Sheetal Ashtmi Puja Vidhi: इस साल 11 मार्च को शीतला अष्टमी है. शीतला अष्टमी की खास बात यह है कि आपको इस अपने घर में कुछ भी नहीं बनाना होता. इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता.
7 March, 2026
हिंदू कैलेंडर का पहला महीना यानी चैत्र शुरु हो चुका है. चैत्र महीने में कई व्रत और त्योहार पड़ते हैं. इन्हीं में से एक है शीतला अष्टमी, जो कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है. इस साल 11 मार्च को शीतला अष्टमी है. यह माता शीतला को समर्पित है. इस दिन शीतला माता की पूजा की जाती है और परिवार के स्वास्थ्य की कामना की जाती है. शीतला अष्टमी की खास बात यह है कि आपको इस अपने घर में कुछ भी नहीं बनाना होता. इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता. चलिए जानते हैं कैसे करते शीतला माता की पूजा.

शीतला माता को पसंद है बासी खाना
शीतला अष्टमी पर देवी को ठंडा खाना चढ़ाने का एक खास रिवाज है. कई जगहों पर इसे “बासोड़ा” या “बासी खाना” भी कहा जाता है. शीतला अष्टमी पर चूल्हा न जलाने की परंपरा बहुत पुरानी है. माना जाता है कि देवी शीतला को ठंडा खाना पसंद है. इसलिए, इस दिन घर में कोई नया या ताजा खाना नहीं बनता है, न ही चूल्हा जलाया जाता है. लोग सप्तमी को एक दिन पहले से ही पूरी, पुवा, हलवा, चना और दही तैयार कर लेते हैं. फिर, अष्टमी की सुबह, यह ठंडा खाना सुबह सबसे पहले देवी शीतला को चढ़ाया जाता है. इसके बाद, पूरा परिवार उसी खाने को प्रसाद के तौर पर खाता है.
बीमारियों से रक्षा करती हैं माता
माना जाता है कि इस दिन चूल्हा जलाने या ताजा खाना बनाने से देवी शीतला नाराज हो सकती हैं. इसलिए, लोग एक दिन पहले ही भोजन बना लेते हैं. इस दिन बनने वाली डिश में पूरी, पुवा, खीर, दही, चना और मिठाई शामिल हैं. भोग लगाने के बाद, महिलाएं माता शीतला की पूजा करती हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती है. इसके बाद पूरा परिवार वहीं भोजन करता है. माता शीतला को स्वास्थ्य की देवी माना जाता है. शीतला माता की पूजा बदलते मौसम में चेचक, खसरा और अन्य संक्रमण वाली बीमारियों से बचने के लिए की जाती है.

कैसे करनी है पूजा
शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें. इसके बाद, पूजा की थाली में दही, हलवा, रोटी, बाजरा, सप्तमी के मीठे चावल, नमक और मठरी रखें. इसके अलावा, एक दूसरे बर्तन में आटे का दीपक, रोली, कपड़े, चावल के दाने, हल्दी, मोली, होली के बड़कुले की माला, सिक्के और मेहंदी रखें. दोनों थालियों के पास ठंडे पानी का बर्तन रखें. अब शीतला माता की पूजा करें. देवी को हल्दी को टीका लगाएं और पूरे परिवार को भी हल्दी का टीका लगाएं. इसके बाद माता को भोग लगाएं. माता को प्रसाद चढ़ाने के बाद खुद भी प्रसाद खाएं.
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