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AI से आईटी सेक्टर में नौकरी पर खतरा? बाजार में निवेशकों के करोड़ों स्वाहा! आगे क्या होगा?

by Amit Dubey
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AI and IT Sector

AI and IT Sector: पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से भारत समेत दुनिया के तमाम शेयर बाजार में उठा-पटक की स्थिति जारी है. बीते दिनों भारतीय शेयर बाजार में मात्र दो दिनों में 2700 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई थी. कारण साफ था कि अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को एक सिरे से खारिज कर दिया था. वहीं, 12 और 14 मई को देश के आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई. इस गिरावट ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से बाजार की नरम पड़ती चाल को और अधिक बल दे दिया. पश्चिम एशिया के तनाव के कारण शेयर बाजार तो फीका दिख ही रहा है लेकिन आईटी सेक्टर के शेयरों में गिरावट ने इस क्षेत्र की कंपनियों में काम करने वाले लोगों के लिए AI की एक नई चुनौती भी पेश कर रही है. जानकारी के अनुसार, बीते दिनों बाजार में आईटी शेयरों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट और बिकवाली दिखी. जानकार बताते हैं कि इसकी वजह निवेशकों की भावनाएं लगातार प्रभावित होना बताया जा रहा है क्योंकि यह एआई के कारण होने वाली दिक्कतों और चुनौतियों से भी प्रभावित हुआ.

बीते दिनों (12 मई 2026) अमेरिका की एआई कंपनी OpenAI ने करीब 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक के निवेश की घोषणा की. यह निवेश एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए है, जिसको लेकर एक नई कंपनी OpenAI Deployment Co. को खोलने की प्लानिंग हैं. इस दौरान ओपनएआई ने कंसल्टिंग और इंजीनियरिंग फर्म टुमोरो को भी खरीदने का ऐलान कर दिया. ओपनएआई के इस कदम को आईटी कंपनियों के पारंपरिक बिजनेस मॉडल और खासकर के सर्विस बिजनेस मॉडल को प्रभावित करने वाला बताया जा रहा है. दुनिया में बढ़ती एआई की धाक ने कई कंपनियों को छंटनी करने को लेकर भी फैसला करने पर मजबूर किया है. इससे हजारों की संख्या में लोगों की नौकरी चली गई है. आइए जानते हैं कि क्या AI से आईटी सेक्टर में नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है? बीते दिनों शेयर बाजार में आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में कितनी गिरावट रही और निवेशकों का कितना नुकसान हुआ, इसके साथ ही जानेंगे कि अब आने वाले समय में क्या हो सकता है.

Table of Content

  • OpenAI की डिप्लॉयमेंट कंपनी से इतना डर क्यों?
  • आईटी सेक्टर के शेयरों में गिरावट
  • क्या AI से आईटी सेक्टर में नौकरी पर खतरा?
  • वित्त मंत्री ने की थी बैठक
  • एआई से आने वाले दिनों में आईटी सेक्टर में क्या होगा?

OpenAI की डिप्लॉयमेंट कंपनी से इतना डर क्यों?

बीते दिनों अमेरिका की दिग्गज एआई कंपनी OpenAI ने Deployment Co. नाम की एक नई कंपनी को खोलने का ऐलान किया. इस दौरान उसने कंसल्टिंग और इंजीनियरिंग फर्म टुमोरो को भी खरीदने की जानकारी दी. ओपनएआई का यह कदम एआई के इस्तेमाल को तेजी से और अधिक बढ़ाने का है.

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अभी तक तो कंपनी केवल चैटजीपीटी से अपनी सेवा दे रही थी, इसे एक रिसर्च कंपनी के रूप में जाना जाता था, जो अभी तक केवल दूसरी कंपनियों को अपनी एआई टेक्नोलॉजी बेचा करती थी, अब उसने Deployment Co. को खोलने का ऐलान कर दिया है. इससे भारतीय आईटी कंपनियों को तगड़ा झटका लगा है. इसका मतलब यह हुआ कि Deployment Co. के जरिए ओपनएआई अब भारतीय आईटी कंपनियों यानी मिडिलमैन को हटाकर सीधे बड़े ग्लोबल क्लाइंट्स के साथ अपना काम करेगी.

