Home Religious महाकुंभ की पवित्र डुबकी से लेकर राम मंदिर के धर्मध्वजा तक, 2025 में आस्था में डूबा रहा भारत

महाकुंभ की पवित्र डुबकी से लेकर राम मंदिर के धर्मध्वजा तक, 2025 में आस्था में डूबा रहा भारत

by Neha Singh
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Major Religious Events of 2025

Introduction

28 December, 2025

Major Religious Events of 2025: साल 2025 शुरुआत से ही आध्यात्मिक रहा. 144 वर्षों में एक बार आने वाले महाकुंभ ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी. महाकुंभ में विदेशी हस्तियों तक ने सनातन की शक्ति को महसूस किया. महाकुंभ के बाद जगन्नाथ रथ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. लाखों भक्तों ने रथ की पवित्र रस्सी को खींचा. इसके अलावा साल 2025 में राम मंदिर के निर्माण का कार्य पूरा हो गया, जिसके बाद राम मंदिर के शिखर धर्मध्वजा को स्थापित किया गया. यह पल हर रामभक्त की आंखों में आंसू ले आया. इस तरह से यह साल धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण रहा. यहां आप देश के बड़े धार्मिक कार्यक्रमों के बारे में एक नजर में पढ़ेंगे.

Table of Content

  • महाकुंभ
  • जगन्नाथ रथ यात्रा
  • राममंदिर ध्वजारोहण

महाकुंभ- आध्यात्म का महापर्व

इस साल की शुरुआत में होने वाला महाकुंभ विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक था, जब पूरी दुनिया ने सनातन संस्कृति का विशाल रूप देखा. यह महाकुंभ 144 साल में एक बार आने के कारण और भी ज्यादा महत्वपूर्ण बन गया. महाकुंभ का आयोजन उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में हुआ. यह 13 जनवरी से लेकर 26 फरवरी तक चला. कुंभ मेले का मुख्य आकर्षण शाही स्नान था, जहां अलग-अलग मठों के साधु और संत शुभ तारीखों पर त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाते थे. इस 45-दिवसीय आयोजन में न केवल धार्मिक महत्व बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता भी देखने को मिली, क्योंकि अलग-अलग क्षेत्रों के लोग एक साथ आए. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी से लेकर पूरे देश की बड़ी हस्तियों और यहां तक कि दुनिया के कोने-कोने से आए लोगों ने यहां पवित्र स्नान किया. महाकुंभ के त्रिवेणी संगम में साधू-संतों समेत 66 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. माना जाता है कि महाकुंभ में पवित्र स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष मिलता है. महाकुंभ ने कई लोगों का जीवन बदल दिया. इस दौरान आईआईटी बाबा और मोनालिसा जैसे कई लोग चर्चा में आए.

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जगन्नाथ रथ यात्रा- भगवान के प्रति समर्पण

ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ का मंदिर सनातन धर्म के चार धामों में एक है. यहां हर साल भव्य रथ यात्रा का आयोजन होता है, जिसमें भक्त भगवान की रथ यात्रा में पवित्र रस्सी खींचते और भगवान से मोक्ष पाने की कामना करते हैं. इस साल जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून से 5 जुलाई तक चली, जिसमें 15 लाख भक्त शामिल हुए. माना जाता है कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथयात्रा पर निकलते हैं और अपनी मौसी के घर, गंडिचा मंदिर जाते हैं. यहां 7 से 9 दिनों तक विश्राम करने के बाद वे अपने मुख्य मंदिर में लौटते हैं. रथयात्रा का दृश्य बहुत ही आकर्षक होता है. इस दौरान भगवान के दर्शन के लिए भक्तों में बड़ा उत्साह होता है.

राम मंदिर ध्वजारोहण- धर्म का प्रतीक

साल के आखिर में एक और बड़ा कार्यक्रम देखने को मिला. 25 नवंबर, 2025 को राम मंदिर के शिखर पर ध्वजा को स्थापित किया गया, जो मंदिर के पूरे होने का प्रतीक है. यह समारोह ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि मंदिर के शिखर पर धार्मिक ध्वज फहराना भगवान राम की जन्मभूमि पर सालों के इंतजार का अंत था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह धार्मिक ध्वज फहराया. यह ध्वज केसरिया रंग का है, जो 20 फीट लंबा और 11 फीट ऊंचा है और इस पर ओम, सूर्य और पीपल के पेड़ का निशान बना हैं. यह ध्वज न सिर्फ भक्ति को दिखाता है बल्कि धर्म का प्रतीक भी है. धर्मध्वजा को शिखर पर लहराते हुए देखना सभी रामभक्तों की आंखों में आंसू लाने वाला पल था. मंदिर के शिखर पर ध्वज फहराना मंदिर की संप्रभुता और विजय का प्रतीक होता है.

Conclusion

कुल मिलाकर, साल 2025 धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्व साल बन गया है. महाकुंभ जैसे दुर्लभ आयोजन और राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वजा की स्थापना ने हर भारतीय को अपनी संस्कृति पर गौरवान्वित महसूस करवाया. इन सभी धार्मिक आयोजनों ने यह साबित कर दिया है कि भारत की आध्यात्मिक चेतना आने वाले समय के साथ और भी मजबूत और प्रेरणादायक बन रही है।

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