UP Mayawati: यूपी चुनाव से पहले BSP सुप्रीमो ने सख्त कदम उठाते हुए दो लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया. दोनों के खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई की गई. BSP अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ और पार्टी कोऑर्डिनेटर रणधीर सिंह बेनीवाल को बार-बार अनुशासनहीनता और संगठनात्मक निर्देशों के उल्लंघन के कारण पार्टी से निकालने की घोषणा की.
अनुशासनहीनता पर कार्रवाई
X पर एक पोस्ट में मायावती ने कहा कि सिद्धार्थ, जो उनके भतीजे आकाश आनंद के ससुर हैं, उन्हें पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निकाला गया था. यह कार्रवाई खासकर टिकट बंटवारे में पार्टी की राज्य इकाई के साथ तालमेल के मुद्दे पर की गई थी. उन्होंने कहा कि बाद में उन्हें पार्टी में वापस ले लिया गया था, क्योंकि उन्होंने नेतृत्व को भरोसा दिलाया था कि ऐसी गलतियां दोबारा नहीं होंगी. मायावती के अनुसार, इसके बाद सिद्धार्थ को पार्टी के संगठनात्मक आधार को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के बाहर के राज्यों में जिम्मेदारियां सौंपी गईं. हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल से अनुशासनहीनता और पार्टी के निर्देशों के उल्लंघन की शिकायतें आती रहीं.
दोबारा वापसी की उम्मीद खत्म
उन्होंने कहा कि शनिवार को सिद्धार्थ को पार्टी की सभी ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, लेकिन उनके उत्तर प्रदेश लौटने की अफ़वाहें जानबूझकर फैलाई जा रही थीं ताकि संगठन में भ्रम पैदा किया जा सके और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए BSP के प्रचार में बाधा डाली जा सके. मायावती ने कहा कि पार्टी और आंदोलन के हित में, अशोक सिद्धार्थ को तत्काल प्रभाव से BSP से निकाल दिया गया है और भविष्य में उन्हें पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा. BSP प्रमुख ने अनुशासनहीनता और पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने के कारण पार्टी कोऑर्डिनेटर बेनीवाल को भी पार्टी से निकालने की घोषणा की.
रामजी गौतम बने रहेंगे पंजाब के प्रभारी
उन्होंने कहा कि बेनीवाल को पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में संगठनात्मक ज़िम्मेदारियां सौंपी गई थीं. मायावती ने कहा कि राज्यसभा सांसद रामजी गौतम, जिन्हें पार्टी में राष्ट्रीय स्तर पर हुए फेरबदल में नई संगठनात्मक ज़िम्मेदारियां दी गई थीं, वे पंजाब विधानसभा चुनाव और उसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव तक पंजाब के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी प्रभारी बने रहेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि BSP नेतृत्व की यह नीति है कि UP के जो वरिष्ठ पदाधिकारी और कोऑर्डिनेटर अभी दूसरे राज्यों में ज़िम्मेदारियां संभाल रहे हैं, उन्हें राज्य में कोई संगठनात्मक भूमिका नहीं दी जाएगी.
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News Source: PTI
