Delhi Crime: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और आतंकी फंडिंग से जुड़े एक कथित बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. AGS/क्राइम ब्रांच, द्वारका की कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क भारत से कनाडा तक अफीम की तस्करी कर रहा था और इसके जरिए हासिल रकम का इस्तेमाल हथियारों की खरीद तथा आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में किया जा रहा था.
पुलिस के मुताबिक, इस पूरे नेटवर्क के तार विदेश में बैठे नामित खालिस्तानी आतंकी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और उसके सिंडिकेट से जुड़े पाए गए हैं. जांच में पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक फैले नेटवर्क के साथ विदेशी हैंडलरों की भूमिका भी सामने आई है.
सामान के नीचे छिपी थी 3kg अफीम
मामले की शुरुआत 7 फरवरी 2026 को मिली एक गुप्त सूचना से हुई. क्राइम ब्रांच को जानकारी मिली थी कि दिल्ली से कनाडा भेजे जा रहे एक कूरियर पार्सल में सामान्य खाद्य सामग्री के बीच मादक पदार्थ छिपाकर भेजा जा रहा है. पुलिस टीम ने मुनि नगर/मोती नगर स्थित कूरियर कंपनी के परिसर में पहुंचकर संदिग्ध पार्सल को विदेश भेजे जाने से पहले ही रोक लिया. बाहर से पार्सल में स्नैक्स, बिस्किट, मिठाई और घरेलू सामान दिखाई दे रहा था, लेकिन जांच के दौरान कार्टन के अंदर विशेष रूप से तैयार किया गया फॉल्स बॉटम मिला. इसके नीचे 2.998 किलोग्राम अफीम छिपाई गई थी.
इसके बाद दर्ज FIR संख्या 24/2026, धारा 18/23 NDPS Act के तहत जांच शुरू की गई. क्राइम ब्रांच ने इसे केवल एक पार्सल की बरामदगी मानकर जांच बंद नहीं की, बल्कि कूरियर चेन, डिजिटल डिवाइस, बैंक लेनदेन और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल शुरू की.
एक पार्सल से खुलता गया पूरा नेटवर्क
जांच आगे बढ़ी तो पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में कई संदिग्धों के बारे में जानकारी सामने आई. विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई के दौरान कनाडा भेजे जा रहे अन्य पार्सलों को भी रोका गया. पुलिस के अनुसार, एक अन्य पार्सल से 921 ग्राम, तीसरे निर्यात कंसाइनमेंट से 1,196 ग्राम और आरोपी सिमरनजीत सिंह के कब्जे से 23 ग्राम अफीम बरामद हुई. इस तरह पूरे ऑपरेशन में कुल 5.138 किलोग्राम अफीम बरामद की गई. पुलिस के मुताबिक कनाडा के अंतरराष्ट्रीय बाजार में बरामद खेप की अनुमानित कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपये है.
ड्रग्स के बदले हथियार पहुंचाने का आरोप
पुलिस का दावा है कि भारत से अफीम कनाडा भेजी जाती थी, जहां इसे बेचकर हासिल रकम का इस्तेमाल अर्श डल्ला के नेटवर्क को मजबूत करने और विदेशी हैंडलरों को भुगतान करने में किया जाता था. पुलिस के मुताबिक, इन भुगतानों के बदले पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियार भारत पहुंचाए जा रहे थे. इन हथियारों को अर्श डल्ला से जुड़े गैंग सदस्यों और सहयोगियों तक पहुंचाए जाने की बात जांच में सामने आई है. जांच एजेंसियों के अनुसार इस नेटवर्क में भारत से ड्रग्स बाहर और हथियार भारत के अंदर लाने की एक समानांतर व्यवस्था काम कर रही थी.
1.5 लाख रुपये किलो की अफीम
क्राइम ब्रांच के अनुसार, भारत में करीब 1.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम की कीमत पर खरीदी जाने वाली अफीम कनाडा में कथित तौर पर 50 से 100 कनाडाई डॉलर प्रति ग्राम तक बिक सकती है. भारतीय मुद्रा में यह लगभग 3,300 से 6,700 रुपये प्रति ग्राम बैठती है. पुलिस का कहना है कि इसी भारी मुनाफे को नेटवर्क की आर्थिक रीढ़ के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था और ड्रग्स से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा हथियारों और कथित आतंकी गतिविधियों की फंडिंग में लगाया जा रहा था.
