Home Latest News & Updates पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की जीडीपी में उछाल, FY26 में 7.7% की तेजी; 2028 में भी जारी रहेगी रफ्तार?

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की जीडीपी में उछाल, FY26 में 7.7% की तेजी; 2028 में भी जारी रहेगी रफ्तार?

by Amit Dubey 6 June 2026, 10:45 AM IST (Updated 6 June 2026, 11:09 AM IST)
6 June 2026, 10:45 AM IST (Updated 6 June 2026, 11:09 AM IST)
India GDP

India GDP: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक अच्छी खबर सामने आई है. जी हां, इस संकट के बीच देश की जीडीपी में जबरदस्त उछाल दिखा है.

सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था में जनवरी-मार्च तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो मजबूत घरेलू मांग और सरकारी व्यय के कारण पूर्वानुमानों से अधिक थी. हालांकि तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चैन के बाधित होने से भविष्य की संभावनाओं पर संदेह पैदा होने लगा है.

क्या कहते हैं आंकड़ें?

जानकारी के अनुसार, भारत की जीडीपी में वृद्धि पिछले वर्ष की तुलना में 7 प्रतिशत और पिछली तिमाही में 8 प्रतिशत रही. स्वस्थ उपभोग और मजबूत निवेश गतिविधियों के कारण, पूरे वर्ष की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025 के 7.1 प्रतिशत से बढ़कर 7.7 प्रतिशत हो गई.

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, “वास्तविक जीडीपी या स्थिर कीमतों पर जीडीपी का स्तर 2025-26 में 323.12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि वर्ष 2024-25 के लिए जीडीपी का पहला संशोधित अनुमान (एफआरई) 299.89 लाख करोड़ रुपये था.”

वर्तमान कीमतों पर जीडीपी का स्तर 2025-26 में 346.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2024-25 में यह 318.07 लाख करोड़ रुपये था, जो 8.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है.

2028 में 7% से अधिक की विकास दर का अनुमान- वी अनंत नागेश्वरन

वहीं, शुक्रवार को मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने कहा कि यदि बाहरी परिस्थितियों में सुधार होता है तो भारत वित्त वर्ष 2028 में 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर पर वापस लौट सकता है.
बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऊर्जा और कमोडिटी की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में संघर्ष से जुड़ी सप्लाई चैन में लगातार रुकावटों का हवाला देते हुए, 2026-27 (वित्त वर्ष 2027) के लिए अपने जीडीपी वृद्धि पूर्वानुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है.

वी अनंत नागेश्वरन ने कहा, “भले ही आरबीआई के पूर्वानुमान के अनुसार विकास दर 7 प्रतिशत से नीचे गिर जाए… मैक्रो स्थिरता उपायों और आपूर्ति आश्वासनों से हम वित्त वर्ष 2028 में या बाहरी परिस्थितियों में सुधार होते ही 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर पर वापस आ जाएंगे.” उन्होंने आगे कहा कि यह उम्मीद इस धारणा पर आधारित है कि वित्त वर्ष 2028 से पहले 28 फरवरी से पहले की स्थिति बहाल हो जाएगी. उन्होंने आगे कहा, “यदि ये स्थितियां जारी रहती हैं, तो हम अगले वित्तीय वर्ष के अनुमान पर पुनर्विचार करेंगे.”

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News Source: PTI

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