Sansad Monsoon Satra 2026: भारत के संसद को लोकतंत्र का मंदिर भी कहा जाता है. यहां संसद सत्र के अनुसार, देश के तमाम राज्यों के सांसद आते हैं और अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. इस दौरान वे कई मुद्दों को सरकार और देश के सामने उठाते हैं और उनके समाधान पर चर्चा करते हैं. संसद भवन में देश की कई नीतियां, योजनाएं, कानून, नियम समेत अन्य प्रमुख कार्य होते हैं. देश का कानून बनाना, संविधान में संशोधन करना, बजट पेश करना समेत अन्य बड़े फैसले संसद में ही लिए जाते हैं.
भारत के संसद के प्रमुख तीन अंग हैं, जिनका नाम है- राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा. इनके बारे में हम खास बातें जानेंगे, लेकिन उससे पहले हम संसद के मानसून सत्र के बारे में बात करेंगे. उसके साथ ही हम लोकसभा सचिवालय के द्वारा जारी उस एडवाइजरी को भी जानेंगे, जिसमें संसद और इसके कैंपस में धरना-प्रदर्शन व स्मॉर्ट गैजेट्स पर चेतावनी जारी की गई है. तो आइए इसकी शुरुआत करते हैं.

20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र
देश में संसद सत्र की शुरुआत होने जा रही है. यह मानसून सत्र है, जिसकी शुरुआत 20 जुलाई दिन सोमवार से होगी. बीते दिनों संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई से संसद के मानसून सत्र को बुलाने के लिए सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त 2026 तक चलेगा.
4 जुलाई को लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी एक नोटिफिकेशन में जानकारी दी गई- राष्ट्रपति का 4 जुलाई, 2026 का निम्नलिखित आदेश आम जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है:- “संविधान के अनुच्छेद 85 के खंड (1) के तहत मुझे मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए, मैं लोकसभा को सोमवार, 20 जुलाई, 2026 को सुबह 11:00 बजे नई दिल्ली में बैठक के लिए बुलाती हूं.”
प्रेसिडेंट के इस आदेश की कॉपी को राष्ट्रपति सचिवालय, प्रधानमंत्री सचिवालय, मंत्रिमंडल सचिवालय, राज्यसभा सचिवालय, नीति आयोग, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, भारत सरकार के सभी मंत्रालय/विभाग और लोकसभा सचिवालय के सभी अधिकारी और शाखाओं को भेज दिया गया है.
मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक
मानसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई 2026 दिन सोमवार से हो रही है. इससे एक दिन पहले यानी रविवार 19 जुलाई को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक में सरकार सत्र को लेकर कई मुद्दों पर चर्चा कर सकती है और अपने विधायी एजेंडे की रूपरेखा को सभी दलों के सामने पेश कर सकती है. मिली जानकारी के अनुसार, सरकार रविवार को विभिन्न दलों के नेताओं से मुलाकात करेगी और सत्र के दौरान उठाए जाने वाले विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेगी.
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मानसूत्र सत्र में पेश हो सकते हैं कई अहम विधेयक
संसद के मानसूत्र सत्र के दौरान सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की संभावना है. इसमें परिसीमन और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक है. इसके अलावा, जेल जाने पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित विधेयक भी शामिल हैं.
वहीं, विपक्ष तेल की बढ़ती कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे मुद्दों को उठाने के अलावा, नीट परीक्षा के पेपर लीक मामले और अयोध्या के राम मंदिर में दान के कथित गबन सहित महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है. विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा और हो सकता है कि इस सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के नेताओं के बीच संसद में तीखी बहस और हंगामा भी हो.

सर्वदलीय बैठक से पहले विपक्ष की बैठक
19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक से पहले नई दिल्ली में गुरुवार 16 जुलाई को विपक्ष की एक अहम बैठक हुई. कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने गुरुवार को दिल्ली में बैठक की और 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र के दौरान पार्टी की रणनीति पर चर्चा की. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श भी किया.
यह बैठक कांग्रेस संसदीय दल (सीपीपी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के जनपथ स्थित 10वें आवास पर आयोजित की गई थी. बता दें कि संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हो रहा है और संभवतः 13 अगस्त तक चलेगा. इस महत्वपूर्ण रणनीति बैठक में भाग लेने वाले अन्य कांग्रेस नेताओं में एआईसीसी महासचिव केसी वेणुगोपाल, राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद व नेता जयराम रमेश, पी चिदंबरम, के सुरेश, नसीर हुसैन, मणिकम टैगोर, कुमारी सेल्जा, तारिक अनवर, शशि थरूर और मनीष तिवारी सहित अन्य नेता शामिल हुए. विपक्षी इंडिया ब्लॉक भी सत्र शुरू होने से पहले सोमवार को अपनी रणनीति बैठक आयोजित करेगा ताकि अपनी संयुक्त रणनीति तैयार कर सके.
धरना-प्रदर्शन व स्मॉर्ट गैजेट्स पर चेतावनी
संसद के मानसून सत्र से पहले, लोकसभा सचिवालय ने सांसदों को संसद भवन परिसर में प्रदर्शन करने, धरना देने, तख्तियां दिखाने, आग्नेयास्त्र ले जाने और धार्मिक अनुष्ठान करने के खिलाफ चेतावनी दी है. लोकसभा सचिवालय ने अलग-अलग संसदीय बुलेटिनों में यह भी कहा है कि उसने पाया है कि एआई द्वारा निर्मित अपमानजनक प्रकृति के चित्र, तस्वीरें और नारे पोस्टरों, तख्तियों और बैनरों पर प्रदर्शित किए जा रहे हैं, और सदस्यों को सत्र के दौरान संसद परिसर में ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहिए.
सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे संसद भवन के गेट के सामने विरोध प्रदर्शन या धरना न करें, क्योंकि इससे सदन की बैठकों के दौरान सदस्यों के संसद कक्षों तक जाने में गंभीर बाधा और दिक्कतें उत्पन्न होती हैं. सदस्यों का ध्यान लोकसभा अध्यक्ष के निर्देशों के निर्देश 124ए(2) की ओर आकर्षित किया जाता है. भवन के द्वारों को किसी भी प्रकार की रुकावट से मुक्त रखना भी सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है.
लोकसभा बुलेटिन में जानकारी देते हुए कहा गया है कि संसद भवन में उपस्थित सदस्यों से अनुरोध है कि वे सहयोग करें. सांसदों से यह भी अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी धार्मिक समारोह के आयोजन के उद्देश्य से सदन परिसर का उपयोग किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, धरना या भूख हड़ताल के लिए न करें.
लोकसभा सचिवालय ने एक अन्य बुलेटिन में कहा कि सांसदों के लिए संसद भवन परिसर और उसके अंदर के रास्तों को निर्बाध और सुगम बनाए रखने के लिए परिसर में कई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है. इनमें आग्नेयास्त्र (Firearms), बैनर, पोस्टर, लाठी, भाले, तलवारें, डंडे आदि ले जाना शामिल है. पिछले कई सत्रों में विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों, नारेबाजी और विभिन्न मुद्दों पर पोस्टर दिखाने के कारण संसद की कार्यवाही में लंबे समय तक व्यवधान देखा गया है, जिसके परिणामस्वरूप कई दिनों तक कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और लगभग कोई काम नहीं हो पाया. पिछले बजट सत्र में, सदन में अभद्र व्यवहार के लिए निलंबित किए गए कई सांसदों ने संसद के गेट पर कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था.

