India-Russia Relations: वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जहां अंतरराष्ट्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं, वहीं भारत और रूस के बीच पारंपरिक दोस्ती स्थिर और मजबूत बनी हुई है. यूक्रेन संकट, पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंधों और मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच भी दोनों देशों ने परिपक्व रूप से अपनी विशेष रणनीतिक साझेदारी बनाए रखी है. यह ऐतिहासिक संबंध न केवल दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
- कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र
- ईंधन की आजीवन आपूर्ति
- अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आपसी सहयोग
- भारत ने निभाई मित्रता
- नेहरू युग से मोदी युग तक
- आर्थिक और व्यापार संबंध
- राजनीतिक संबंध: शीर्ष स्तरीय बातचीत
- रक्षा एवं सामरिक संबंध
- रूसी विदेश मंत्री ने दोहराया अपना वादा
- रूस के सहयोग से बन रहा ऊर्जा संयंत्र

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र
तमिलनाडु में स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र भारत और रूस के बीच नागरिक परमाणु सहयोग का सबसे बड़ा और जीवंत उदाहरण है. इस विशाल परियोजना का निर्माण रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा एजेंसी ‘रोसाटॉम’ के तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है. संयंत्र में पहले से ही 1,000 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां (इकाइयां 1 और 2) सफलतापूर्वक काम कर रही हैं. फिलहाल यूनिट 3, 4, 5 और 6 का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है. जब संयंत्र पूरी तरह से तैयार हो जाएगा, तो इसकी कुल स्थापित क्षमता 6,000 मेगावाट होगी, जो इसे भारत का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा स्टेशन बना देगी.
ईंधन की आजीवन आपूर्ति
दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रोसाटॉम ने यूनिट 3 के लिए परमाणु ईंधन की पहली खेप भारत को दी. वर्ष 2024 में हस्ताक्षरित दीर्घकालिक समझौते के तहत रूस इस संयंत्र की इकाइयों को उनके पूरे सेवा जीवन के लिए निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी स्पष्ट कर दिया है कि रूस बाहरी प्रतिस्पर्धा या दबाव की परवाह किए बिना अपनी ऊर्जा प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह से पूरा करेगा.
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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आपसी सहयोग
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती युद्ध जैसी स्थिति और लाल सागर में सुरक्षा संकट के बीच रूस और भारत ने एक-दूसरे की रणनीतिक स्वायत्तता का सम्मान किया है. अमेरिका द्वारा ईरान और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद रूस ने भारत को नियमित और रियायती दरों पर कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले की आपूर्ति जारी रखी. इस कदम ने भारत को वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की आसमान छूती कीमतों से बचाया और देश की घरेलू अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति के झटकों से बचाया.
भारत ने निभाई मित्रता
पश्चिमी देशों के भारी कूटनीतिक दबाव के बावजूद भारत ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस के खिलाफ वोट नहीं किया और न ही प्रतिबंधों का समर्थन किया. भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना जारी रखेगा. रूस से तेल खरीदना जारी रखकर और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देकर भारत ने साबित कर दिया कि वह संकट के समय अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त का साथ नहीं छोड़ता.
नेहरू से मोदी युग तक
भारत-रूस (पूर्व सोवियत संघ) संबंधों का इतिहास दशकों पुराना है, जो समय के साथ और गहरा होता गया है. सोवियत संघ के साथ भारत के संबंधों की मजबूत नींव प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल में रखी गई थी. ऐसे समय में जब पश्चिमी देश भारत को भारी उद्योगों और तकनीकी क्षेत्र में मदद करने के लिए अनिच्छुक थे, तब सोवियत संघ ने भारत में भिलाई और बोकारो स्टील प्लांट, आईआईटी बॉम्बे की स्थापना और भारी मशीनरी उद्योगों के विकास में मदद की. 1971 की ऐतिहासिक ‘भारत-सोवियत शांति, मित्रता और सहयोग संधि’ ने इस रिश्ते को हमेशा के लिए अमर बना दिया.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में यह रिश्ता महज क्रेता-विक्रेता की पारंपरिक संरचना से बाहर निकलकर सह-विकास, सह-उत्पादन और रणनीतिक संरेखण के एक नए युग में प्रवेश कर गया है. पीएम मोदी ने भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ को सर्वोपरि महत्व दिया है, जिसकी रूस भी खुले दिल से सराहना करता है. मोदी युग में भारत और रूस के बीच दिसंबर 2025 में ‘रिलोस’ समझौता लागू हो गया है, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं रसद आपूर्ति के लिए एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, हवाई पट्टियों और नौसैनिक बंदरगाहों का उपयोग कर सकेंगी. यह समझौता भारत को आर्कटिक क्षेत्र और उत्तरी समुद्री मार्ग तक पहुंच प्रदान करता है.
आर्थिक और व्यापार संबंध
वित्तीय वर्ष 2024-2025 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 68.7 बिलियन डॉलर (68.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया. दिसंबर 2025 में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में दोनों नेताओं ने इस द्विपक्षीय व्यापार को वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का साझा लक्ष्य रखा है. पश्चिमी बैंकिंग प्रणाली पर प्रतिबंधों के बाद भारत और रूस ने अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपया और रूबल) में व्यापार निपटान की सुविधा के लिए प्रणाली विकसित की है.