GPS डेड-ड्रॉप और एन्क्रिप्टेड ऐप से ऑपरेशन
जांच में नेटवर्क के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी GPS लोकेशन के जरिए बताए गए डेड-ड्रॉप पॉइंट से अफीम हासिल करते थे. इसके बाद मादक पदार्थों को सिल्वर-फॉयल से तैयार फॉल्स बॉटम के नीचे या कभी-कभी कपड़ों के भीतर छिपाया जाता था. पार्सल की बुकिंग के लिए कथित तौर पर फर्जी KYC दस्तावेज और निर्दोष लोगों के नाम इस्तेमाल किए जाते थे. नेटवर्क के सदस्य स्थानीय स्तर पर भी कनाडाई WhatsApp नंबरों और Signal जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए संपर्क में रहते थे. पैसों के लेनदेन के लिए कथित तौर पर रिश्तेदारों और सहयोगियों के बैंक खातों, UPI तथा प्रॉक्सी/बेनामी खातों का इस्तेमाल किया जाता था.
क्राइम ब्रांच ने 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार
पुलिस के मुताबिक, भारत में नेटवर्क का ऑपरेशनल कोऑर्डिनेटर पंजाब का रहने वाला हरदीप सिंह था. उस पर GPS आधारित डेड-ड्रॉप से अफीम हासिल करने, उसे आगे पहुंचाने और विदेशी कंसाइनी की जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप है. उसके खिलाफ पहले भी पंजाब के बरनाला में NDPS का मामला दर्ज होने की बात पुलिस ने कही है.
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हरियाणा का रहने वाला यदविंदर सिंह उर्फ जसन संधू (30) अफीम की खरीद, पैकिंग और छिपाने की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभा रहा था और भारत में मौजूद आरोपियों को विदेशी हैंडलरों से जोड़ता था. उसकी निशानदेही पर राजस्थान से भेजे जा रहे एक और पार्सल की जानकारी मिली.
पंजाब का रहने वाला सिमरनजीत सिंह (24) फर्जी KYC दस्तावेजों के जरिए पार्सल बुक कराने और अफीम को सामान्य सामान के बीच छिपाकर कनाडा भेजने की जिम्मेदारी संभालता था. उसके कब्जे से भी अफीम बरामद की गई.
राजस्थान का रहने वाला जीवन सिंह (23) राजस्थान मॉड्यूल में ऑपरेशनल लिंक और डिस्पैचर की भूमिका में था. उसकी निशानदेही पर आगे भेजे जा रहे अफीम के एक पार्सल का पता चला.
डिजिटल डिवाइस और बैंक खातों से खुले राज
क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की. पुलिस का कहना है कि इन डिवाइस से विदेशी कंसाइनी, पार्सल की पैकिंग, डिलीवरी और संपर्क से संबंधित जानकारी मिली. इसके साथ ही बैंक खातों, UPI लेनदेन और कॉल एवं इंटरनेट डेटा रिकॉर्ड की भी जांच की गई. पुलिस के मुताबिक, वित्तीय जांच में ऐसे लेनदेन सामने आए जिनके जरिए मुख्य साजिशकर्ताओं तक सीधे पहुंचने से बचने की कोशिश की गई थी.
कौन है अर्श डल्ला?
पुलिस के मुताबिक अर्शदीप सिंह गिल उर्फ अर्श डल्ला पंजाब के मोगा का रहने वाला है और 2018 में कनाडा चला गया था. गृह मंत्रालय ने जनवरी 2023 में उसे UAPA के तहत आतंकवादी घोषित किया था. फरवरी 2023 में खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF) को भी UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया था. आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक अर्श डल्ला पर हत्या, जबरन वसूली, टारगेट किलिंग, आतंकी फंडिंग तथा ड्रग्स और हथियारों की सीमा पार तस्करी जैसे गंभीर आरोप हैं. पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ 50 से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्तता सामने आई है.
जांच अभी जारी
क्राइम ब्रांच के मुताबिक चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद इस मामले की जांच पूरी नहीं हुई है. विदेशी हैंडलरों, अर्श डल्ला से जुड़े कथित नेटवर्क और पंजाब में सक्रिय अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच जारी है. जांच एजेंसी अब ड्रग्स की खरीद से लेकर कनाडा में बिक्री, उससे हासिल रकम, विदेशी हैंडलरों को भुगतान और भारत में ड्रोन के जरिए हथियारों की कथित आपूर्ति तक पूरे फाइनेंशियल और लॉजिस्टिक ट्रेल को जोड़ने में जुटी है.
दिल्ली से रुम्मान उल्ला खान की रिपोर्ट
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