Doctor Ragging: गुजरात के सूरत में जूनियर डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में पुलिस ने दो रेजिडेंट डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया. दोनों पर रैगिंग का आरोप है. दो महीने पहले सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज में PG मेडिकल के पहले साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी. मौत के दो महीने बाद पुलिस ने रविवार को दो सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों को गिरफ़्तार किया. उन पर छात्र और नौ अन्य लोगों को परेशान और रैगिंग करने का आरोप है. असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस Z R देसाई ने बताया कि आरोपी डॉक्टरों दीक्षिता घेवरिया और हिना भूत, को तब पकड़ा गया जब वे गिरफ़्तारी से बच रही थीं. हर्ष पांड्या की मौत के बाद वे भाग रही थीं. हर्ष 9 अगस्त को अपने हॉस्टल के कमरे में फंदे से लटका हुआ मिला था.
चार PG छात्रों के खिलाफ दर्ज थी FIR
9 अगस्त की सुबह पांड्या के फंदे से लटके मिलने के बाद पुलिस ने न्यू सिविल हॉस्पिटल से जुड़े GMC के दूसरे साल के चार PG छात्रों के ख़िलाफ़ FIR दर्ज की थी. देसाई ने कहा कि चार रेजिडेंट डॉक्टरों में से दो को रविवार को गिरफ़्तार किया गया. एंटी-रैगिंग कमेटी के अनुसार, आरोपी पांड्या की रैगिंग में शामिल थे, जिसके बाद उसने आत्महत्या कर ली. उन्होंने बताया कि आरोपी गिरफ़्तारी से बचने के लिए अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घरों में छिपे हुए थे और केस रद्द करने की याचिकाएं दायर कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि दो अन्य आरोपी निराली वसावे और अनुज माहेश्वरी, को अभी गिरफ़्तार किया जाना बाकी है.
10 अन्य रेजिडेंट डॉक्टरों को भी परेशान करने का आरोप
खातोदरा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127 (2) (गलत तरीके से बंधक बनाना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) और 54, तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है. इंस्टीट्यूट की शिकायत के अनुसार, दूसरे साल के रेजिडेंट डॉक्टरों को पहले साल के रेजिडेंट डॉक्टरों को कोई काम सौंपने की इजाज़त नहीं है. फिर भी, आरोपी ने माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के पहले साल के 10 रेजिडेंट डॉक्टरों को परेशान किया. देसाई ने कहा कि जब पांड्या ने मार्च-अप्रैल में एडमिशन लिया, तो तीन-चार महीने तक रैगिंग चलती रही.
आरोपी डॉक्टरों ने पांड्या को किया था बेइज्जत
शिकायत में कहा गया है कि आरोपी डॉक्टरों ने पांड्या और दूसरों को बेइज्ज़त किया और अपशब्द कहे. साथ ही, उन्होंने फैकल्टी से झूठी शिकायतें कीं कि वे अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं कर रहे थे. शिकायत के मुताबिक, 5 अगस्त को सीनियर छात्रों ने पहले साल के छात्रों को WhatsApp मैसेज भेजकर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की सीरोलॉजी लैब में बुलाया. वहां उन्हें दो घंटे तक रोके रखा, उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया और भद्दी बातें कहकर बेइज्ज़त किया.
जांच के लिए बनी थी हाई-लेवल कमेटी
इस मामले की जांच के लिए बनी एक हाई-लेवल कमेटी ने माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉ. सुमैया मुल्ला और फैकल्टी सदस्यों डॉ. संगीता राजदे, डॉ. योगिता मिस्त्री और डॉ. लतिका पुरोहित को कारण बताओ नोटिस (show-cause notice) भी जारी किया था. इसके बाद एंटी-रैगिंग कमेटी ने पहले साल के नौ रेजिडेंट डॉक्टरों और मृतक छात्र के पिता की शिकायतों के आधार पर माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट में काम करने वाले सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी सदस्यों, टेक्नीशियनों और सफाईकर्मियों के बयान दर्ज किए.
