Iran-US MoU Signed: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध की समाप्ति हो चुकी है. बीते 28 फरवरी से पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब खत्म हो रहा है. इसके साथ ही भारत समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुल रहा है. इसके खुलते ही पहले की तरह तेल और गैस समेत अन्य जरूरी चीजों की आवाजाही और सप्लाई होने लगेगी. इससे महंगाई कम होगी और देश के नागरिकों को राहत मिलेगी.
इस बीच ईरान और अमेरिका ने समझौता ज्ञापन (Memorandum of Understanding) पर साइन कर दिया है. जी हां, जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के बाद फ्रांस में अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. बुधवार रात को डिनर के दौरान अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया. इस मौके पर फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे. इस ऐतिहासिक पल का वीडियो शेयर करते हुए व्हाइट हाउस ने कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय में ईरान समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं.”
🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF
— The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026
इस समझौते की जानकारी ईरान ने भी दी है. भारत में ईरानी दूतावास के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस डील की जानकारी दी गई है. ईरानी एम्बेसी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (Masoud Pezeshkian) की तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “राष्ट्रपति पेजेशकियान और उनके अमेरिकी समकक्ष ट्रंप ने तेहरान और वाशिंगटन के बीच MoU पर डिजिटली और रिमोटली से हस्ताक्षर किए.”
President Pezeshkian and his US counterpart Trump signed the MoU between Tehran and Washington digitally and remotely. pic.twitter.com/ratIJxoeLG
— Iran in India (@Iran_in_India) June 18, 2026
हालांकि, दोनों देशों के प्रतिनिधि शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आमने-सामने होकर औपचारिक हस्ताक्षर समारोह में इसकी औपचारिकताएं पूरी करेंगे. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान दोनों के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं और उन्हें मध्यस्थ के रूप में मान्यता दी है. शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान और सह-मध्यस्थ कतर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह की मेजबानी करेंगे.
अब आइए जानते हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच साइन हुए इस Memorandum of Understanding (MoU) की 14 बड़ी बातें क्या हैं. इससे पहले हम ट्रंप और मैक्रों के उस बयान और बात को जानेंगे जो MoU साइन करने के बाद आए हैं. उसके बाद हम यह जानेंगे कि ईरान-अमेरिका डील में किसे क्या मिला.
क्या होता है MoU?
ईरान और अमेरिका के बीच फाइनल डील होने से पहले MoU (Memorandum of Understanding) पर साइन हुआ है. दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने डिजीटली इसपर साइन किया है. हालांकि, ईरान और अमेरिका के बीच 19 जून को स्विट्जरलैंड में एक आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह का आयोजन होगा.
अब बात MoU की करें तो यह दो या दो से अधिक पक्षों के बीच सहयोग की शर्तों का एक आधिकारिक दस्तावेज है. यह गैर बाध्यकारी (Non-binding) समझौते के रूप में होता है. यह दोनों पक्षों के टारगेट, जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं को परिभाषित करता है. किसी भी समझौते का यह फाइनल दस्तावेज नहीं होता, हालांकि, किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने में इसकी अहम भूमिका जरूर होती है. मतलब कि MoU भविष्य में किसी भी डील के लिए एक फ्रेमवर्क स्थापित करता है.
ठीक ऐसा ही मामला ईरान और अमेरिका के बीच इस समझौते में हुआ है. शुक्रवार को आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले दोनों देशों ने एमओयू पर साइन कर दिया है. अब MoU पर हस्ताक्षर करने के बाद और लागू कानून के तहत अमेरिका और ईरान फाइनल समझौते के संबंध में बातचीत शुरू करेंगे. उसके बाद फाइनल डील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा मंजूरी दी जाएगी.

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साइन के बाद ट्रंप और मैक्रों क्या बोले?
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं. फ्रांस के वर्साय से निकलते समय ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “इस पर हस्ताक्षर हो गए हैं.” उन्होंने आगे कहा, “मैंने इस पर वर्साय में हस्ताक्षर किए.” ट्रंप ने कहा, “अभी-अभी हस्ताक्षर किए हैं.” वहीं, व्हाइट हाउस ने यह भी कहा कि ट्रंप ने वर्साय में ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, हालांकि उस समय कैमरे मौजूद नहीं थे. इस बीच, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.
वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर ट्रंप के द्वारा ईरान के साथ डील पर साइन करते हुए वीडियो को शेयर करते हुए कहा है, “राष्ट्रपति ट्रंप ने आज रात वर्साय में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते पर हस्ताक्षर किए. यह समझौता स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति देता है.” उन्होंने आगे लिखा, “यह हमारे देशवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे जल्द ही ऊर्जा की कीमतों में कमी आएगी.”
Le Président Trump a signé ce soir à Versailles l’accord entre l’Iran et les États-Unis.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026
Cet accord ouvre la voie à une paix durable et permet la réouverture du détroit d’Ormuz.
C’est un pas important dans la bonne direction pour nos compatriotes… pic.twitter.com/b1XgZrBv0m
अमेरिकी अधिकारियों ने शेयर की समझौते की बातें
मालूम हो कि ईरान और अमेरिका के इस समझौते के दस्तावेज में क्या लिखा है, इसको लेकर कई दिनों से अटकलें लगाई जा रही थीं. अभी तक आधिकारिक रूप से इस समझौते के दस्तावेजों को सामने नहीं लाया गया था और इसकी गोपनीयता बनाई रखी गई थी. लेकिन बुधवार को वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने पत्रकारों के सामने ईरान के साथ हुए समझौता ज्ञापन को पढ़ा. शुक्रवार को होने वाले औपचारिक हस्ताक्षर समारोह से पहले, अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर समझौते को पढ़कर सुनाया.
बाद में ईरानी सरकारी टीवी ने समझौते का वह Text जारी किया जो काफी हद तक अमेरिका द्वारा जारी किए गए Text से मिलता-जुलता था. इस बीच दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान के नेताओं ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और यह “तत्काल प्रभाव से लागू होगा.”

ईरान-अमेरिकी डील में ये 14 बातें शामिल
- अमेरिका और ईरान एवं वर्तमान युद्ध में उनके सहयोगी इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करके लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों की तत्काल और स्थायी समाप्ति की घोषणा करते हैं. अब से एक-दूसरे के विरुद्ध कोई युद्ध या सैन्य ऑपरेशन शुरू न करने तथा एक-दूसरे के विरुद्ध बल प्रयोग या धमकी से बचने व लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सुनिश्चित करने का वचन देते हैं. फाइनल डील में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध की स्थायी समाप्ति और इस अनुच्छेद के अन्य प्रावधानों की पुष्टि की जाएगी.
- संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान एक दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने और एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने से परहेज करने का वचन देते हैं.
- संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान आपसी सहमति से विस्तारित की जा सकने वाली अधिकतम 60 दिनों की अवधि में फाइनल डील पर बातचीत करने और उसे प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
- इस समझौता ज्ञापन (Iran-US MoU) पर हस्ताक्षर होते ही, अमेरिका ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या बाधा को हटाना शुरू कर देगा और 30 दिनों के भीतर यूएस नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह समाप्त कर देगा. इस अवधि के दौरान, जहाजों का आवागमन ईरान के इस्लामी गणराज्य द्वारा युद्ध-पूर्व यातायात की बहाल की जा रही संख्या के अनुपात में होगा. अमेरिका फाइनल समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान के निकट से अपनी सेनाओं को हटाने का वचन देता है.
- इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने पर, ईरान फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और इसके विपरीत, केवल 60 दिनों के लिए बिना किसी शुल्क के वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सर्वोत्तम प्रयास करेगा. वाणिज्यिक जहाजों का आवागमन तुरंत शुरू हो जाएगा और ईरान के इस्लामी गणराज्य द्वारा तकनीकी और सैन्य बाधाओं को दूर करने और बारूदी सुरंगों को हटाने की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इसे 30 दिनों के भीतर बहाल कर दिया जाएगा. ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में भविष्य के प्रशासन और समुद्री सेवाओं को परिभाषित करने के लिए ओमान सल्तनत के साथ बातचीत करेगा, जिसमें लागू अंतरराष्ट्रीय कानून और होर्मुज जलडमरूमध्य के तटीय राज्यों के संप्रभु अधिकारों के अनुरूप अन्य फारस की खाड़ी के तटीय राज्यों के साथ चर्चा की जाएगी.