मालूम हो कि अब तक चाहें वह अमेरिकन कंपनी हो या फिर यूरोपीयन कंपनी, वह एआई को अपने सिस्टम में लगाने या लागू करने के लिए भारतीय टेक कंपनियों को करोड़ों रुपयों का कॉन्ट्रैक्ट देती थीं. अब जो खबर है, वह यह है कि ओपनएआई की यह कंपनी खुद इन कंपनियों के सिस्टम में एआई को लागू करेगी. इस दौरान वह डाटा माइग्रेशन, कस्टमाइजेशन और सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस जैसे कई सारे काम करेगी, जिसकी वजह से भारतीय आईटी कंपनियों को झटका माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि ओपनएआई की यह कंपनी एआई टूल्स का डिप्लॉय कर खुद कोड लिखेगी, उसका टेस्ट करेगी और खुद कई चीजों को ठीक भी करेगी.

यही कारण भी रहा कि इन कंपनियों के शेयरों में बीते दिनों गिरावट दर्ज की गई. ओपनएआई के इस कदम से देश की दिग्गज आईटी कंपनियों के कुछ कर्मचारियों में डर की चिंता भी बताई जा रही है. आशंका है कि आने वाले दिनों में अगर इन कर्मचारियों को कोई काम नहीं मिलता है तो आईटी कंपनियां अपने यहां नौकरी की छंटनी का काम शुरू कर सकती हैं. जानकार बताते हैं कि ओपनएआई का यह कदम भारत के आईटी सेक्टर के लिए खतरा हो सकता है क्योंकि भारतीय सर्विस प्रोवाइडर्स वाले जो निवेशक हैं, उन्हें डर है कि विदेशी क्लाइंट्स आने वाले दिनों में भारतीय वेंडर्स को छोड़कर अब सीधे ओपनएआई की इस डिप्लॉयमेंट कंपनी की सेवाओं का इस्तेमाल करेंगे.

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आईटी सेक्टर के शेयरों में गिरावट

ओपनएआई के द्वारा अपनी इस नई कंपनी की घोषणा करने के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी गई. बाजार के आईटी सेक्टर वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी आईटी सेक्टर इंडेक्स सबसे अधिक प्रभावित हुआ. देश की दिग्गज आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल और टेक महिंद्रा के शेयरों में 4 फीसदी से अधिक तक की गिरावट देखी गई. 12 मई को आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों में इस गिरावट की वजह से बाजार में निवेशकों के करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये डूब गए.

आईटी सेक्टर की कंपनियों के शेयरों की पिछले एक महीने की डेटा देखें तो इनमें 22 फीसदी से अधिक तक की गिरावट देखी गई है. पिछले एक महीने में देश की दिग्गज आईटी कंपनियों में से एक एचसीएल के शेयरों में 22 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है. इंफोसिस के शेयर 14 फीसदी तक गिरे हैं. टाटा ग्रुप की टीसीएस कंपनी के शेयर में लगभग 10 फीसदी, विप्रो में 7.50 फीसदी और टेक महिंद्रा में 7 फीसदी से अधिक की गिरावट देखी गई है.

क्या AI से आईटी सेक्टर में नौकरी पर खतरा?

जानकार बताते हैं कि आने वाले समय में एआई से कुछ नौकरियों पर भी खतरा मंडरा सकता है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस साल में अभी तक आईटी सेक्टर में विभिन्न कंपनियों में 80 हजार से अधिक की छंटनी हो चुकी है. यह छंटनी पूरी दुनिया भर में हुई है. जानकारी के अनुसार, जिन नौकरियों पर एआई से सबसे अधिक खतरा है, उनमें कस्टमर सर्विस, डेटा एंट्री, बेसिक कोडिंग की नौकरी, सॉफ्टवेयर टेस्टिंग और डेवलपमेंट समेत अन्य नौकरियां हैं.

