UPI MDR: अब तक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगाया जाता था, चाहे अमाउंट कितना भी हो. लेकिन अब सरकार बड़े अमाउंट पर अतिरिक्त चार्ज लगाने की तैयारी कर रही है. सरकार ने बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि वे Rs 2,000 तक के UPI ट्रांजैक्शन या RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर चार्ज न लगाएं. लेकिन 2,000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर चार्ज लागू होंगे.
14 सितंबर के एक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर, RuPay डेबिट कार्ड या UPI ट्रांजैक्शन के जरिए Rs 2,000 तक का पेमेंट करने या पाने वाले किसी व्यक्ति पर कोई चार्ज नहीं लगाएगा. यह नोटिफिकेशन पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 के सेक्शन 10 A में बदलाव के बाद आया है, जो UPI और दूसरे नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट मोड के जरिए पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के लिए एक फ्रेमवर्क देता है. यह अमेंडमेंट बिल पार्लियामेंट के मॉनसून सेशन में पास हुआ था, जो 13 अगस्त, 2026 को खत्म हुआ.
किसे और कितना देना होगा चार्ज
सरकार ने साफ किया है कि UPI पॉलिसी में बदलाव बाहरी दबाव के कारण किए जा रहे हैं. वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि UPI के जरिए पेमेंट करने वाले आम कस्टमर्स पर कोई ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं लगेगा. P2P पेमेंट या एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करना, पूरी तरह से फ्री रहेगा, चाहे कितना भी बड़ा अमाउंट हो. यह MDR चार्ज व्यापारियों और दुकानदारों पर लगेगा. हालांकि इसका असली बोझ आम आदमी की जेब पर पड़ने की संभावना है. क्योंकि व्यापारी ग्राहकों से इसकी भरपाई करवा सकते हैं. वित्त मंत्रालय के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, ₹2,000 से ज्यादा के बड़े UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.30% से 0.40% का MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव है. नए नियमों को अभी लागू नहीं किया गया है.
चार्ज लगाने का कारण
चार्ज लगाने का कारण बताते हुए, सरकार ने एक बयान में कहा कि तेजी से बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम के साथ, सिस्टम को साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े और लगातार अपग्रेड की जरूरत है. मार्केट को बढ़ाने और सेल्फ सस्टेनेबिलिटी के लिए चार्ज जरूरी थे. ग्रोथ की अगली लहर के लिए सिर्फ सब्सिडी पर निर्भर रहना सही नहीं है और यह पक्का करने के लिए एक बैलेंस्ड फ्रेमवर्क की जरूरत है कि UPI मजबूत, सबको साथ लेकर चलने वाला और भविष्य के लिए तैयार रहे.
2016 में शुरु हुआ UPI
UPI को नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) चलाता है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की एक पहल है. यह लोगों के बीच रियल-टाइम पेमेंट करता है और कस्टमर्स को खरीदारी करते समय सीधे मर्चेंट्स को पेमेंट करने में मदद करता है. UPI अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है, जिसमें उज़्बेकिस्तान सबसे नया देश है. दूसरे देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरिशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस हैं. 25 अगस्त, 2016 को लॉन्च हुए UPI ने भारत के डिजिटल पेमेंट्स के माहौल को बदल दिया है, जिसमें ट्रांजैक्शन वैल्यू FY17 में Rs 0.07 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में लगभग Rs 314 लाख करोड़ हो गई है, जो एक दशक में 4,000 गुना से ज़्यादा की बढ़ोतरी है.
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