G7 Joint Statement: फ्रांस में आयोजित जी7 के 52वें शिखर सम्मेलन का अब समापन हो चुका है. यह 15 से 17 जून 2026 को एवियन-लेस-बैंस शहर में आयोजित किया गया था. समिट का मुख्य विषय ‘प्रमुख अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिलकर काम करना’ था. वहीं, दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में जारी तनाव और संघर्ष के बीच इस शिखर सम्मेलन पर सभी की नजरें थीं.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन में जी7 के सभी सदस्य देश और यूरोपीय संघ के अलावा भारत और यूक्रेन भी शामिल हुए. प्रेसिडेंट मैक्रों ने इस समिट में भाग लेने के लिए पीएम मोदी को स्पेशल निमंत्रण दिया था. बता दें कि ग्रुप ऑफ 7 (जी7) विश्व की सात सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक ग्रुप है, जिसमें कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं. यूरोपीय संघ भी इस समूह का सदस्य है.
फ्रांस के शहर एवियन-लेस-बैंस में आयोजित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन का अब समापन हो चुका है. इसकी समाप्ति के दौरान जी7 सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से बयान जारी किए. इसमें यूक्रेन, पश्चिम एशिया से लेकर इंडो-पैसिफिक तक के मुद्दों पर बातें कही गईं हैं. आइए जानते हैं कि जी7 शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में कौन-कौन सी बड़ी और खास बातें शामिल हैं. इसके साथ ही जी7 के इतिहास और संगठन से जुड़ी कुछ खास बातें भी जानेंगे.
यूक्रेन-रूस युद्ध पर जी7 ने क्या कहा?
जी7 की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई संयुक्त बयान की जानकारी के अनुसार, जी7 सदस्य देशों ने कई बातें कही हैं. सबसे पहले हम यूक्रेन-रूस युद्ध की बात करेंगे. बयान में कहा गया- हम, जी7 के नेता, यूक्रेन की स्वतंत्रता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपने अटूट समर्थन में एकजुट हैं. हम अपने महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और सांस्कृतिक विरासत पर हमलों से पीड़ित यूक्रेनी आबादी के साथ अपनी एकजुटता की पुष्टि करते हैं. हम हाल के महीनों में युद्धक्षेत्र में यूक्रेन की प्रगति की सराहना करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं कि अब एक नई गति प्राप्त हुई है. हम यूक्रेन को लाइसेंस का लाभ देने पर भी विचार करने के लिए तैयार हैं ताकि यूक्रेन अपने सैन्य उत्पादन में वृद्धि कर सके.
हम रूसी युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस संदर्भ में, हम तेल और गैस क्षेत्रों सहित अपने प्रतिबंधों को और मजबूत करेंगे. हमारा मानना है कि अतिरिक्त उपाय करने का यह सही समय है, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक समझौता किया है जिसका हम समर्थन करते हैं.

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पश्चिम एशिया में ईरान-यूएस डील का स्वागत- जी7
पश्चिम एशिया में ईरान-यूएस शांति डील पर भी जी7 सदस्य देशों ने संयुक्त बयान जारी किया. इसमें कहा गया- हम मध्य पूर्व में मौजूद अभूतपूर्व प्रगति और अवसर को पहचानते हैं. हम अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की घोषणा का स्वागत करते हैं, जो राष्ट्रपति ट्रंप के सशक्त नेतृत्व में मध्यस्थ देशों के समर्थन से संपन्न हुआ है. यह समझौता ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने और उसकी क्षेत्रीय और बैलिस्टिक गतिविधियों से संबंधित खतरों से निपटने का एक ऐतिहासिक अवसर प्रदान करता है.
हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि बिना किसी प्रतिबंध या शुल्क के ट्रांजिस्ट का अधिकार अंतरराष्ट्रीय व्यापार का आधार है. हम इस बात से सहमत हैं कि फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व में शुरू की गई बहुराष्ट्रीय, स्वतंत्र और रक्षात्मक पहल, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा करके, वाणिज्यिक जहाजरानी संचालकों को आश्वस्त करके और सभी खदानों को हटाने के सत्यापन में सहायता करके, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात को फिर से शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
हम राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा संपन्न किए गए समझौता ज्ञापन के फलस्वरूप एक मजबूत और व्यापक राजनयिक समझौते का पुरजोर समर्थन करते हैं, जो क्षेत्र में सभी के लिए शांति और सुरक्षा ला सके. हम इस बात पर जोर देते हैं कि इस दिशा में वार्ता ईरान द्वारा क्षेत्र और उससे परे उत्पन्न खतरों से निपटने और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि वे कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त न कर सकें. हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार प्राप्त नहीं करेगा.
लेबनान और गाजा पर जी7 ने क्या कहा?
जी7 के संयुक्त बयान में कहा गया- लेबनान में, हम तत्काल और मजबूत सीजफायर के माध्यम से, हिज्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और हथियारों पर एकाधिकार को समाप्त करने के लेबनानी नेतृत्व के प्रयासों का समर्थन करते हैं. उचित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी के साथ लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने का भी समर्थन करते हैं.
गाजा में, हम मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण प्रयासों में तेजी लाएंगे और संबंधित राजनीतिक और सुरक्षा उपायों को शीघ्रता से लागू करेंगे. हम वेस्ट बैंक में हिंसा समाप्त करने का आह्वान करते हैं.

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स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर जोर
जी7 के संयुक्त बयान में इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) को लेकर भी बड़ी बातें कही गईं. बयान में जी7 सदस्य देशों ने कहा- हम कानून के शासन पर आधारित एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्व पर जोर देते हैं. हम पूर्वी और दक्षिण चीन सागर एवं ताइवान जलडमरूमध्य में यथास्थिति को बदलने के किसी भी एकतरफा प्रयास, विशेष रूप से बल या दबाव के माध्यम से किए जाने वाले प्रयासों का पुरजोर विरोध करते हैं, जिनका समाधान केवल संवाद के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए.
हम उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं.
हम राष्ट्रपति मैक्रों द्वारा 11 जून 2026 को चीन की भागीदारी के साथ आयोजित वैश्विक विकास सम्मेलन का स्वागत करते हैं. हम अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ वैश्विक असंतुलन के कारणों और उनके समाधान की आवश्यकता पर सहमति बनाने में अपनी साझा रुचि की पुष्टि करते हैं. हम अमेरिका की मेजबानी में जी20 सम्मेलन और अन्य प्रासंगिक मंचों पर इन प्रयासों को जारी रखेंगे.
प्रवासियों व मानव तस्करी को रोकने पर जोर
जी7 सदस्य देशों ने प्रवासियों व मानव तस्करी को रोकने पर भी अपनी बात कही. बयान में कहा गया- हम, जी7 के नेता, प्रवासियों की तस्करी को रोकने और उसका मुकाबला करने के अपने निरंतर प्रयासों की पुष्टि करते हैं. हम प्रवासियों की तस्करी, मानव तस्करी और अन्य संबंधित अपराधों से लाभ कमाने वाले संगठित आपराधिक नेटवर्क को रोकने, उनका मुकाबला करने और उन्हें नष्ट करने के साथ-साथ संगठित आपराधिक उद्यमों के व्यावसायिक मॉडलों को बाधित करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हैं.
प्रवासी तस्करी और मानव तस्करी गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराध हैं जो राज्यों के अपनी सीमाओं को नियंत्रित करने के संप्रभु अधिकार को कमजोर करते हैं और तस्करी और मानव तस्करी के शिकार व्यक्तियों को जानलेवा जोखिमों में डालते हैं. हम संगठित अवैध प्रवासन से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम प्रवासियों के साथ होने वाले सभी प्रकार के दुर्व्यवहार और शोषण के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम शरणार्थियों और जबरन विस्थापित व्यक्तियों सहित सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं.