- संयुक्त राज्य अमेरिका क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस्लामिक गणराज्य ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर की एक निश्चित पारस्परिक सहमति वाली योजना विकसित करने का वचन देता है. इस योजना के कार्यान्वयन की प्रक्रिया को 60 दिनों के भीतर फाइनल समझौते के हिस्से के रूप में अंतिम रूप दिया जाएगा. संबंधित वित्तीय लेनदेन के लिए आवश्यक सभी लाइसेंस, छूट और अनुमतियां संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा प्रदान की जाएंगी.
- संयुक्त राज्य अमेरिका फाइनल समझौते के हिस्से के रूप में एक सहमत कार्यक्रम के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों, आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के प्रस्तावों और सभी एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों, प्राथमिक और माध्यमिक सहित ईरान के खिलाफ सभी प्रकार के प्रतिबंधों को समाप्त करने का वचन देता है. इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका उपर्युक्त उल्लिखित प्रतिबंधों की समाप्ति के मुद्दे के महत्वपूर्ण महत्व को स्वीकार करते हैं और इन मुद्दों पर पारस्परिक सहमति प्राप्त करने के लिए वार्ता में तुरंत इन मुद्दों को संबोधित करने के अपने इरादे व्यक्त करते हैं.
- ईरान इस बात की पुष्टि करता है कि वह परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करेगा और न ही उनका विकास करेगा. संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान ने भंडारित समृद्ध सामग्री के निपटान को एक ऐसे तंत्र के माध्यम से हल करने पर सहमति व्यक्त की है, जिस पर अनुच्छेद 7 में उल्लिखित अनुसूची के अनुसार पारस्परिक रूप से सहमति होगी और न्यूनतम कार्यप्रणाली आईएईए की देखरेख में साइट पर डाउनब्लेंडिंग होगी.
दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए कि फाइनल समझौते में एक संतोषजनक रूपरेखा पर सहमति बनने के बाद, संवर्धन के मुद्दे और ईरान की परमाणु आवश्यकताओं से संबंधित अन्य पारस्परिक रूप से सहमत मामलों पर चर्चा की जाएगी.
फाइनल समझौते में इस अनुच्छेद के प्रावधानों की पुष्टि की जाएगी. अमेरिका और ईरान दोनों ही उपर्युक्त परमाणु मुद्दों के महत्व को स्वीकार करते हैं और इन मुद्दों पर पारस्परिक सहमति प्राप्त करने के लिए वार्ता में इनका तुरंत समाधान करने का इरादा व्यक्त करते हैं. - फाइनल समझौते की प्रतीक्षा में, अमेरिका और ईरान यथास्थिति बनाए रखने पर सहमत हैं. ईरान का इस्लामी गणराज्य अपने परमाणु कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति को बनाए रखेगा और संयुक्त राज्य अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा तथा क्षेत्र में अतिरिक्त सेना तैनात नहीं करेगा.
- संयुक्त राज्य अमेरिका यह वचन देता है कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद और प्रतिबंधों की समाप्ति तक अमेरिकी वित्त विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और व्युत्पन्न पदार्थों के निर्यात और बैंकिंग लेनदेन, बीमा, परिवहन आदि सहित सभी संबंधित सेवाओं के लिए छूट जारी करेगा.
- संयुक्त राज्य अमेरिका इस समझौता ज्ञापन के लागू होने पर ईरान के फ्रीज हुए या प्रतिबंधित धन और एसेट्स को पूरी तरह से उपयोग के लिए उपलब्ध कराने का वचन देता है. अमेरिका और ईरान के इस्लामी गणराज्य वार्ता के दौरान इन निधियों की रिहाई से संबंधित प्रक्रियाओं पर आपसी सहमति से सहमत होंगे.
चाहे ये धनराशि मूल खाते में रखी जाए या स्थानांतरित की जाए, उसे ईरान के इस्लामी गणराज्य के केंद्रीय बैंक द्वारा नामित किसी भी अंतिम लाभार्थी को भुगतान करने के लिए पूरी तरह से उपयोग में लाया जा सकेगा. अमेरिका तदनुसार सभी आवश्यक लाइसेंस और प्राधिकरण जारी करने का वचन देता है. - संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान इस बात पर सहमत हैं कि इस समझौता ज्ञापन (MoU) के सफल कार्यान्वयन और फाइनल समझौते के भविष्य के अनुपालन की निगरानी के लिए एक कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा.
