Home Top News राहुल गांधी को रोकने और सांसदों के निलंबन पर बवालः विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ खोला मोर्चा

राहुल गांधी को रोकने और सांसदों के निलंबन पर बवालः विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ खोला मोर्चा

by Sanjay Kumar Srivastava
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राहुल गांधी को रोकने और सांसदों के निलंबन पर बवालः विपक्षी दलों ने ओम बिरला के खिलाफ खोला मोर्चा

Om Birla: विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया.

Om Birla: विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को उनके पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव पेश करने का नोटिस दिया. यह प्रस्ताव राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को सदन में बोलने से रोकने और आठ सांसदों के निलंबन के कारण उठाया गया है.विपक्षी दलों का आरोप है कि बिरला ने सदन की कार्यवाही में पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया और कांग्रेस सांसदों पर झूठे आरोप लगाकर संवैधानिक पद का दुरुपयोग किया. लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक के सुरेश और सचेतक मोहम्मद जावेद ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और डीएमके सहित कई विपक्षी दलों की ओर से लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को नोटिस सौंपा. हालांकि, टीएमसी सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए. कांग्रेस, डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) के लगभग 120 सांसदों ने पहले ही प्रस्ताव पेश करने के लिए नोटिस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

स्पीकर को पद से हटाने का प्रस्ताव

नोटिस में कहा गया है कि हम, अधोहस्ताक्षरी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भारत के संविधान के अनुच्छेद 94(सी) के प्रावधानों के तहत पद से हटाने के प्रस्ताव की सूचना देते हैं, क्योंकि उन्होंने लोकसभा की कार्यवाही खुले तौर पर पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की है. नोटिस में यह भी कहा गया है कि कई मौकों पर विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने ही नहीं दिया गया, जो संसद में उनका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है. नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2 फरवरी को विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपना भाषण पूरा नहीं करने दिया गया. यह कोई इकलौती घटना नहीं है. इसमें दावा किया गया है कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को लगभग हमेशा बोलने की अनुमति नहीं दी जाती है. नोटिस में कहा गया है कि 3 फरवरी को आठ विपक्षी सांसदों को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया और उन्हें केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने के लिए दंडित किया जा रहा है. नोटिस में यह भी कहा गया है कि 4 फरवरी को भाजपा के एक सांसद को दो पूर्व प्रधानमंत्रियों पर पूरी तरह से आपत्तिजनक और व्यक्तिगत हमले करने की अनुमति दी गई और स्थापित परंपराओं और शिष्टाचार के मानदंडों की अवहेलना करने के लिए उन्हें एक बार भी फटकार नहीं लगाई गई.

सदन में पक्षपात का आरोप

विपक्ष के अनुरोध के बावजूद इस विशेष सांसद के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है. नोटिस में बिरला की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके पास पुख्ता जानकारी है कि कई कांग्रेस सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीट की ओर बढ़ सकते हैं और कोई अप्रत्याशित घटना को अंजाम दे सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने उनसे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देने के लिए सदन में न आने का अनुरोध किया था. उपरोक्त टिप्पणियां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ सरासर झूठे आरोप लगाती हैं और अपमानजनक प्रकृति की हैं. विपक्ष ने कहा कि अध्यक्ष, जो प्रक्रिया नियमों और संसदीय मर्यादा के मानदंडों के संरक्षक हैं, ने सदन के पटल को ऐसे बयान देने के लिए चुना, जो इस संवैधानिक पद के दुरुपयोग का संकेत है. सूत्रों ने बताया कि बिरला ने लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह को विपक्ष द्वारा दिए गए नोटिस की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. कहा कि इसकी जांच और प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जाएगी.

ये भी पढ़ेंः लोकसभा : ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ला सकता है अविश्वास प्रस्ताव, लगाए कई गंभीर आरोप

News Source: Press Trust of India (PTI)

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