Consumer Court: अब बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी. अगर बिल्डर ने पैसा लिया है तो उसे हर हाल में फ्लैट देना ही होगा, अन्यथा ब्याज सहित पूरे पैसे लौटाने होंगे. मुंबई उपभोक्ता अदालत ने पीड़ित के पक्ष में फैसला देकर एक नजीर पेश किया है. महाराष्ट्र कंजूमर विवाद निवारण आयोग ने दो बिल्डर कंपनियों को एक दंपती को ब्याज सहित 1.05 करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया है. इन कंपनियों ने दंपती से पूरा पेमेंट लेने के बाद भी उन्हें फ्लैट नहीं दिया और उसे किसी और को बेच दिया. अपने फैसले में अदालत ने कहा कि शिकायत करने वाले दंपती ने मुंबई के इस प्रोजेक्ट में अपनी जीवन भर की कमाई लगाई थी. उन्हें एक दशक से ज़्यादा समय तक बहुत ज़्यादा परेशानी और मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
40 लाख में किया था एक फ्लैट बुक
यह आदेश ‘एक्स पार्टी’ (यानी दूसरी पार्टी की गैर-मौजूदगी में) दिया गया, क्योंकि बिल्डर कंपनियों यूनिवर्सल हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर व यूनिवर्सल कंस्ट्रक्शन और इन कंपनियों को चलाने वाले साकिब शेख़ अहमद मुकदम और साजिद शेख़ अहमद मुकदम ने अपना जवाब दाखिल नहीं किया था. दंपति की शिकायत के मुताबिक, पति कुवैत की एक कंपनी में अकाउंटेंट थे और पत्नी रायगढ़ के एक जूनियर कॉलेज में पढ़ाती थीं. उन्होंने 2013 में इन बिल्डर्स के ‘डोंगरी प्रोजेक्ट’ में एक फ़्लैट बुक करने के लिए 40 लाख रुपये दिए थे. जब तय 36 महीनों के अंदर कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं हुआ, तो बिल्डर्स ने उन्हें अपना इन्वेस्टमेंट मज़गांव में मौजूद ‘बे व्यू’ नाम के दूसरे प्रोजेक्ट में बदलने के लिए मना लिया.
बिल्डर ने किसी दूसरे को बेच दिया
इस दंपति ने सितंबर 2018 तक 90 लाख रुपये की बिक्री कीमत पूरी तरह चुका दी थी. दंपती को तब झटका लगा जब उन्हें पता चला कि उन्हें अलॉट किया गया फ्लैट पहले ही किसी तीसरे पक्ष को बेचा जा चुका था. जब उन्होंने बिल्डरों से इस बारे में बात की, तो बिल्डरों ने उनके पैसे वापस करने की पेशकश की. लेकिन शिकायत के अनुसार, खाते में पर्याप्त पैसे न होने के कारण चेक बार-बार बाउंस हो गए. दंपती का दावा है कि बिल्डरों ने जून 2021 में एक समझौता ज्ञापन किया, जिसमें उन्होंने कुल 1.25 करोड़ रुपये की देनदारी स्वीकार की. इसमें से 20 लाख रुपये 2023 में चुकाए गए, लेकिन बाकी रकम का भुगतान नहीं किया गया.
अदालत ने कहा- बिल्डरों ने दिया धोखा
कंज्यूमर कमीशन ने माना कि बिल्डरों का काम भरोसे का घोर उल्लंघन था और यह सर्विस में कमी और गलत व्यापारिक तरीकों के बराबर था. कमीशन ने कहा कि बिल्डरों ने न केवल शिकायतकर्ताओं को उनकी जीवन भर की मेहनत की कमाई से वंचित किया, बल्कि वे धोखेबाजी में भी शामिल रहे, जिसमें वादे पूरे न करना, प्रोजेक्ट्स के बीच मनमाने ढंग से अलॉटमेंट बदलना और बार-बार बेकार चेक जारी करना शामिल था. आयोग ने पीड़ित दंपती पर पड़े गंभीर शारीरिक और भावनात्मक असर का ज़िक्र किया. उन्हें कई बार मंगांव में अपने घर से मुंबई में बिल्डरों के दफ़्तर तक 150 किलोमीटर से ज़्यादा का सफ़र करना पड़ा, लेकिन उन्हें सिर्फ़ टाल-मटोल वाले जवाब और खोखले वादे ही मिले.
10% सालाना ब्याज के साथ मिलेंगे रुपए
आयोग ने कहा कि अलॉट किए गए फ़्लैट को किसी तीसरे पक्ष को बेधड़क बेच देना बुरी नीयत को दिखाता है, जो सिर्फ़ सर्विस में कमी से कहीं ज़्यादा है. यह गंभीर उत्पीड़न और अनुचित लाभ उठाने जैसा है. आयोग ने बिल्डरों को निर्देश दिया कि वे दंपती को 1.5 करोड़ रुपये लौटाएं, साथ ही जून 2021 से 10% सालाना ब्याज भी दें. बिल्डरों को गंभीर मानसिक पीड़ा, शारीरिक उत्पीड़न और आर्थिक तंगी के लिए मुआवज़े के तौर पर 50,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 25,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया.
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