राजनीतिक संबंध: शीर्ष स्तरीय बातचीत
दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन की एक मजबूत परंपरा है. दिसंबर 2025 में व्लादिमीर पुतिन की नई दिल्ली यात्रा के बाद संबंध और मजबूत हुए हैं. भारत और रूस शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और जी-20 जैसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंचों पर एक साथ काम करते हैं. रूस ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे का पुरजोर समर्थन किया है. रूस भारत और पाकिस्तान के बीच के मुद्दों को पूरी तरह से द्विपक्षीय मानता है और उनमें किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का विरोध करता है. वहीं, भारत हमेशा से बातचीत के जरिए यूक्रेन युद्ध के समाधान का पक्षधर रहा है.
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रक्षा एवं सामरिक संबंध
भारत के सैन्य आधुनिकीकरण में रूस सबसे बड़ा भागीदार है. अब दोनों देश न सिर्फ हथियारों का आयात-निर्यात करते हैं, बल्कि भारत में सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट, ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम और एके-203 असॉल्ट राइफल का सह-उत्पादन भी कर रहे हैं. वर्ष 2025 में दोनों देशों की सेनाओं के बीच भूमि, वायु और जल क्षेत्र में ‘INDRA-2025’ (INDRA-2025) और ‘AviaINDRA’ जैसे प्रमुख संयुक्त अभ्यास आयोजित किए गए, जो सैन्य स्तर पर दोनों के बीच गहरे समन्वय को दर्शाता है.
रूसी विदेश मंत्री ने दोहराया अपना वादा
रूसी विदेश मंत्री लावरोव ने गुरुवार को पीएम मोदी से मुलाकात की और यूक्रेन, पश्चिम एशिया संकट पर विचारों का आदान-प्रदान किया. लावरोव ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने वादा किया है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत को ऊर्जा आपूर्ति पर समझौते पूरे किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध दोस्ती पर आधारित हैं और ऐसा कोई परिदृश्य नहीं है जिसमें उनके रास्ते अलग हो जाएंगे.
नई दिल्ली की अपनी यात्रा से पहले रूस टुडे-इंडिया के साथ एक साक्षात्कार में लावरोव ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की. कहा कि वह दुनिया के अब तक के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक हैं.
रूस के सहयोग से परमाणु ऊर्जा संयंत्र
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि मैं गारंटी दे सकता हूं कि रूसी आपूर्ति पर लागू होने वाले भारत के हितों को नुकसान नहीं होगा. हम यह सुनिश्चित करने के लिए सब कुछ करेंगे कि यह अनुचित प्रतिस्पर्धा हमारे समझौतों को नुकसान न पहुंचाए. लावरोव ने बताया कि जब ऊर्जा आपूर्ति की बात आती है तो रूस भारत या किसी अन्य के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने में कभी असफल नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र हमारी प्रमुख परियोजना है. यह भारत की जरूरतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा करता है. इस परमाणु संयंत्र के लिए नई बिजली इकाइयों के निर्माण पर सहयोग जारी है. फिर भी, भारत को और अधिक की आवश्यकता है.

भारत-रूस के रास्ते एक
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि हम गैस, तेल और कोयले जैसे हाइड्रोकार्बन की आपूर्ति जारी रखे हैं. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र रूस की तकनीकी सहायता से तमिलनाडु में बनाया जा रहा है. निर्माण मार्च 2002 में शुरू हुआ. फरवरी 2016 से कुडनकुलम एनपीपी की पहली बिजली इकाई 1,000 मेगावाट की अपनी डिजाइन क्षमता पर लगातार काम कर रही है. रूसी राज्य मीडिया के अनुसार, संयंत्र के 2027 में पूरी क्षमता से काम शुरू करने की उम्मीद है. लावरोव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के अब तक के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक हैं. उनके पास महान ऊर्जा है और वे इसे सभी क्षेत्रों में अधिकतम संप्रभुता प्राप्त करने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्यों की ओर ले जाते हैं.
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कहा कि अर्थव्यवस्था, सेना, रक्षा, संस्कृति और भारत की सभ्यतागत संपत्ति का संरक्षण, जो किसी भी अन्य देश से बेजोड़ है. लावरोव ने कहा कि भारत और रूस के रिश्ते दोस्ती पर आधारित हैं और ऐसी कोई स्थिति नहीं है कि उनके रास्ते अलग हो जाएं. एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इन संबंधों के लिए सिर्फ एक शब्द नहीं है. इसलिए नहीं कि मानव भाषाएं पर्याप्त समृद्ध नहीं हैं, बल्कि इसलिए कि इतने पूर्ण और गहरे रिश्ते की कल्पना करना कठिन है.लावरोव ने कहा कि ऐसी स्थिति जहां हमारे रास्ते अलग-अलग हों, मौजूद ही नहीं है – यह अकल्पनीय है. यह कहते हुए कि ‘हिंदी-रूसी भाई-भाई’ (भारतीय और रूसी भाई-भाई हैं). उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा, राज कपूर, हालिया टेलीविजन शृंखला और फिल्में रूस में, हर जगह, हर कोने में बेहद लोकप्रिय हैं.
वैश्विक प्रतिबंधों और भू-राजनीतिक दबावों के इस दौर में भारत और रूस के रिश्ते अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए एक मिसाल है. कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसी दीर्घकालिक परियोजनाएं और तेल-रक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग साबित करता है कि भारत और रूस आने वाले दशकों में एक-दूसरे के सबसे विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार बने रहेंगे.
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