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नशीली पदार्थों की तस्करी के खिलाफ लड़ाई तेज- जी7
जी7 सदस्य देशों ने अपने संयुक्त बयान में नशीली पदार्थों के खिलाफ लड़ाई को और तेज करने की अपनी बात कही है. बयान में कहा गया- हम, जी7 के नेता, मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. जी7 के सहयोगी देश, ब्राजील और दक्षिण कोरिया भी इस घोषणा का समर्थन करते हैं. हाल के वर्षों में वैश्विक मादक पदार्थों की तस्करी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण रिकॉर्ड स्तर का उत्पादन, संगठित अपराध समूहों की अनुकूलनशीलता और वैश्विक मांग में वृद्धि है. यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा और बढ़ता खतरा है, जो भ्रष्टाचार और हिंसा को बढ़ावा देता है.
हम मानते हैं कि इस अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध से निपटना हमारे समाजों, हमारी आबादी के स्वास्थ्य, हमारी आर्थिक समृद्धि और वैश्विक सुरक्षा की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है. ये शातिर अवैध नेटवर्क सीमाओं को नहीं पहचानते. वे अंतरराष्ट्रीय कमजोरियों का फायदा उठाते हैं. इस खतरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय प्रयासों को समर्थन देने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग महत्वपूर्ण है.

जी7 से जुड़ी खास और बड़ी बातें
- सन् 1975 में G6 (जो अब G7 है) का गठन हुआ था. तब तेल के पहले संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर आर्थिक सहयोग की जरूरत को उजागर किया था. यह तेल संकट 1973 में आया था. इस ग्रुप के गठन के बाद पहला शिखर सम्मेलन फ्रांस के रामबौइलेट में हुआ था.
- साल 1975 में जी6 का गठन हुआ था, लेकिन अगले साल ही यानी कि इसके गठन के एक साल बाद ही कनाडा भी इसका सदस्य हो गया, जिसके बाद जी6 से जी7 बन गया.
- G7 देश हर साल शांति और सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और उसकी स्थिरता, विकास, पर्यावरण में बदलाव और नई तकनीकों जैसे अहम मुद्दों पर मिलकर काम करने के लिए बैठक करते हैं.
- इस बार का जी7 का सालाना बैठक फ्रांस की अध्यक्षता में हो रहा है. यह शिखर सम्मेलन 15 से 17 जून को रूस के एवियन-लेस-बैंस शहर में आयोजित किया गया है.
- साल 1998 में रूस के शामिल होने से जी7 को जी8 कहा जाने लगा. लेकिन साल 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया. इसके बाद अमेरिका सहित कई पश्चिमी देश रूस के खिलाफ हो गए. रूस पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करने के भी आरोप लगे. इन सभी वजहों से रूस को जी8 से एक तरह से हटा दिया गया. उसके बाद जी8 फिर से जी7 हो गया.
- G7 को ‘ग्रुप ऑफ 7’ कहते हैं. इनमें 7 देश कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका शामिल हैं. 1977 से ही यूरोपीय संघ G7 के कामकाज में पूरी तरह से शामिल रहा है.
- जी7 की खासियत यह है कि इसका कोई कानूनी अस्तित्व, स्थायी सचिवालय या पदेन सदस्य नहीं हैं. इसका एकमात्र नियम यह है कि हर साल सात देशों में से कोई एक देश इसकी अध्यक्षता करता है.
- अध्यक्ष देश ही समूह के कामकाज के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराता है और अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं तय करता है. इस व्यवस्था को ‘रोटेटिंग प्रेसिडेंसी’ (बारी-बारी से अध्यक्षता) कहा जाता है.
- G7 की ताकत इसका छोटा आकार और आपसी भरोसे का वह रिश्ता है जो सालों-साल बना है. इसी भरोसे की वजह से अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख खुलकर और सीधे बातचीत कर पाते हैं, भले ही उनके बीच असहमति हो.
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