसके बाद इस घटना पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. दूसरी ओर पुलिस अधिकारियों ने उस पुलिस वाले को गाड़ी में बैठाकर वहां से हटा दिया. विधानसभा में प्रतिपक्ष नेता ने कहा कि सरकार संबंधित अधिकारी को सस्पेंड करने के लिए तभी तैयार हुई, जब राज्य विधानसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया. उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार के लिए यह अच्छी बात नहीं है कि किसी अधिकारी के खिलाफ तब तक कार्रवाई नहीं होगी, जब तक विधानसभा में विरोध प्रदर्शन नहीं किया जाए.

कार्यकर्ताओं के साथ की गई थी मारपीट

बताया जा रहा है कि 30 सितंबर को यूनिवर्सिटी हॉस्टर में SFI कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई थी. उस घटना को लेकर भी संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई. उन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं को धमकाया था. उन्होंने आरोप लगाया कि UDF सरकार की जिम्मेदारी है कि वह पुलिस बल में ऐसे कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करें.

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