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फिर बढ़ी महंगाई की टेंशन! Inflation 9.92% पर पहुंची, खाने-पीने से लेकर गैस तक हुई महंगी

by Preeti Pal 14 September 2026, 4:42 PM IST (Updated 14 September 2026, 4:43 PM IST)
14 September 2026, 4:42 PM IST (Updated 14 September 2026, 4:43 PM IST)
फिर बढ़ी महंगाई की टेंशन! अगस्त में WPI Inflation 9.92% पर पहुंची, खाने-पीने से लेकर गैस तक हुई महंगी

Inflation: महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है. अगस्त 2026 में थोक महंगाई यानी होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) महंगाई बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुंच गई. जुलाई में ये आंकड़ा 9.78 प्रतिशत था. सरकार की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, खाने-पीने की चीजों, ईंधन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े सामान की कीमतों में बढ़ोतरी ने थोक महंगाई को ऊपर धकेला है. अगस्त की WPI इन्फ्लेशन नई सीरीज में दूसरी सबसे ऊंची दर है. यानी बाजार में सामान बनाने और थोक स्तर पर बेचने की लागत का दबाव अभी कम होता नजर नहीं आ रहा.

इन चीजों ने बढ़ाई चिंता

अगस्त में फूड इन्फ्लेशन बढ़कर 7.05 फीसदी हो गई. वहीं, जुलाई में ये 6.65 प्रतिशत थी. यानी खाने-पीने से जुड़ी चीजों की थोक कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई अगस्त में बढ़कर 8.37 फीसदी हो गई, जो इस सीरीज का अब तक का सबसे हाई लेवल है. जुलाई में ये 8.29 फीसदी थी. सरकार के मुताबिक, मिनरल ऑयल्स, फूड आर्टिकल्स, फूड प्रोडक्ट्स, बेसिक मेटल्स, नॉन फूड आर्टिकल्स और केमिकल्स से जुड़ी चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी ने अगस्त की महंगाई को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है.

फ्यूल और पावर ने दिया झटका

अगस्त में सबसे ज्यादा चिंता फ्यूल और पावर सेक्टर से मिली. इस कैटेगरी में WPI इन्फ्लेशन जुलाई के 20.05 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 22.93 प्रतिशत हो गई. अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनर्जी प्राइसेसे में तेजी और मिडिल ईस्ट में फिर बढ़े तनाव का असर ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है. मिनरल ऑयल्स, नेचुरल गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी इसकी बड़ी वजह रहीं.

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आगे भी राहत नहीं

बार्कलेज के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा कीमतों में हालिया तेजी आने वाले समय में WPI और प्रोड्यूसर प्राइस इन्फ्लेशन पर दबाव बनाए रख सकती है. यानी आने वाले महीनों में महंगाई में बड़ी राहत की उम्मीद फिलहाल नजर नहीं आ रही है. इसके अलावा इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के चीफ इकोनॉमिस्ट देवेंद्र पंत ने भी कहा कि लंबे समय से जारी मिडिल ईस्ट वॉर ने फ्यूल एंड पावर इन्फ्लेशन में दो महीने से चली आ रही गिरावट का ट्रेंड पलट दिया है. उनके मुताबिक, कमजोर करेंसी और बारिश की कमी जैसी वजह भी आने वाले समय में महंगाई को ऊपर रख सकती हैं.

सितंबर में और बुरा हो सकता है हाल

अनुमान है कि सितंबर 2026 में होलसेल इन्फ्लेशन बढ़कर 10.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. अगर मिडिल ईस्ट टेंशन का कोई समाधान नहीं निकलता है, तो 2026 के बाकी महीनों में भी महंगाई हाई लेवल पर रह सकती है. कुछ फूड प्रोडक्ट्स, खासकर चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी और कमजोर बेस इफेक्ट का असर देखने को मिल सकता है. उम्मीद है कि सितंबर-अक्टूबर में WPI इन्फ्लेशन 9.5 से 10 फीसदी से ऊपर रह सकती है. हालांकि, बाद में अनुकूल बेस इफेक्ट की वजह से इसमें नरमी आ सकती है. बशर्ते वैश्विक एनर्जी और कमोडिटी की कीमतें
में और बड़ी तेजी न आए. यानी फिलहाल महंगाई में राहत का इंतजार थोड़ा और लंबा हो सकता है. खाने-पीने का सामान हो या ईंधन, दोनों मोर्चों पर बढ़ता दबाव आम लोगों के बजट के लिए चिंता का कारण है.

News Source: PTI

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