Professor Career Roadmap: अगर आप फ्यूचर में कॉलेज के प्रोफेसर बनना चाहते हैं और कोर्स को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो यहां आपको पूरा करियर रोडमैप दिया गया है.
27 April, 2026
बच्चों का भविष्य उनके करियर से तय होता है और करियर बनाने की शुरुआत स्कूल से ही हो जाती है. इसलिए जरूरी है कि आप स्कूल में रहते हुए अपना फ्यूचर प्लान कर लें. CBSE जल्द ही 12वीं क्लास की रिजल्ट जारी करने वाला है. इसके बाद कुछ बच्चे टीचिंग फील्ड में एक अच्छी सिक्योर जॉब करने के बारे में सोचते हैं, जिसके लिए कॉलेज के प्रोफेसर की जॉब सबसे बेस्ट है. लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि इसके लिए क्या करना और कब करना है. इस कन्फ्यूजन में उनका समय निकल जाता है और वे बाद में पछताते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि कॉलेज का प्रोफेसर बनने के पूरे रोडमैप क्या है.
अपने फेवरेट सब्जेक्ट से ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन
प्रोफेसर बनने के लिए आपको सबसे पहले 12वीं पास करके अपने फेवरेट सब्जेक्ट से ग्रेजुएशन करना है, जिसमें आपको 3-4 साल लगेंगे. ग्रेजुएशन के बाद आपको उसी सब्जेक्ट में पोस्ट ग्रेजुएशन करना होगा, जिसमें 55 प्रतिशत से ज्यादा मार्क्स लाना जरूरी है.

UGC NET एग्जाम
जब आप अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर लेते हैं, तब आपको UGC NET का एग्जाम देना होगा. UGC NET पास करने के बाद आप चाहें तो कॉलेच में असिसटेंट प्रोफेसर बन सकते हैं. यह एग्जाम उसके लिए अनिवार्य है. वहीं राज्य स्तर के कॉलेज में प्रोफेसर बनने के लिए आप स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट ( SET) भी दे सकते हैं. अगर आप UGC NET में JRF क्वालिफाई करते हैं तो सरकार आपको करीब 35, 000 रुपए प्रति महीने की फेलोशिप देती है.
PhD एडमिशन
अब पड़ाव थोड़ा मुश्किल हो जाता है. देशभर की सभी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए PhD करना भी अनिवार्य है.इसके बाद आपको यूनिवर्सिटी के नोटिफिकेशन पर नजर रखनी होगी. आपको यह भी देखना होगा कि किस यूनिवर्सिटी में आपके सब्जेक्ट का प्रोफेसर (गाइड) है, क्योंकि आप उनके अंडर काम करेंगे. इसके बाद आपको इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. यहां आपको अपना रिसर्च प्रपोजल (सिनॉप्सिस) पेश करना होगा. इसका मतलब है कि आप किस टॉपिक पर रिसर्च करना चाहते हैं और क्यों करना चाहते हैं. अगर कमिटी को आपका आइडिया पसंद आता है, तो आपको एडमिशन मिल जाएगा.
रिसर्च और थीसिस लिखना
एडमिशन के बाद, आपको पहले 6 महीने से 1 साल तक कोर्स वर्क पूरा करना होगा. यह कोर्स आपको रिसर्च मेथोडोलॉजी सिखाता है. आखिर में, एक एग्जाम होता है जिसे पास करना होता है. अब आपका असली काम शुरू होता है. अगले 3 से 5 साल तक, आप अपने टॉपिक पर रिसर्च करते हैं और डाटा इकट्ठा करते हैं. आखिर में आप अपनी रिसर्च को एक किताब के रूप में लिखते हैं, जिसे थीसिस कहते हैं.

थीसिस सबमिशन और वाइवा
यूनिवर्सिटी आपकी थीसिस रिव्यू के लिए एक्सपर्ट्स को भेजती है. अगर सब कुछ सही है, तो आपका वाइवा होता है, जहां आपसे आपके काम के बारे में सवाल पूछे जाते हैं. यह एग्जाम पास करने पर डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी यानी PhD की डिग्री मिलती है. अब आप कॉलेज में प्रोफेसर के लिए अप्लाई कर सकते हैं.
कितनी होती है सैलरी
सैलरी की बात करें, तो असिसटेंट प्रोफेसर की बेसिक सैलरी 57,700 रुपए होती है, जो अन्य भत्ते मिलाकर 80 हजार से 1 लाख तक पहुंच जाती है. वहीं प्रोफेसर की सैलरी 1,44,200 रुपए तक होती है, जो अन्य भत्ते मिलाकर 1.6 से 2.2 लाख तक पहुंच जाती है.
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