- इस MoU पर हस्ताक्षर करने के बाद और इस समझौता ज्ञापन के अनुच्छेद 1, 4, 5, 10 और 11 के कार्यान्वयन की शुरुआत और इन उपायों के निरंतर कार्यान्वयन के अधीन, संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक गणराज्य ईरान अन्य अनुच्छेदों पर फाइनल समझौते के संबंध में बातचीत शुरू करेंगे.
- फाइनल डील को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव द्वारा मंजूरी दी जाएगी.
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ईरान-अमेरिका डील में किसे क्या मिला?
ईरान और अमेरिका डील में किसे क्या मिला, किसकी कितनी जीत और किसकी कितनी हार हुई, अब उसके बारे में हम बात करेंगे. इनमें ईरान, अमेरिका और दुनिया शामिल हैं.

अमेरिका को क्या मिला?
- ईरान-अमेरिका डील में अमेरिका की सबसे बड़ी जीत यह है कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है.
- ईरान ने परमाणु कार्यक्रम के तहत परमाणु हथियार नहीं बनाने की बात मान ली है.
- इससे क्षेत्रीय तनाव में कमी आने की संभावना है. अमेरिका के साथ इजरायल के लिए भी यह राहत वाली बात है.
- ईरान के इस कदम से परमाणु खतरे के साथ मध्य पूर्व में युद्ध का जोखिम कम हुआ है.
- ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित और शुल्क-मुक्त आवागमन देगा.

ईरान को क्या मिला?
- इस डील में ईरान को अमेरिका से काफी अधिक फायदा होता हुआ दिखा है.
- ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत मिली है. अमेरिका ईरान पर लगे संयुक्त राष्ट्र, IAEA और अमेरिकी प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करेगा.
- अमेरिका ईरानी तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और संबंधित बैंकिंग-बीमा सेवाओं के लिए छूट देगा.
- अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए फंड और एसेट्स को उपयोग के लिए उपलब्ध कराएगा.
- ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के निवेश की संभावना है. अमेरिका और सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण हेतु कम से कम 300 अरब डॉलर की विकास योजना बनाएंगे.
- फंड से ईरान की चौपट हुई अर्थव्यवस्था को बड़े सहारे और वैश्विक व्यापार में वापसी की संभावना है.
- अमेरिका के द्वारा सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर तत्काल और स्थायी युद्ध समाप्ति, भविष्य में सैन्य कार्रवाई न करने का वादा है.
- अमेरिका 30 दिनों में ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी समाप्त करेगा और क्षेत्र से अपनी सेनाएं हटाएगा.

दुनिया को क्या मिला?
- दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव में कमी आएगी.
- भारत सहित कई देशों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से फायदा होगा.
- दुनिया के कई देश इस समुद्री रास्ते से बिना किसी रोक-टोक के तेल, गैस समेत अन्य चीजों की सप्लाई या व्यापार कर सकेंगे.
- पश्चिम एशिया में युद्ध व तनाव खत्म होने से कच्चे तेल की कीमत और गैस की कीमत में गिरावट आ सकती है. इससे दुनिया में महंगाई से राहत मिलेगी.
- इस डील से दुनिया के लिए राहत की बात होगी कि आने- वाले समय में ईरान-अमेरिका में संबंध और अच्छे या सुधरने की संभावना बढ़ेगी. इससे दुनिया में शांति बनी रहेगी.
- इस डील से दुनिया को कई फायदे होंगे, जिसमें आसान तेल आपूर्ति, ग्लोबल ट्रे़ड में बढ़ोतरी, मध्य पूर्व में स्थिरता, समुद्री मार्गों में शिपिंग सुरक्षा और महंगाई पर नियंत्रण हो सकेगा.
- दुनिया के कई शेयर बजारों को मजबूती मिलेगी. ग्लोबल अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी.
‘अभी-अभी साइन किए हैं…’, फ्रांस के वर्साय में ट्रंप ने ईरान समझौता ज्ञापन पर किया हस्ताक्षर
