Home Top News खामिस, आभा और जिजान पर हूथियों ने बरसाई मिसाइलें, सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन तबाह

खामिस, आभा और जिजान पर हूथियों ने बरसाई मिसाइलें, सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन तबाह

by Neha Singh 15 September 2026, 8:47 AM IST (Updated 24 September 2026, 12:47 PM IST)
15 September 2026, 8:47 AM IST (Updated 24 September 2026, 12:47 PM IST)
Houthi Attack Saudi

Houthi Attack Saudi: यमन और सऊदी अरब के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है. सोमवार को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के कई शहरों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे. इन हमलों में 13 लोग घायल हुए, जबकि कम से कम सात रिहाइशी मकानों को भारी नुकसान पहुंचा. हमले के बाद सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई और आपातकालीन अलर्ट जारी किया गया.

तीन प्रमुख शहरों को निशाना बनाया

सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने हमले की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि हूतियों ने खामीस मुशायत, आभा और जिजान जैसे प्रमुख शहरों को निशाना बनाया. खमीस मुशेत स्थित एक सैन्य हवाई अड्डे पर भी दर्जनों मिसाइलें और ड्रोन दागे गए. बताया गया कि यहां विमान हैंगर, रडार सिस्टम, रनवे और गोला-बारूद के डिपो को निशाना बनाया गया. इस हमले का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सऊदी अरब की तेल सप्लाई पर भी चिंता बढ़ गई है. अधिकारियों के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा है. उसकी मरम्मत में कई हफ्ते लग सकते हैं. यह पाइपलाइन सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

तेल पाइपलाइन पर निर्भरता

ईरान के साथ बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग प्रभावित होने के कारण सऊदी अरब अपने कच्चे तेल को फारस की खाड़ी से हटाकर रेड सी के यानबू पोर्ट तक पहुंचाने के लिए ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर निर्भर है. करीब 1,200 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन देश के एक छोर से दूसरे छोर तक जाती है. यानबू पहुंचने के बाद तेल को टैंकरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है. गुरुवार को हुए एक ड्रोन हमले के बाद पाइपलाइन को बंद करना पड़ा. सऊदी अरब ने इस हमले के लिए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन की एक बड़ी पंपिंग सुविधा को भी नुकसान पहुंचा है और इसकी मरम्मत में तीन से पांच हफ्ते लग सकते हैं.

तेल की कीमतों में उछाल

नॉर्वे की रिसर्च फर्म रिस्टैड एनर्जी के अनुसार, अगस्त के अंत से यह पाइपलाइन रोजाना औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल ले जा रही थी. अगर इसका संचालन पूरी तरह रुकता है तो वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई और तेल की कीमतों में दो प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

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