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संसद के तीन प्रमुख अंग
अब बात भारत के संसद के तीन प्रमुख अंगों की करते हैं. इनमें राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं.
भारत के राष्ट्रपति
भारत के राष्ट्रपति संसद का एक अहम हिस्सा होते हैं, भले ही वे संसद के किसी भी सदन के सदस्य न हों. संविधान के तहत, संघ की कार्यकारी शक्तियां राष्ट्रपति में निहित होती हैं, जिनका इस्तेमाल वे या तो सीधे तौर पर या अपने अधीन अधिकारियों के माध्यम से करते हैं.
संघ की कार्यकारी शक्ति संसद की विधायी शक्ति के बराबर होती है, और संसद में राष्ट्रपति तथा संसद के दो सदन शामिल होते हैं – जिन्हें क्रमशः राज्यों की परिषद (राज्यसभा) और लोगों का सदन (लोकसभा) कहा जाता है. इस प्रकार, एक ओर राष्ट्रपति कार्यपालिका के प्रमुख होते हैं और दूसरी ओर, वे संसद का एक अभिन्न अंग होते हैं.
यह सर्वोच्च कार्यकारी और विधायी प्राधिकरणों का वास्तविक मेल है. संविधान के अनुसार और व्यावहारिक रूप से भी, कार्यपालिका और विधायिका के बीच का संबंध अत्यंत घनिष्ठ होता है और आदर्श रूप से इसमें किसी भी प्रकार का विरोध या विभाजन नहीं होता है.

राज्यसभा
काउंसिल ऑफ स्टेट्स यानी राज्यसभा, भारतीय संसद का उच्च सदन है. इसका गठन 3 अप्रैल 1952 को हुआ था. राज्यसभा में राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि तथा भारत के राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत व्यक्ति शामिल होते हैं. भारत के उपराष्ट्रपति राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं. राज्यसभा अपने सदस्यों में से ही एक उप-सभापति का भी चुनाव करती है. सभापति की अनुपस्थिति में उप-सभापति सदन की अध्यक्षता करते हैं.
देश के संसद में राज्यसभा सदस्यों की अधिकतम सीट की कुल संख्या 250 है. अभी कुल सदस्यों की संख्या 245 है. इनमें 233 सदस्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं, बाकी 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किया जाता है. राज्यसभा के सदस्य का कार्यकाल 6 वर्षों का होता है.
लोकसभा
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 79 के प्रावधानों के अनुसार, ‘हाउस ऑफ द पीपल’ यानी लोकसभा संसद का निचला सदन है. लोकसभा का गठन वयस्क मताधिकार के आधार पर सीधे चुनाव द्वारा चुने गए लोगों के प्रतिनिधियों से होता है.
संविधान के अनुसार सदन की अधिकतम सदस्य संख्या 552 तय की गई है. संविधान के अनुच्छेद 81 और अनुच्छेद 331 के प्रावधानों के तहत, लोकसभा में ये शामिल होंगे— (a) राज्यों के क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुने गए अधिकतम 530 सदस्य, और (b) केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकतम 20 सदस्य, जिन्हें संसद द्वारा कानून बनाकर तय किए गए तरीके से चुना जाएगा.

25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक हुए पहले आम चुनावों के बाद, 17 अप्रैल 1952 को पहली बार लोकसभा (हाउस ऑफ द पीपल) का विधिवत गठन किया गया था. वर्तमान में, सदन की सदस्य संख्या 543 है. लोकसभा का कार्यकाल, यदि इसे भंग न किया जाए, तो इसकी पहली बैठक के लिए तय तारीख से पांच साल का होता है. हालांकि, जब आपातकाल लागू हो, तो संसद कानून बनाकर इस अवधि को एक बार में एक साल से अधिक समय के लिए बढ़ा सकती है, लेकिन आपातकाल खत्म होने के छह महीने बाद से अधिक समय के लिए इसे किसी भी स्थिति में नहीं बढ़ाया जा सकता है.
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