Lala Lajpat Rai Hospital: कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल में हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है. यहां एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया.
Lala Lajpat Rai Hospital: कानपुर के लाला लाजपत राय अस्पताल में हैरान करने वाली लापरवाही सामने आई है. यहां एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया गया, जिसके बाद पोस्टमार्टम की तैयारी तक शुरू हो गई. मामला तब खुला जब शनिवार शाम पुलिसकर्मी शव को मुर्दाघर ले जाने के लिए मेडिसिन वार्ड पहुंचे. पुलिसकर्मियों ने जब शव को उठाना चाहा, तभी मरीज हिलने-डुलने लगा. यह देख डर से बेड छोड़कर अगल-बगल के मरीज भी भाग गए. मरीज के जिंदा होने की जानकारी मिलते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई. इस गंभीर गलती पर अस्पताल प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए एक जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर और एक नर्स सहित तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया. गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल संजय काला ने बताया कि घटना की जांच की जा रही है और जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी. घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है. समिति में उप-प्रधानाचार्य ऋचा अग्रवाल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक सौरभ अग्रवाल और प्रभारी अधीक्षक राकेश सिंह शामिल हैं.
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाईः प्रिंसिपल
समिति को 48 घंटे के भीतर तथ्य-जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. प्रिंसिपल संजय काला ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रधानाचार्य ने बताया कि मेडिसिन वार्ड संख्या 12 में दो मरीजों को अगल-बगल के बिस्तरों पर भर्ती कराया गया था. विनोद (42) बिस्तर संख्या 42 पर और एक अज्ञात लगभग 60 वर्षीय बुजुर्ग बिस्तर संख्या 43 पर. बुजुर्ग मरीज की शनिवार को इलाज के दौरान मृत्यु हो गई. हालांकि जूनियर डॉक्टर ने विनोद की मेडिकल फाइल में उसे आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया. जल्द ही पोस्टमार्टम के लिए स्वरूप नगर पुलिस स्टेशन को सूचना भेजी गई. जब पुलिस शव ले जाने के लिए पहुंची, तो विनोद को जीवित देखकर दंग रह गई. इस खुलासे से अस्पताल में हड़कंप मच गया. प्रभारी अधीक्षक राकेश सिंह और प्रधानाचार्य संजय काला सहित वरिष्ठ अधिकारी वार्ड में पहुंचे.
जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर ने मानी गलती
एक अधिकारी ने बताया कि गलती करने वाले कनिष्ठ चिकित्सक ने बाद में अपनी गलती स्वीकार कर ली और माफी मांगी. इस चूक की पुष्टि करते हुए सिंह ने कहा कि यह गलती गलत दस्तावेजीकरण के कारण हुई. उन्होंने कहा कि जूनियर डॉक्टर ने गलती से गलत मरीज की फाइल भर दी थी. रिकॉर्ड को ठीक करके दोबारा पुलिस को भेज दिया गया. पुलिस ने बताया कि विनोद के मेडिकल रिकॉर्ड में मिले फोन नंबर से उनके रिश्तेदारों से संपर्क किया गया. अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि विनोद की हालत स्थिर है. उसके रिश्तेदारों को उसके साथ रहने और हालत में सुधार होने पर उसे घर ले जाने की सलाह दी गई थी, लेकिन उन्होंने व्यवस्थाओं की कमी का हवाला देते हुए इनकार कर दिया और बाद में अस्पताल से गायब हो गए. प्रभारी अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि उसका अस्पताल में इलाज चल रहा है.
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