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हालांकि, एक्पर्ट्स का यह भी मानना है कि एआई पूरी तरह से इंसान को नहीं हटा रहा लेकिन उनके काम करने के तरीके को बदल रहा है. इससे यह होगा कि कंपनियां कम लोगों की मदद से अधिक काम कर सकेगी. उन्हें इसके लिए अधिक भर्तियां भी नहीं करनी पड़ेगी. मतलब कि नई नौकरियां पहले की तुलना में कम होंगी. भारत की प्रमुख आईटी कंपनियां जैसे- इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक और विप्रो में भी एआई से छंटनी की आशंका है.

वित्त मंत्री ने की थी बैठक

बता दें कि एआई से केवल आईटी सेक्टर ही नहीं बल्कि बैंकिंग सेक्टर को भी खतरा है. बीते महीने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने AI से बढ़ते खतरों के बीच एक बैठक की थी और एक बड़ा फैसला लेते हुए बैंकिंग सिस्टम को मजबूत करने के निर्देश दिया था. उन्होंने बैंकों को साइबर एक्सपर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर साइबर अटैक के खिलाफ काम करने की बात की थी और निर्देश दिया था। उन्होंने बैंकों को अपनी आईटी सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई प्लान पर भी चर्चा की थी.

मालूम हो कि बीते दिनों अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने एक नया एआई मॉडल Mythos लॉन्च किया. इस Mythos का उपयोग करके किसी भी बैंकिगं सिस्टम या किसी भी संगठन के सिस्टम को हैक किया जा सकता है. इसके अलावा इसके जरिए बैंकों के फाइनेंशियल सिस्टम तक भी पहुंच बनाई जा सकती है. इससे बैंकों का लेनदेन प्रभावित होने की आशंका है. इसी बढ़ते एआई खतरे और साइबर अपराध को लेकर वित्त मंत्री ने बैंकिंग आईटी सेक्टर को मजबूत करने के निर्देश दिए थे.

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एआई से आने वाले दिनों में आईटी सेक्टर में क्या होगा?

अब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में एआई से आईटी सेक्टर में क्या होगा? जानकार बताते हैं कि इससे और अधिक तेजी के साथ बदलाव दिख सकता है. भारत में भविष्य में एआई की भूमिका को देखते हुए और उसकी खासियत को बताते हुए एआई समिट भी हुआ था. इसमें देश की कई दिग्गज आईटी कंपनियां शामिल हुई थीं. तब दिखा था कि कैसे एआई के जरिए इंसान के कई काम मशीने कर रही हैं. कस्टमर केयर को लेकर भी एआई बहुत बड़ा काम करने जा रहा है. कोई भाषण अगर अंग्रेजी में दे रहा है तो उसे अनेक भाषाओं में बदलने के लिए कई लोगों या ट्रांसलेटर की जरूरत नहीं है, बल्कि एआई की मदद से आप रियल टाइम में ही उस अंग्रेजी के भाषण को आप अपनी पसंदीदा भाषा में सुन सकेंगे. पहले आपने देखा होगा कि कई कंपनियां इसके लिए ट्रांसलेटर हायर करती थीं. आने वाले समय में इसमें और भी बड़ा बदलाव होने वाला है.

आईटी सेक्टर में कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए आने वाले दिनों में एआई और भी कमाल कर सकता है. कई कंपनियां 20 से 25 फीसदी तक कोडिंग का काम एआई के जरिए करा रही हैं. इस क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि आने वाले वर्षों में आईटी सेक्टर की कंपनियों में डिजिटल लेबर (एआई और ऑटोमेशन) का हिस्सा 20 फीसदी तक देखने को मिल सकता है. इससे कंपनियों की कमाइयां तो बढ़ेंगी लेकिन काम करने वाले लोगों की संख्या में कमी आ सकती है. यहां तो हम सिर्फ आईटी सेक्टर की ही बात कर रहे हैं, वैसे भारत के अन्य सेक्टरों में एआई से काफी बड़े लेवल पर बहुत बड़ा परिवर्तन और बदलाव आने वाला है.

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