Netanyahu and Trump Stand: साउथ पार्स फील्ड पर हमले को लेकर अमेरिका और इजरायल में मतभेद नजर आ रहा है. अब नेतन्याहू ने कहा है कि उसने इस हमले को अकेले अंजाम दिया और अमरिका की इसमें कोई भूमिका नहीं थीं.
20 March, 2026
ईरान के खिलाफ युद्ध के 20वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद सामने आया है, जो ईरान में साउथ पार्स में हमले को लेकर है. पहले इजरायल ने साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला किया है, जिससे बौखलाया ईरान मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर जवाबी हमले करने लगा. ईरानी हमलों की वजह से पहले से ही ऊंची ग्लोबल एनर्जी की कीमतें और बढ़ गईं और खाड़ी के साथी देशों ने ट्रंप से नेतन्याहू से हमले रोकने की अपील करने को कहा. वहीं सबसे हैरान वाली बात थी कि ट्रंप को इस हमले के बारे में कोई जानकारी थी, जिसके बाद से यह सवाल खड़ा हो गया कि क्या अब जिगरी दोस्त ट्रंप और नेतन्याहू एकमत नहीं हैं.
ट्रंप को नहीं थी हमले की जानकारी
जापान के प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ ओवल ऑफिस में मीटिंग के दौरान ट्रंप ने रिपोर्टरों से कहा कि वह दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड पर इजरायल के हमले से न तो सहमत हैं और न ही उसे मंज़ूरी देते हैं, जो ईरान के लिए एनर्जी लाइफलाइन है. नेतन्याहू के हमले के फैसले के बारे में ट्रंप ने कहा, “मैंने उनसे कहा था, ऐसा मत करो.’ हमारी अच्छी बनती है, लेकिन कभी-कभी वह कुछ कर देते हैं.” इससे पहले ट्रंप ने ट्रूथ पर पोस्ट में लिखा था कि उन्हें इस हमले की जानकारी नहीं थी और अब इजरायल भविष्य में गैस फील्ड पर हमला नहीं करेगा. वहीं नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल ने “अकेले काम किया” और वह ट्रंप की इस रिक्वेस्ट पर सहमत हो गए हैं कि इजरायल ईरान के बड़े गैस फील्ड पर आगे कोई भी हमला न करे.
नेतन्याहू ने नहीं मानी ट्रंप की बात
प्रधानमंत्री ने अपने और ट्रंप के बीच किसी भी दूरी को भी कम करके दिखाने की कोशिश की. येरुशलम में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेतन्याहू ने कहा कि ट्रंप ने उनसे ईरान के गैस फील्ड पर और हमलों को कुछ समय के लिए रोकने की रिक्वेस्ट की थी. उन्होंने साफ किया कि ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर हमला अकेले इजरायल ने किया था. इस ऑपरेशन में किसी दूसरे देश का कोई रोल नहीं था. उन्होंने कहा कि 20 दिनों की लड़ाई के बाद, ईरान के पास अब बैलिस्टिक मिसाइल बनाने या यूरेनियम को एनरिच करने की कैपेसिटी नहीं है.
अमेरिका को युद्ध में घसीटने के आरोपों को खारिज किया
जब रिपोर्टर ने नेतन्याहू ने पूछा कि क्या इजरायल ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ युद्ध में घसीटा है. इसपर नेतन्याहू ने कहा, देखिए, मुझे नहीं लगता कि कोई भी दो लीडर प्रेसिडेंट ट्रंप और मेरे जितने कोऑर्डिनेटेड रहे हैं. वह लीडर हैं. मैं उनका साथी हूं. अमेरिका लीडर है.” नेतन्याहू ने कहा कि यह कहना गलत है कि इजरायल ने US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप को इस युद्ध में शामिल किया. उन्होंने कहा, “क्या सच में आपको लगता है कि कोई ट्रंप को बता सकता है कि उन्हें क्या करना है?”
अमेरिका-इजरायल के मकसद अलग-अलग हैं
US एडमिनिस्ट्रेशन के टॉप अधिकारियों ने गुरुवार को कहा कि ट्रंप नेतन्याहू के साथ सिम्पैटिको हैं, लेकिन आखिर में अपनी ईरान स्ट्रैटेजी में वह उसी से गाइड होते हैं जो उन्हें लगता है कि US नेशनल सिक्योरिटी के हित में है. US के एयर कैंपेन का फोकस ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को खत्म करना, उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम खत्म करना और उसकी नेवी को खत्म करना रहा है. इस बीच, इजरायल ने एक के बाद एक बड़े लेवल पर हत्याएं की हैं, क्योंकि वह 1979 से देश पर राज कर रही इस्लामिक अथॉरिटी को हटाना चाहता है.
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News Source: PTI
